New Delhi: पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की पार्टी (TMC) को विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद से लगने लगा था कि अब ममता के सामने कुनबा बचाने की अहम चुनौती है। जब तक वे राज्य की सत्ता में मजबूत थीं, तब तक पार्टी के भीतर का असंतोष दबा हुआ था, लेकिन जैसे ही पार्टी की हार हुई असंतुष्टों के स्वर तेज हो उठे।आज की स्थिति यह है कि पार्टी के असंतुष्ट विधायक न सिर्फ अलग गुट बनाने की बात कर रहे हैं, बल्कि उनकी रणनीति टीएमसी के चुनाव चिन्ह पर दावेदारी की भी है।
नया गुट बनाएंगे बागी
खास बात यह है कि राज्य विधानसभा चुनाव में ममता की पार्टी को 80 सीटें मिली। इनमें से अधिकांश विधायक बगावत करके नया गुट बनाने के पक्ष में हैं। नया गुट बनाने के लिए प्रयासरत नेताओं का दावा है कि 80 में से 60 विधायक उनके साथ हैं। खबर है कि TMC से निष्कासित 2 विधायक संदीपन साहा और ऋतब्रत बनर्जी बुधवार सुबह 11 बजे विधानसभा पहुंचे। वे स्पीकर से मिलकर 59 विधायकों के समर्थन का दावा पेश कर सकते हैं।वे स्पीकर से मांग करने वाले हैं कि हमारे पास दो-तिहाई बहुमत है, इसलिए चुनाव चिन्ह हमारा होना चाहिए।वे चाहते हैं कि विधानसभा में विपक्ष का नेता भी उनका हो।
New Delhi: अलग-थलग पड़तीं ममता
बागी गुट के नेताओं ने ममता बनर्जी के एकाधिकार और निर्णय लेने की शैली पर सवाल उठाए हैं। इस गुट के दावों में इसलिए भी दम दिखाई देता है कि इस बीच ममता बनर्जी द्वारा बुलाई गई बैठकों में कई विधायक शामिल नहीं हुए।जिन ममता के एक इशारे पर विधायक हर समय तत्पर रहते थे, आज वे ही विधायक उनकी बैठकों से कतरा रहे हैं, तो साफ है कि टीएमसी में ममता का राजनीतिक वर्चस्व खतरे में हैं।वे अलग-थलग पड़ती जा रही हैं।
New Delhi: राहुल गांधी शरणम् गच्छामि
तृणमूल कांग्रेस में ममता बनर्जी के नेतृत्व को मिल रही चुनौतियों को लेकर अब दूसरी पार्टियों के नेताओं को भी चुटकी लेने का मौका मिल गया है। इस बीच पूर्व सांसद और कांग्रेस नेता उदित राज ने व्यंग्यपूर्ण लहजे में कहा कि टीएमसी कांग्रेस का विरोध करके उसी तरह पैदा हुई जैसे कि आम आदमी पार्टी पैदा हुई थी।टीएमसी आम आदमी पार्टी की तरह ही खत्म भी होगी।लिहाजा अब टीएमसी को कांग्रेस में विलय कर लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि “टीएमसी बचती नजर नहीं आती है, क्योंकि इसकी कोई विचारधारा नहीं है।यह केवल कांग्रेस के खिलाफ झूठा आरोप लगाकर, धरना-प्रदर्शन और मारपीट करके स्थापित पार्टी है। ऐसी पार्टियां बहुत दिनों तक नहीं चलती हैं।ममता बनर्जी को सीधा राहुल गांधी शरणम् गच्छामि करना चाहिए।”








