Javed Jaffrey : लगातार तेज चल रही इस आधुनिक दुनिया में 60 सेकंड की रील भी लोग 2x की स्पीड पर चला रहे हैं। ऐसे में लोगों का पेशेंस लेवल कम होता जा रहा है। जावेद जाफरी ने अपने बेटे का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने उससे कहा कि बैठकर सनसेट देखो लेकिन वह ऐसा नहीं कर पाया। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ उनके घर की नहीं बल्कि पूरी दुनिया की समस्या है। जावेद के मुताबिक, आज की पीढ़ी लगातार बदलते फ्रेम और तेज कंटेंट के बीच बड़ी हुई है, जबकि असली जिंदगी की रफ्तार उससे बिल्कुल अलग है। यही वजह है कि कई बच्चों का पेशंस लेवल पहले के मुकाबले काफी कम होता जा रहा है।

जावेद जाफरी ने कहा कि छोटा बेटा और उसकी पूरी जनरेशन आईपैड और डिजिटल स्क्रीन के साथ बड़ी हुई है।ऐसे में उनका दिमाग लगातार बदलते विजुअल्स और मूवमेंट देखने का आदी हो चुका है। आज के बच्चे हर समय स्क्रीन पर चलने वाला कंटेंट देख रहे हैं।
Javed Jaffrey ने जताई चिंता
उनके मुताबिक इस जनरेशन का दिमाग लगातार 24 से 30 फ्रेम कंज्यूम कर रहा है। लेकिन रियल लाइफ ऐसी नहीं होती। असली जिंदगी में हर सेकंड कुछ नया नहीं होता। कई बार चीजें धीरे-धीरे होती हैं लेकिन जो दिमाग लगातार तेज गति वाले कंटेंट का आदी हो चुका हो, उसे रियल लाइफ का वह एक फ्रेम भी ठहरा हुआ लग सकता है।
छोटे और बड़े बेटे में दिखा फर्क
जावेद जाफरी ने कहा कि यह फर्क उन्हें अपने ही घर में दिखाई देता है। उनके मुताबिक उनके बड़े बेटे के साथ यह समस्या कम है, क्योंकि वह उस दौर में बड़ा हुआ जब स्क्रीन और गैजेट्स का असर आज जितना नहीं था। वहीं छोटा बेटा बचपन से ही डिजिटल डिवाइसेज के बीच बड़ा हुआ है. इसी वजह से दोनों की आदतों और पेशंस लेवल में फर्क दिखाई देता है।
यह समस्या किसी एक बच्चे तक सीमित नहीं है बल्कि पूरी दुनिया में ऐसी बातें सुनने को मिल रही हैं।
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Written By : Anushka








