Iran-US Tensions: ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिका पर युद्धविराम (सीजफायर) का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है। मंत्रालय का कहना है कि अमेरिका तनाव कम करने के बजाय अपनी सैन्य कार्रवाई के जरिए पूरे क्षेत्र की शांति और सुरक्षा को खतरे में डाल रहा है। ईरानी विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी बयान में कहा कि अमेरिकी सेना ने सीरिक क्षेत्र और केश्म द्वीप स्थित तटीय रडार एवं निगरानी केंद्रों को निशाना बनाया, जो युद्धविराम समझौते का सीधा उल्लंघन है।
अमेरिका का ड्रोन गिराने और रडार साइट्स पर कार्रवाई का दावा
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने दावा किया है कि होर्मुज क्षेत्र में ईरान के चार अटैक ड्रोन मार गिराए गए। इसके बाद संभावित हमलों को रोकने के लिए ईरानी रडार साइट्स पर कार्रवाई की गई। CENTCOM के अनुसार ईरान ने इसके जवाब में कुवैत और बहरीन की दिशा में सात बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं, जिनमें से छह को हवा में ही नष्ट कर दिया गया, जबकि एक मिसाइल अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंच सकी।
Iran-US Tensions: “परिणामों की जिम्मेदारी अमेरिका की होगी”
ईरान ने चेतावनी देते हुए कहा है कि अमेरिकी कार्रवाई के बाद जो भी हालात पैदा होंगे और उनके जो भी परिणाम होंगे, उनकी पूरी जिम्मेदारी अमेरिका की होगी। तेहरान का आरोप है कि वाशिंगटन की आक्रामक नीति क्षेत्र को एक बड़े संघर्ष की ओर धकेल रही है।
Iran-US Tensions: लेबनान में भी जारी है संघर्ष
इसी बीच दक्षिणी लेबनान में इजराइली सैन्य कार्रवाई जारी है। लेबनानी अधिकारियों के अनुसार हालिया हमलों में कई लोगों की मौत हुई है, जबकि दर्जनों लोग घायल हुए हैं। इजराइली सेना ने दावा किया है कि उसने लेबनान से दागे गए दो प्रोजेक्टाइल को उत्तरी इजराइल में प्रवेश करने से पहले ही मार गिराया।
ईरान-अमेरिका शांति समझौता फंसा
अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौता भी फिलहाल अटका हुआ है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान की लगभग 24 अरब डॉलर (करीब 2.29 लाख करोड़ रुपये) की फ्रीज संपत्तियों को जारी करने का मुद्दा दोनों देशों के बीच प्रमुख विवाद बना हुआ है। ईरान चाहता है कि समझौते के साथ ही उसकी संपत्ति का बड़ा हिस्सा जारी किया जाए, जबकि अमेरिका इस पर अभी सहमत नहीं है।
ब्रिटेन और जॉर्डन ने भी जताई चिंता
ब्रिटेन में फिलिस्तीन समर्थक प्रदर्शन जारी हैं, जबकि जॉर्डन ने लेबनानी सैन्य काफिले पर हुए इजराइली हमले की कड़ी निंदा की है। जॉर्डन ने इसे लेबनान की संप्रभुता और क्षेत्रीय स्थिरता के खिलाफ बताया है।
मध्य पूर्व पर टिकी दुनिया की नजर
ईरान, अमेरिका, इजराइल और लेबनान के बीच बढ़ते तनाव ने एक बार फिर पूरे मध्य पूर्व को अस्थिरता के दौर में ला खड़ा किया है। कूटनीतिक प्रयासों के बावजूद सैन्य गतिविधियों में तेजी आने से अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ गई है और दुनिया की नजरें अब इस क्षेत्र के घटनाक्रम पर टिकी हुई हैं।
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