Foreign Victims Compensation: दक्षिण दिल्ली के पॉश इलाके मालवीय नगर में स्थित एक होटल-रेस्टोरेंट में लगी भीषण आग ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है। देर रात हुए इस दर्दनाक हादसे में अब तक 21 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। मृतकों में कई विदेशी नागरिकों के भी शामिल होने की जानकारी सामने आई है। हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि जिन विदेशी मेहमानों ने इस त्रासदी में अपनी जान गंवाई, क्या उनके परिवारों को भी भारत सरकार की ओर से मुआवजा मिलेगा?आग की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कई लोग होटल के कमरों में फंस गए और उन्हें बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिल सका। दमकल विभाग और राहत एजेंसियों ने घंटों मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया, लेकिन तब तक कई परिवार उजड़ चुके थे। घटना के बाद प्रशासन ने जांच के आदेश दे दिए हैं और होटल की सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
विदेशी नागरिकों को मुआवजे को लेकर क्या है नियम?
भारतीय कानून के तहत किसी होटल अग्निकांड या इसी तरह की दुर्घटना में मारे गए विदेशी नागरिकों को केंद्र या राज्य सरकार की ओर से स्वतः मुआवजा देने का कोई बाध्यकारी प्रावधान नहीं है। हालांकि ऐसी बड़ी मानवीय त्रासदियों के दौरान केंद्र सरकार प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) या संबंधित राज्य सरकारें मानवीय आधार पर अनुग्रह राशि देने का फैसला कर सकती हैं।यदि सरकार राहत पैकेज की घोषणा करती है तो आमतौर पर उसमें राष्ट्रीयता के आधार पर भेदभाव नहीं किया जाता। ऐसे मामलों में भारतीय और विदेशी दोनों नागरिकों के परिजनों को समान रूप से सहायता प्रदान की जा सकती है।
Foreign Victims Compensation: दूतावास के जरिए पूरी होती है राहत की प्रक्रिया
विदेशी नागरिकों के परिजनों तक राहत राशि पहुंचाने में उनके संबंधित दूतावास की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। दूतावास भारत सरकार और स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित कर आवश्यक दस्तावेज तैयार करवाता है। इसके बाद कानूनी उत्तराधिकारियों को राहत राशि या अन्य सहायता उपलब्ध कराई जाती है।यदि जांच में यह सामने आता है कि होटल में फायर सेफ्टी मानकों का पालन नहीं किया गया था, आपातकालीन निकास मार्ग पर्याप्त नहीं थे या किसी अन्य लापरवाही के कारण आग लगी, तो होटल प्रबंधन के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई हो सकती है। ऐसी स्थिति में मृतकों के परिजन भारतीय अदालतों में हर्जाने और मुआवजे के लिए दावा भी कर सकते हैं।कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार विदेशी नागरिकों के परिवार भी भारतीय कानून के तहत उतने ही अधिकार रखते हैं जितने किसी भारतीय नागरिक के परिजन। यदि लापरवाही साबित होती है तो अदालत होटल मालिकों और प्रबंधन को भारी मुआवजा देने का आदेश दे सकती है।
Foreign Victims Compensation: उपभोक्ता अदालत भी बन सकती है न्याय का रास्ता
चूंकि विदेशी नागरिक होटल की सेवाओं के भुगतान करने वाले ग्राहक थे, इसलिए उनके परिवार उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत भी न्याय की मांग कर सकते हैं। यदि होटल की सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर खामियां पाई जाती हैं तो उपभोक्ता अदालतें सेवा में कमी मानते हुए पीड़ित परिवारों के पक्ष में बड़ा मुआवजा तय कर सकती हैं।फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है और प्रशासन हादसे के कारणों का पता लगाने में जुटा हुआ है। शुरुआती जांच में शॉर्ट सर्किट और सुरक्षा मानकों में संभावित चूक की आशंका जताई जा रही है। हालांकि अंतिम तस्वीर जांच रिपोर्ट आने के बाद ही साफ होगी।मालवीय नगर का यह अग्निकांड न केवल दिल्ली बल्कि पूरे देश के लिए एक बड़ा चेतावनी संकेत बनकर सामने आया है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि जांच में क्या खुलासे होते हैं और मृतकों के परिवारों को आखिर कितना न्याय मिल पाता है।
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