RBI Rules : कभी होम लोन लेने गए और बैंक वाले ने साथ में बीमा भी पकड़ा दिया? या फोन का बैंकिंग ऐप खोला और लोन का पॉपअप आकर परेशान करने लगा? अगर हां, तो आपके लिए अच्छी खबर है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने 15 जून 2026 को बड़ा आदेश जारी किया है। अब बैंक ग्राहकों पर अपनी मर्जी से कोई भी फालतू प्रोडक्ट नहीं थोप पाएंगे। RBI ने जबरन बंडलिंग, गलत जानकारी देकर सामान बेचना और ऐप पर चालाकी से फंसाने वाले तरीकों पर पूरी रोक लगा दी है। यह नियम 1 जनवरी 2027 से लागू होगा। बैंकों को अपना सिस्टम ठीक करने के लिए करीब साढ़े छह महीने का वक्त दिया गया है।

RBI ने पहली बार मिस सेलिंग को साफ तौर पर परिभाषित किया है। इसके तहत चार चीजें आती हैं। पहला, ग्राहक की जरूरत देखे बिना कोई प्रोडक्ट बेच देना। दूसरा, आधी अधूरी जानकारी देकर स्कीम थमा देना। तीसरा, ग्राहक की साफ मंजूरी के बिना सर्विस चालू कर देना। चौथा, लोन देने के बदले बीमा खरीदने की शर्त रखना।
RBI ने साफ की स्थिति
अगर बैंक की गड़बड़ी साबित हो गई तो उसे ग्राहक का पूरा पैसा लौटाना होगा। साथ ही नुकसान का हर्जाना भी देना पड़ेगा। ग्राहक एग्रीमेंट मिलने के 30 दिन के अंदर शिकायत कर सकते हैं। अक्सर होम लोन देते वक्त बैंक कर्मचारी अपनी पार्टनर कंपनी का बीमा लेने का दबाव बनाते हैं। RBI ने इस जबरन बंडलिंग को बंद कर दिया है। हां, सुरक्षा के लिए बैंक लोन प्रोटेक्शन प्लान मांग सकता है। लेकिन ग्राहक वह बीमा किसी भी कंपनी से खरीदने के लिए आजाद है। बैंक अपने पार्टनर से खरीदने के लिए मजबूर नहीं कर सकता।
पहले से टिक बॉक्स का खेल खत्म
अभी तक ऐप या फॉर्म पर मैं सहमत हूं का बॉक्स पहले से टिक रहता था। ग्राहक अनजाने में हां कर देता था। अब डिजिटल स्क्रीन पर डिफॉल्ट में No या मैं सहमत नहीं हूं का विकल्प रहेगा। जब तक ग्राहक खुद Yes नहीं दबाएगा, कोई सर्विस शुरू नहीं होगी। बैंक को हर प्रोडक्ट के लिए अलग से मंजूरी लेनी होगी। लोन की मंजूरी को बीमा की मंजूरी नहीं माना जाएगा।कमीशन पर काम करने वाले डायरेक्ट सेलिंग एजेंट अक्सर ग्राहकों को तंग करते हैं। अब वे भी RBI की नजर में हैं। ये एजेंट सुबह 9 बजे से शाम 7 बजे तक ही फोन कर पाएंगे। बिना इजाजत घर या ऑफिस नहीं आ सकते।
बैंक को अपनी वेबसाइट पर सभी एजेंटों की लिस्ट डालनी होगी। अगर एजेंट ब्रांच में बैठते हैं तो उनकी ड्रेस या आईडी कार्ड बैंक कर्मचारियों से अलग होना चाहिए। ताकि ग्राहक कन्फ्यूज न हों।
11 हथकंडों पर बैन
| क्रम | डार्क पैटर्न / चाल | विवरण |
|---|---|---|
| 1 | झूठी जल्दबाजी | “ऑफर खत्म होने वाला है” जैसा टाइमर लगाकर दबाव बनाना। |
| 2 | चुपके से चार्ज जोड़ना | लोन लेते वक्त बिना बताए फ्रॉड कवर या अन्य शुल्क जोड़ देना। |
| 3 | शर्मिंदा करना | ऑफर ठुकराने पर ऐसा संदेश देना कि आप सुरक्षा नहीं चाहते। |
| 4 | जबरन पेज बदलना | पॉपअप बंद करने पर भी लोन पेज पर रीडायरेक्ट करना। |
| 5 | सब्सक्रिप्शन का जाल | चालू करना आसान लेकिन बंद करने का विकल्प छुपा देना। |
| 6 | इंटरफेस की चालाकी | फायदे वाला बटन चमकदार रखना और बंद करने का बटन छुपाना। |
| 7 | दिखाना कुछ देना कुछ | कम ब्याज दिखाकर बाद में अधिक चार्ज लगाना। |
| 8 | किश्तों में कीमत छिपाना | प्रोसेसिंग फीस या कुल लागत आखिरी स्टेप में दिखाना। |
| 9 | छिपा हुआ विज्ञापन | बैंक अलर्ट के नाम पर लोन/ऑफर नोटिफिकेशन भेजना। |
| 10 | बार-बार तंग करना | एक बार “No” कहने के बाद भी बार-बार परमिशन मांगना। |
| 11 | उलझाने वाले शब्द | “अगर आप ऑफर नहीं चाहते तो बॉक्स अनचेक करें” जैसी confusing language। |
वित्त मंत्री भी जता चुकी हैं नाराजगी
यह कदम अचानक नहीं उठाया गया। पिछले साल नवंबर में SBI के एक कार्यक्रम में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि जबरन बीमा बेचने से लोन महंगा हो जाता है। उन्होंने चेतावनी दी थी कि भारतीय न्याय संहिता के तहत गलत तरीके से प्रोडक्ट बेचना अब अपराध माना जाएगा। RBI का यह फैसला ग्राहकों को बैंक की मनमानी से बचाएगा। अब बैंकिंग ज़्यादा साफ और ईमानदार होगी।
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Written By : Mansi Sharma








