PM Modi: पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा ने एक विशेष लेख के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस ऐतिहासिक कार्यकाल के महत्व को रेखांकित किया है, जिसमें उन्होंने देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के सर्वाधिक समय तक निर्वाचित प्रधानमंत्री रहने के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है। इस लेख में देवेगौड़ा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जवाहरलाल नेहरू, दोनों के कार्यकालों तथा उनके समय की समकालीन परिस्थितियों की एक तुलनात्मक समीक्षा भी प्रस्तुत की है।
सोच-समझकर फैसले लेते हैं मोदी
‘मोदी इसलिए इतने सफल हैं क्योंकि वे सोच-समझकर फैसले लेते हैं’ शीर्षक वाले लेख में एच.डी. देवेगौड़ा ने लिखा है कि नरेंद्र मोदी अब भारत के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित प्रधानमंत्री बन गए हैं। यह जवाहरलाल नेहरू के रिकॉर्ड से भी आगे है। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि यह इस तथ्य का प्रमाण है कि भारत में लोकतंत्र न केवल कायम रहा, बल्कि लगातार मजबूत भी हुआ है। पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि 1947 में कई समान रूप से प्रतिभाशाली और समर्पित लोगों में से नेहरू को देश का पहला प्रधानमंत्री चुना गया था और यह सब असाधारण परिस्थितियों में हुआ था। असल में जनता पर महात्मा गांधी के नैतिक प्रभाव ने ही इस नियुक्ति को सुनिश्चित किया था। इसके बाद नेहरू 1952 के पहले आम चुनाव में महात्मा गांधी का आशीर्वाद और स्वतंत्रता आंदोलन की प्रतिष्ठा, दोनों को साथ लेकर उतरे थे। उस समय, कांग्रेस पार्टी का एकाधिकार था। उसे किसी राजनीतिक मुकाबले का सामना नहीं करना पड़ा। हालांकि आम चुनाव में 53 राजनीतिक पार्टियों ने हिस्सा लिया, लेकिन उनकी मौजूदगी और असर बहुत कम था।
PM Modi: भारत एक बहुत अलग देश बना
उस समय से लेकर 2014 में नरेंद्र मोदी के पहली बार और 2024 में तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने तक, भारत एक बहुत अलग देश बन गया। आकार, विविधता और अर्थव्यवस्था के मामले में तो यह लगभग पहचान में न आने लायक हो गया। देवेगौड़ा ने लिखा कि यह कहना आकर्षक तो लगता है, लेकिन पूरी तरह उचित नहीं कि 2014 या 2024 की तुलना में 1952 में प्रधानमंत्री चुना जाना आसान था। उन्होंने कहा कि जब वह 1996 में प्रधानमंत्री बने थे, तब तक राजनीतिक परिस्थितियां, चुनावी पैमाना और प्रतिस्पर्धा पूरी तरह बदल चुके थे। देश अधिक जागरूक, अधिक जुड़ा हुआ और अधिक परिपक्व हो चुका था। देवेगौड़ा ने कहा कि नेहरू-गांधी परिवार के बाहर के प्रधानमंत्रियों के लिए कोई विशेष चमक-दमक या रुतबा नहीं था। दूसरों के पास आगे बढ़ने के लिए कोई विशेषाधिकार, खानदानी रसूख या संरक्षण उपलब्ध नहीं था। नरेंद्र मोदी और मेरे मामले में हमारे पास वह सामाजिक और सांस्कृतिक पूंजी भी नहीं थी, जिसका कई अन्य प्रधानमंत्रियों ने लाभ उठाया था। मेरा कार्यकाल ज्यादा लंबा नहीं चला। मैं केवल 11 महीने तक प्रधानमंत्री रहा। मैं सोचता हूं कि पीएम मोदी किस आशीर्वाद से बिना किसी थकान के शीर्ष पर बने हुए हैं। न तो उनमें कोई थकान दिखाई देती है और न ही उन्हें चुनने वाले लोगों में। पद पर रहते हुए उनका स्टैमिना और सहनशक्ति वास्तव में विशेष है।
आज का भारत नेहरू के समय की तुलना में कहीं अधिक मुखर
एच.डी. देवेगौड़ा ने आगे लिखा कि यदि केवल राजनीतिक मुकाबले की बात करें तो 1952 के चुनावों में 53 पार्टियां मैदान में थीं, जबकि 2024 में मोदी का मुकाबला 2,593 पार्टियों से था। नेहरू के समय मतदाताओं की संख्या 17 करोड़ थी, जो 2014 तक बढ़कर 83 करोड़ हो गई। भारत की आबादी, जो 1952 में 34 करोड़ थी, आज 146 करोड़ से अधिक है।” उन्होंने आगे कहा कि एक और बात जिसने मेरा ध्यान खींचा, वह यह है कि नेहरू की कैबिनेट में भारत की सामुदायिक, सांस्कृतिक और जातीय विविधता की झलक नहीं मिलती थी। यहां तक कि जब नेहरू प्रधानमंत्री के तौर पर अपने तीसरे और आख़िरी कार्यकाल में थे, तब भी उनकी कैबिनेट में ज़्यादातर ऊंची जाति के पुरुष ही थे। नेहरू ने काका केलकर कमीशन की रिपोर्ट को ठुकरा दिया था, जिसमें दबे-कुचले और पिछड़े वर्गों को आरक्षण देने की कोशिश की गई थी। पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि मोदी की मौजूदा कैबिनेट अधिक विविधतापूर्ण है। इसमें 27 ओबीसी, 10 एससी और 5 एसटी सदस्य हैं। महिलाओं की भागीदारी भी बढ़ी है। उन्होंने लिखा कि पीएम मोदी ने अप्रैल 2026 में संसद की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव गंभीरता से रखा है, ताकि महिलाओं को ऐतिहासिक प्रतिनिधित्व मिल सके और देश अधिक मजबूत संघ के रूप में आगे बढ़ सके। उन्होंने यह भी कहा कि महिला आरक्षण विधेयक पहले ही पारित कराया जा चुका है।
देवेगौड़ा ने कहा कि आज का भारत नेहरू के समय की तुलना में कहीं अधिक मुखर और सक्रिय लोकतंत्र है। जाति, संवैधानिक अधिकारों, नागरिक अधिकारों, लैंगिक समानता और पर्यावरण जैसे मुद्दों को लेकर जागरूकता काफी बढ़ी है। उन्होंने कहा कि नेहरू के समय देश की बड़ी आबादी अशिक्षित थी और लोकतांत्रिक सरकार से अपेक्षाओं को लेकर भी स्पष्ट समझ नहीं थी। आज के नागरिक, हमारे देश और लोकतंत्र की भलाई के लिए ज़्यादा पढ़े-लिखे और जागरूक हैं। उनकी नज़र से कुछ भी नहीं बचता। उन्होंने कहा, “जवाहरलाल नेहरू को अधिक से अधिक आधा दर्जन अखबारों से ही जूझना पड़ता था, जबकि पीएम मोदी को हर समय लाखों लोगों की नजरों का सामना करना पड़ता है। क्योंकि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आलोचना बिना पुष्टि वाली, अनुचित और बहुत कठोर व व्यक्तिगत भी हो सकती है। साथ ही, उन्हें मुख्यधारा की प्रेस की चौबीसों घंटे होने वाली आलोचना और कभी-कभी दुश्मनी का भी सामना करना पड़ता है। नेहरू के समय में टेलीविजन न्यूज नहीं थी।” देवेगौड़ा ने कहा, “मैं प्रधानमंत्री मोदी को इस बात के लिए बधाई देता हूं कि उनकी देखरेख में भारत एक मजबूत लोकतंत्र बना हुआ है।
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