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टीएमसी के राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय ने दिया इस्तीफा, कोयल मलिक भी छोड़ेंगी पद

ममता बनर्जी की पार्टी को बड़ा झटका

TMC Crisis: तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। पार्टी के राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय ने अपने सांसद पद से इस्तीफा देने के साथ-साथ टीएमसी की सदस्यता भी छोड़ दी है। वहीं, कोयल मलिक ने भी अपना पद छोड़ने का फैसला किया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब राज्यसभा चुनाव में केवल 10 दिन का समय बचा है।

काफी समय से दोनों नेताओं के टीएमसी से अलग होने की चर्चा चल रही थी। सुखेंदु शेखर रॉय ने कुछ दिन पहले ही संकेत दिया था कि टीएमसी के कई सांसद ममता बनर्जी का साथ छोड़ सकते हैं। अब उन्होंने खुद भी पार्टी से अलग होने का निर्णय ले लिया है।

राज्यसभा में टीएमसी की संख्या घटेगी

दोनों सांसदों के इस्तीफे के बाद राज्यसभा में टीएमसी की ताकत कम हो जाएगी। पार्टी के सांसदों की संख्या 13 से घटकर 11 रह जाएगी।कोयल मलिक को टीएमसी ने हाल ही में राज्यसभा भेजा था और उनका कार्यकाल अप्रैल 2032 तक था। वहीं, सुखेंदु शेखर रॉय का कार्यकाल अगस्त 2029 तक चलने वाला था, लेकिन उन्होंने उससे पहले ही इस्तीफा दे दिया।

TMC Crisis: ममता बनर्जी की पार्टी को बड़ा झटका
ममता बनर्जी की पार्टी को बड़ा झटका

TMC Crisis: उपचुनाव में बीजेपी को मिल सकता है फायदा

दोनों सीटों के खाली होने के बाद उपचुनाव कराए जाएंगे। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इससे बीजेपी को लाभ मिल सकता है। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 200 से अधिक सीटें जीती थीं, जबकि टीएमसी लगभग 80 सीटों तक सिमट गई थी। ऐसे में राज्यसभा की खाली सीटों पर बीजेपी अपने उम्मीदवारों को जीत दिलाने की स्थिति में दिखाई दे रही है। इसके अलावा टीएमसी के भीतर बढ़ती असंतुष्टि और संभावित क्रॉस-वोटिंग भी पार्टी की मुश्किलें बढ़ा सकती है।

काकोली घोष दस्तीदार भी नाराज

पिछले एक महीने के दौरान लोकसभा और राज्यसभा के कई सांसदों ने टीएमसी के कामकाज और नेतृत्व शैली पर सवाल उठाए हैं। कई नेताओं ने सार्वजनिक रूप से पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की आलोचना भी की है।ममता बनर्जी की करीबी मानी जाने वाली काकोली घोष दस्तीदार भी पार्टी से नाराज बताई जा रही हैं। उन्होंने टीएमसी के सभी संगठनात्मक पदों से इस्तीफा दे दिया है।

काकोली घोष दस्तीदार ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर अपनी शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने अपने साथी सांसद और टीएमसी नेता कल्याण बनर्जी पर दुर्व्यवहार और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है। उनके अनुसार, कल्याण बनर्जी ने उनके साथ गाली-गलौज की थी।

57 विधायक पहले ही कर चुके हैं बगावत

टीएमसी के लिए मुश्किलें केवल सांसदों तक सीमित नहीं हैं। पार्टी के 57 विधायक पहले ही बगावत कर चुके हैं और उन्होंने विधानसभा में अपना अलग विपक्ष का नेता भी चुन लिया है।

बागी विधायकों ने ऋतब्रत बनर्जी को विपक्ष का नेता चुना, जबकि ममता बनर्जी ने शोभनदेब चट्टोपाध्याय को इस पद के लिए नामित किया था। इसके बाद ममता बनर्जी ने विधायकों की बैठक भी बुलाई थी, लेकिन उसमें बड़ी संख्या में विधायक शामिल नहीं हुए। इससे पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष और गुटबाजी के संकेत मिल रहे हैं।

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