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Cockroach Survival Story: युग बदले, महाविनाश हुआ, डायनासोर खत्म हो गए आखिर कॉकरोच धरती पर कैसे बच गए?

Cockroach Survival Story: युग बदले, महाविनाश हुआ, डायनासोर खत्म हो गए आखिर कॉकरोच धरती पर कैसे बच गए?

Cockroach Survival Story: आज दिल्ली के जंतर-मंतर पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ का प्रदर्शन चर्चा का विषय बना हुआ है। पार्टी का नाम सुनकर लोगों के मन में एक दिलचस्प सवाल भी उठ रहा है कि आखिर कॉकरोच धरती पर कब आए और ऐसी कौन-सी खासियत है जिसने उन्हें करोड़ों साल तक जिंदा रखा, जबकि डायनासोर जैसे विशाल जीव धरती से हमेशा के लिए गायब हो गए।वैज्ञानिकों के अनुसार, कॉकरोचों के पूर्वज धरती पर लगभग 30 करोड़ साल पहले कार्बोनिफेरस काल में मौजूद थे। यानी डायनासोरों के आने से करीब 12 करोड़ साल पहले ही ये जीव पृथ्वी पर अपना अस्तित्व बना चुके थे। जीवाश्मों से पता चलता है कि इनके शुरुआती पूर्वज प्राचीन महाद्वीप पेंजिया के घने और नमी वाले जंगलों में रहते थे।

महाप्रलय में भी क्यों नहीं खत्म हुए कॉकरोच?

करीब 6.6 करोड़ साल पहले एक विशाल एस्टेरॉइड के पृथ्वी से टकराने के बाद बड़े पैमाने पर विनाश हुआ था। इस आपदा में डायनासोर समेत अनेक जीव-प्रजातियां समाप्त हो गईं। लेकिन कॉकरोच बच गए। इसकी सबसे बड़ी वजह उनकी शारीरिक बनावट और अद्भुत अनुकूलन क्षमता मानी जाती है।कॉकरोच का शरीर बेहद चपटा और लचीला होता है। यही कारण है कि वे छोटी-से-छोटी दरार, पत्थरों के नीचे की जगह और जमीन के भीतर मौजूद सुरक्षित स्थानों में आसानी से छिप सकते हैं। प्राकृतिक आपदाओं, जंगलों की आग और अत्यधिक गर्मी के दौरान यही छिपने की क्षमता उनके लिए ढाल बन गई।

Cockroach Survival Story: जो मिला, वही खा लिया

कॉकरोचों की सबसे बड़ी ताकत उनकी भोजन संबंधी आदतें हैं। जहां कई जीव विशेष प्रकार के पौधों या शिकार पर निर्भर रहते हैं, वहीं कॉकरोच लगभग हर तरह का जैविक पदार्थ खा सकते हैं। सड़ते हुए पेड़-पौधे, मृत जीव, कागज, गोंद, बाल, कार्डबोर्ड और यहां तक कि सड़ी हुई लकड़ी भी उनका भोजन बन सकती है।यही वजह है कि जब बड़े पैमाने पर जीव-जंतु और वनस्पतियां नष्ट हुईं, तब भी कॉकरोचों को जीवित रहने के लिए भोजन की कमी का सामना नहीं करना पड़ा।

Cockroach Survival Story: अंडों की मजबूत सुरक्षा ने बचाई नस्ल

कॉकरोच अपने अंडों को एक मजबूत सुरक्षात्मक कवच में रखते हैं, जिसे वैज्ञानिक भाषा में ‘ऊथेका’ कहा जाता है। यह कवच अंडों को अत्यधिक गर्मी, ठंड, सूखेपन और अन्य प्रतिकूल परिस्थितियों से बचाता है।विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी आपदा में वयस्क कॉकरोच मर भी जाएं, तब भी उनके अंडे सुरक्षित रह सकते हैं और अनुकूल परिस्थितियां लौटने पर नई पीढ़ी जन्म ले सकती है।कॉकरोच ठंडे खून वाले यानी कोल्ड-ब्लडेड जीव होते हैं। इसलिए उन्हें जीवित रहने के लिए अपेक्षाकृत कम ऊर्जा की आवश्यकता होती है। वे बिना भोजन के एक महीने से अधिक समय तक और बिना पानी के कई हफ्तों तक जीवित रह सकते हैं।अकाल, सूखा या पर्यावरणीय संकट जैसे दौर में यही क्षमता उनके लिए जीवनरक्षक साबित हुई और उन्होंने मुश्किल परिस्थितियों में भी अपना अस्तित्व बनाए रखा।

रेडिएशन सहने की भी है ताकत

कॉकरोचों को रेडिएशन सहन करने की क्षमता के लिए भी जाना जाता है। हालांकि यह धारणा कि वे किसी भी परमाणु विस्फोट के बाद आसानी से बच जाएंगे, पूरी तरह सही नहीं है, लेकिन यह सच है कि वे इंसानों की तुलना में कहीं अधिक रेडिएशन झेल सकते हैं। इसकी वजह उनकी कोशिकाओं का अपेक्षाकृत धीमी गति से विभाजित होना है, जिससे रेडिएशन का असर उन पर कम पड़ता है।कॉकरोच आज भी वैज्ञानिकों के लिए अनुकूलन और जीवित रहने की क्षमता का शानदार उदाहरण हैं। करोड़ों वर्षों में पृथ्वी ने कई महाविनाश, जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाएं देखीं, लेकिन कॉकरोच हर चुनौती के बाद खुद को ढालते हुए आगे बढ़ते रहे। यही कारण है कि उन्हें धरती के सबसे सफल और लंबे समय तक जीवित रहने वाले जीवों में गिना जाता है।

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