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नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट: एनसीआर को वैश्विक एविएशन हब बनाने की दिशा में बड़ा कदम

नोएडा एयरपोर्ट: कनेक्टिविटी का नया केंद्र

Noida Airport: उत्तर प्रदेश के जेवर में विकसित किया जा रहा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट देश की सबसे महत्वाकांक्षी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में से एक है। लगभग 11,200 करोड़ रुपये की लागत से पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत तैयार किया गया यह एयरपोर्ट भारत के सबसे बड़े ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट प्रोजेक्ट्स में शामिल है।इस एयरपोर्ट के शुरू होने से न केवल राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) की हवाई कनेक्टिविटी मजबूत होगी, बल्कि यह क्षेत्र को एक अंतरराष्ट्रीय एविएशन हब के रूप में विकसित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

प्रधानमंत्री मोदी ने किया था शिलान्यास

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट परियोजना का शिलान्यास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 नवंबर 2021 को किया था। एयरपोर्ट के निर्माण और विकास की जिम्मेदारी स्विट्जरलैंड की कंपनी ज्यूरिख इंटरनेशनल एयरपोर्ट एजी को सौंपी गई है।परियोजना के पहले चरण में 1,334 हेक्टेयर क्षेत्र में निर्माण कार्य पूरा किया गया है। इस चरण पर लगभग 11 हजार करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।सभी चार चरणों के पूरा होने के बाद नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट एशिया का सबसे बड़ा और दुनिया का छठा सबसे बड़ा एयरपोर्ट बनने की क्षमता रखता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 28 मार्च को इस एयरपोर्ट का उद्घाटन भी किया।

Noida Airport: शुरुआती चरण में 45 शहरों के लिए उड़ानें

एयरपोर्ट के शुरुआती संचालन चरण में यहां से देश के लगभग 45 शहरों के लिए करीब 65 वाणिज्यिक उड़ानें शुरू की जाएंगी। इससे यात्रियों को बेहतर हवाई संपर्क मिलेगा और दिल्ली-एनसीआर के अलावा आसपास के क्षेत्रों के लोगों को भी सुविधा होगी।

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक इसकी आधुनिक और तेज यात्री व्यवस्था है। यहां यात्रियों को प्रवेश द्वार से बोर्डिंग गेट तक पहुंचने में 20 मिनट से भी कम समय लगेगा।सुरक्षा जांच पूरी होने के बाद यात्रियों को केवल 60 मीटर लंबे कॉरिडोर से गुजरना होगा, जिसके बाद वे सीधे बोर्डिंग गेट तक पहुंच सकेंगे। यह सुविधा यात्रियों के समय की बचत करेगी और एयरपोर्ट अनुभव को अधिक सुविधाजनक बनाएगी।

Noida Airport:  नोएडा एयरपोर्ट: कनेक्टिविटी का नया केंद्र
नोएडा एयरपोर्ट: कनेक्टिविटी का नया केंद्र

मजबूत होगी सड़क और परिवहन कनेक्टिविटी

कनेक्टिविटी के मामले में भी नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट बेहद महत्वपूर्ण स्थान पर स्थित है। यह यमुना एक्सप्रेस-वे के पास बनाया गया है, जो ग्रेटर नोएडा और आगरा को सीधे जोड़ता है।इसके अलावा एयरपोर्ट को ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे और दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे से भी जोड़ा जा रहा है। इससे यात्रियों और व्यापारिक गतिविधियों को बेहतर परिवहन सुविधा मिलेगी।

हाई-स्पीड रेल और आरआरटीएस से जुड़ेगा एयरपोर्ट

एयरपोर्ट की कनेक्टिविटी को और बेहतर बनाने के लिए प्रस्तावित दिल्ली-वाराणसी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर का स्टेशन भी इसके आसपास विकसित करने की योजना है।इसके अलावा गाजियाबाद से नोएडा एयरपोर्ट तक 71.1 किलोमीटर लंबे आरआरटीएस कॉरिडोर के निर्माण की योजना बनाई गई है। इस कॉरिडोर में 11 स्टेशन होंगे और इसके निर्माण पर लगभग 16 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जाने का अनुमान है।

लास्ट माइल कनेक्टिविटी के लिए नई सुविधाएं

यात्रियों को एयरपोर्ट तक आसानी से पहुंचाने के लिए उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (UPSRTC) ने बस सेवाएं शुरू कर दी हैं।इसके साथ ही महिंद्रा लॉजिस्टिक्स कैब सेवाओं के लिए ड्राइवर प्रशिक्षण, वाहन ट्रैकिंग और डिजिटल भुगतान जैसी सुविधाओं को विकसित कर रहा है।

वहीं, उबर, रैपिडो और मेकमायट्रिप जैसी ऐप आधारित कैब सेवाएं भी संचालन के लिए तैयार हैं। ओला को भी एयरपोर्ट सेवाओं के लिए लाइसेंस प्रदान किया जा चुका है।इसके अलावा स्व-चालित (Self-drive) और चालक सहित कार रेंटल सेवाओं के लिए कई कंपनियों को लाइसेंस जारी किए गए हैं, जिससे यात्रियों को परिवहन के कई विकल्प मिल सकेंगे।

आर्थिक विकास और निवेश को मिलेगी नई गति

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट केवल एक हवाई अड्डा नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश और पूरे देश के आर्थिक विकास का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है।इस परियोजना से पर्यटन, व्यापार, रोजगार और निवेश के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है। इसके संचालन के बाद एनसीआर क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर पहचान मिलने के साथ-साथ भारत के एविएशन सेक्टर को भी नई दिशा मिल सकती है।

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