Home » मध्य प्रदेश » NEET पेपर लीक की खबर से टूटी आकांक्षा ने फांसी लगाकर दी जान, सुसाइड नोट में लिखा- ‘सॉरी मम्मी पापा…’

NEET पेपर लीक की खबर से टूटी आकांक्षा ने फांसी लगाकर दी जान, सुसाइड नोट में लिखा- ‘सॉरी मम्मी पापा…’

NEET पेपर लीक ने ली एक और जान

MP News: मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले के मगनिया गांव में एक ऐसी घटना हुई है जिसने पूरे इलाके को गम और सन्नाटे में डुबो दिया। डॉक्टर बनने का सपना देख रही 19 वर्षीय आकांक्षा चतुर्वेदी अब इस दुनिया में नहीं है। जिस बेटी की सफलता के सपने उसके माता-पिता ने अपनी आंखों में सजाए थे, उसी बेटी की अर्थी को कंधा देने की नौबत आ गई।

कठिन मेहनत कर रही थी आकांक्षा

आकांक्षा पिछले कई वर्षों से डॉक्टर बनने के लिए कठिन मेहनत कर रही थी। वह नागपुर में रहकर NEET परीक्षा की तैयारी कर रही थी। परीक्षा देने के बाद वह बेहद खुश थी और उसे पूरा विश्वास था कि इस बार उसका चयन हो जाएगा। लेकिन अचानक सामने आई पेपर लीक की खबर ने उसके सपनों की नींव हिला दी। परिजनों का कहना है कि पेपर लीक की खबर सुनने के बाद आकांक्षा पूरी तरह बदल गई थी। जो बेटी भविष्य के सपने देखा करती थी, वह चुप रहने लगी। उसने खाना-पीना कम कर दिया और खुद को कमरे तक सीमित कर लिया। धीरे-धीरे तनाव और निराशा ने उसे इस कदर घेर लिया कि 20 मई 2026 को उसने फांसी लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली।

MP News: माता-पिता से माफी मांगते लिखा…

आकांक्षा अपने पीछे एक ऐसा सुसाइड नोट छोड़ गई, जिसे पढ़कर किसी का भी दिल भर आए। उसने अपने माता-पिता से माफी मांगते हुए लिखा कि अब उसमें दोबारा परीक्षा देने की हिम्मत नहीं बची है और वह उनके सपनों को पूरा नहीं कर सकी। उसकी लिखी हर पंक्ति एक टूटे हुए मन और बिखरे हुए सपनों की कहानी बयां कर रही थी। सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि आकांक्षा की पढ़ाई के लिए उसके पिता कृष्ण कुमार चौबे ने अपनी सामर्थ्य से कहीं ज्यादा संघर्ष किया था। किसान होने के बावजूद उन्होंने किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) से करीब तीन लाख रुपये का कर्ज लिया, रिश्तेदारों से उधार मांगा और यहां तक कि जमीन तक गिरवी रख दी। खुद आर्थिक और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से जूझते हुए भी उन्होंने बेटी की पढ़ाई में कोई कमी नहीं आने दी।

लेकिन जिस बेटी को डॉक्टर बनाकर परिवार की तकदीर बदलने का सपना देखा गया था, वह सपना हमेशा के लिए अधूरा रह गया। घटना के बाद राजनीतिक दलों और छात्र संगठनों के नेताओं का पीड़ित परिवार के घर पहुंचना शुरू हो गया। कांग्रेस और एनएसयूआई नेताओं ने इस घटना को परीक्षा प्रणाली की विफलता बताते हुए परिवार को आर्थिक सहायता दी और कर्ज चुकाने में मदद का आश्वासन भी दिया। आकांक्षा की मौत ने एक बार फिर देश की प्रतियोगी परीक्षा प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर कब तक पेपर लीक जैसी घटनाएं लाखों छात्रों की मेहनत और भविष्य के साथ खिलवाड़ करती रहेंगी? कब तक सपनों का बोझ और असफलता का डर छात्रों की जिंदगी छीनता रहेगा?

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