Home » ऑटो अपडेट » India-UK FTA ब्रिटेन के EV बाजार पर नजर, टाटा-महिंद्रा को मिलेगा बड़ा मौका

India-UK FTA ब्रिटेन के EV बाजार पर नजर, टाटा-महिंद्रा को मिलेगा बड़ा मौका

India-UK FTA : भारत और ब्रिटेन के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के बाद भारतीय ऑटोमोबाइल कंपनियां ब्रिटेन के इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) बाजार में नए अवसर तलाश रही हैं। टाटा मोटर्स, महिंद्रा एंड महिंद्रा और मारुति सुजुकी जैसी प्रमुख कंपनियां अब ब्रिटेन में इलेक्ट्रिक वाहनों के निर्यात की संभावनाओं का आकलन कर रही हैं। यह समझौता 15 जुलाई से लागू होगा और दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को नई दिशा देने की उम्मीद है।

भारत-ब्रिटेन व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (CETA) के तहत भारत में निर्मित इलेक्ट्रिक, हाइब्रिड और हाइड्रोजन पैसेंजर वाहनों को चरणबद्ध तरीके से ब्रिटेन में टैरिफ-फ्री निर्यात की सुविधा मिलेगी। हालांकि यह व्यवस्था समझौते के छठे वर्ष से लागू होगी और निर्धारित कोटा प्रणाली के तहत संचालित की जाएगी।

India-UK FTA

समझौते के अनुसार 80,000 पाउंड तक की कीमत वाले भारतीय इलेक्ट्रिक, हाइब्रिड और हाइड्रोजन वाहनों को तय कोटा के भीतर ब्रिटेन में बिना शुल्क के प्रवेश मिलेगा। छठे वर्ष में 17,600 वाहनों के निर्यात की अनुमति होगी, जबकि 15वें वर्ष तक यह सीमा बढ़कर 88,000 वाहनों तक पहुंच जाएगी। वहीं 80,000 पाउंड से अधिक कीमत वाले वाहनों को इस समझौते के तहत किसी प्रकार की टैरिफ छूट नहीं मिलेगी।

टाटा मोटर्स ने इस समझौते को भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने और टिकाऊ परिवहन को बढ़ावा देने वाला महत्वपूर्ण कदम बताया है। कंपनी का कहना है कि चरणबद्ध और कोटा-आधारित व्यवस्था भारत में बनी इलेक्ट्रिक गाड़ियों के लिए ब्रिटेन में नए निर्यात अवसर पैदा करेगी।

टाटा-महिंद्रा को मिलेगा बड़ा मौका

महिंद्रा एंड महिंद्रा के ऑटोमोटिव प्रमुख वेलुसामी आर. ने कहा कि ब्रिटेन एक बड़ा राइट-हैंड-ड्राइव बाजार है और यह समझौता भारत में निर्मित इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए नए अवसर खोल सकता है। उन्होंने बताया कि कंपनी अपने इलेक्ट्रिक एसयूवी पोर्टफोलियो के वैश्विक विस्तार के तहत इस संभावना का अध्ययन करेगी। वहीं, मारुति सुजुकी के वरिष्ठ कार्यकारी अधिकारी राहुल भारती ने कहा कि कंपनी पहले ही अपनी इलेक्ट्रिक एसयूवी ई-विटारा का यूरोप में निर्यात शुरू कर चुकी है और ब्रिटेन उसके प्रमुख बाजारों में शामिल है। उनके अनुसार यह समझौता ‘मेक इन इंडिया फॉर द वर्ल्ड’ पहल को और मजबूती देगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता भारतीय ऑटो उद्योग की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने में मदद करेगा और भारत को इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रमुख निर्यातक देशों में शामिल करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। अनुमान है कि इस समझौते के चलते 2030 तक भारत और ब्रिटेन के बीच द्विपक्षीय व्यापार दोगुना होकर 100 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।

Read More : Father’s Day 2026: एक बेटी की पहल से शुरू हुआ वो दिन, जो आज दुनिया भर में बन चुका है पिता के सम्मान का प्रतीक

Written By : Kanishka