Bengal News: पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की नियुक्ति को लेकर चल रहे राजनीतिक विवाद में गुरुवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया। कलकत्ता हाईकोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) नेता शोभनदेब चट्टोपाध्याय की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोई भी अंतरिम आदेश देने से इनकार कर दिया। अदालत के इस फैसले के बाद विधानसभा अध्यक्ष द्वारा ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष नियुक्त किए जाने का निर्णय फिलहाल बरकरार रहेगा।
टीएमसी के दो गुटों में नेता प्रतिपक्ष को लेकर टकराव
दरअसल, नेता प्रतिपक्ष के पद को लेकर टीएमसी के भीतर ही दो अलग-अलग गुट आमने-सामने आ गए हैं। एक ओर पार्टी नेतृत्व के करीबी गुट ने शोभनदेब चट्टोपाध्याय के नाम का प्रस्ताव भेजा था, जबकि बागी विधायकों के गुट ने ऋतब्रत बनर्जी को इस पद के लिए आगे किया।विधानसभा अध्यक्ष रथींद्र बसु ने बागी गुट के प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष नियुक्त कर दिया था। इसी फैसले को चुनौती देते हुए शोभनदेब चट्टोपाध्याय हाईकोर्ट पहुंचे थे।
Bengal News: हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों से मांगा जवाब
मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस कृष्णा राव ने स्पष्ट किया कि फिलहाल अदालत स्पीकर के फैसले में हस्तक्षेप नहीं करेगी। कोर्ट ने दोनों पक्षों को अपने-अपने हलफनामे दाखिल करने का निर्देश दिया है। साथ ही विरोधी पक्ष को दो सप्ताह के भीतर जवाब देने को कहा गया है।
Bengal News: ममता बनर्जी गुट के लिए बड़ा झटका
हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 28 जुलाई, 2026 तय की है। तब तक ऋतब्रत बनर्जी पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के पद पर बने रहेंगे।राजनीतिक जानकारों का मानना है कि हाईकोर्ट द्वारा अंतरिम राहत से इनकार किया जाना ममता बनर्जी समर्थक गुट के लिए एक बड़ा झटका है। वहीं, बागी विधायकों के खेमे को इससे अस्थायी तौर पर बड़ी राहत मिली है। अब सबकी नजरें 28 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां इस राजनीतिक संघर्ष की दिशा तय हो सकती है।








