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अमेरिका-ईरान बातचीत में बढ़ा तनाव, ट्रंप की धमकी के बाद ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने जताई नाराजगी

ट्रंप की धमकी से बातचीत में आई रुकावट

US Iran Talks: अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत में अब तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। स्विट्जरलैंड के जेनेवा में हो रही इस बातचीत के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की धमकी के बाद स्थिति खराब हो गई।ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर ईरान अपने सहयोगी संगठनों (प्रॉक्सी) को नियंत्रित नहीं करता है, तो अमेरिका ईरान पर पहले हुए हमले से भी बड़ा हमला कर सकता है। ट्रंप के इस बयान के बाद ईरान ने भी कड़ा जवाब दिया।

रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने ट्रंप की धमकी वाली भाषा पर कड़ा विरोध दर्ज कराया और इसके बाद बैठक से बाहर निकल गया। हालांकि, बातचीत को जारी रखने के लिए मध्यस्थता कर रहे Pakistan और Qatar ने ईरानी प्रतिनिधियों को मनाने की कोशिश की, लेकिन वे सफल नहीं हो सके।

ईरान ने ट्रंप के बयान का दिया जवाब

ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट करते हुए कहा, “अगर ईरान ने हिजबुल्लाह को नहीं रोका, तो अमेरिका उस पर पिछले सप्ताह किए गए हमले से भी बड़ा हमला करेगा।”इसके जवाब में ईरान की नेशनल असेंबली के स्पीकर और वार्ताकार Mohammad Bagher Ghalibaf ने कहा कि अगर अमेरिकी धमकियां प्रभावी होतीं, तो अमेरिका आज इस स्थिति में नहीं होता।

उन्होंने अमेरिकी नेताओं को अपने बयानों में सावधानी बरतने की सलाह दी। गलीबाफ ने कहा कि केवल बयान देने से कुछ नहीं बदलेगा, फैसला और कार्रवाई ईरान करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि ईरानी सेना किसी भी स्थिति का जवाब देने के लिए तैयार है।

विरोध के बाद बैठक कक्ष से बाहर निकला ईरानी दल

ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने अमेरिकी अधिकारियों के सामने ट्रंप की भाषा को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की। विरोध इतना बढ़ गया कि ईरानी प्रतिनिधि बैठक हॉल छोड़कर बाहर चले गए।हालांकि, इससे पहले दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों के बीच लगभग 82 मिनट तक बातचीत हुई थी।

पहले दौर की बातचीत में किन मुद्दों पर हुई चर्चा?

पहले दौर की वार्ता में ईरान ने अपनी आर्थिक स्थिति और प्रतिबंधों से जुड़े कई मुद्दे उठाए।ईरान के अनुसार, बातचीत में उसकी फ्रीज की गई संपत्ति को वापस करने पर चर्चा हुई। इसके अलावा ईरान के ऊर्जा क्षेत्र पर लगे प्रतिबंधों में राहत देने के मुद्दे पर भी बातचीत हुई।

ईरानी प्रतिनिधिमंडल के एक सदस्य ने सरकारी मीडिया को बताया कि अमेरिका के साथ हुई पहली बैठक में ईरानी तेल पर लगे प्रतिबंधों में राहत देने के लिए एक ड्राफ्ट को अंतिम रूप दे दिया गया है। उन्होंने दावा किया कि जल्द ही प्रतिबंधों में छूट लागू की जा सकती है।

6 अरब डॉलर की संपत्ति लौटाने पर चर्चा

समझौते के तहत कतर में जमा ईरान के करीब 6 अरब डॉलर को वापस करने की बात सामने आई है।वहीं, अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख JD Vance ने कहा कि अमेरिका ईरान के साथ पुराने विवादों को पीछे छोड़कर आगे बढ़ने के लिए तैयार है।

दोनों देशों के बीच हुए समझौता ज्ञापन (MOU) में यह बात शामिल है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर 60 दिनों के अंदर एक समझौते तक पहुंचने की कोशिश की जाएगी।हालांकि, अमेरिका ने बातचीत के पहले चरण में यह स्पष्ट कर दिया है कि ईरान को परमाणु हथियार रखने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

US Iran Talks: क्या बातचीत का अगला दौर होगा?

ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी Islamic Republic News Agency (IRNA) ने कहा है कि ट्रंप के बयान के बाद बातचीत कठिन दौर में पहुंच गई है।हालांकि, Associated Press की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी प्रतिनिधिमंडल अभी भी बातचीत की प्रक्रिया में शामिल है और उसने वार्ता छोड़ने का कोई संकेत नहीं दिया है।अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का अगला दौर हो पाएगा या नहीं।इसी बीच Israel ने भी कहा है कि उसकी सेना दक्षिणी लेबनान के ब्यूफोर्ट कैसल क्षेत्र से पीछे नहीं हटेगी।

परमाणु कार्यक्रम को लेकर ईरान का सख्त रुख

पहले दौर की बातचीत से साफ हो गया है कि दोनों देशों के बीच समझौता आसान नहीं होगा। सबसे बड़ा विवाद ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर है।ईरान लगातार यह कह रहा है कि उसके परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह रोका नहीं जा सकता।ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने कहा कि ईरान दबाव, जबरदस्ती और अपमान के सामने झुकने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि ईरान अपने विकास और प्रगति के अधिकार को नहीं छोड़ेगा और दुनिया को इस बात को स्वीकार करना होगा।

ईरान ने मांगी ट्रंप से माफी

स्विट्जरलैंड में चल रही बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने सख्त रुख अपनाया है। ईरान ने ट्रंप के बयान को लेकर उनसे माफी की मांग भी की है।हालांकि, बैठक में शामिल अमेरिकी प्रतिनिधियों का रवैया अपेक्षाकृत नरम दिखाई दे रहा है। अब सभी की नजरें इस बात पर हैं कि क्या दोनों देश मतभेदों को दूर कर बातचीत को आगे बढ़ा पाएंगे या फिर यह वार्ता एक बार फिर संकट में फंस जाएगी।

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