Lucknow Coaching Fire: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में सोमवार दोपहर करीब 1:30 बजे एक इमारत में अचानक भीषण आग लग गई। इस हादसे में अब तक 15 लोगों की मौत हो चुकी है। मृतकों में 5 महिलाएं और 10 पुरुष शामिल हैं। मरने वालों में ज्यादातर 20 से 30 साल की उम्र के छात्र और युवा थे। इस घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और राहत एवं बचाव कार्य तुरंत शुरू किया गया।
अलीगंज की इमारत में लगी आग
यह हादसा लखनऊ के अलीगंज इलाके में स्थित एक इमारत में हुआ। जिस बिल्डिंग में आग लगी, उसके बेसमेंट, ग्राउंड फ्लोर और पहले फ्लोर पर पेट शॉप और क्लीनिक संचालित हो रहे थे। वहीं, दूसरे फ्लोर पर लर्निंग स्पेस नाम की लाइब्रेरी (कोचिंग सेंटर) और हेड हॉपर स्टूडियो मौजूद था। इस स्टूडियो में 3D आर्ट प्रोडक्शन और गेम एसेट आउटसोर्सिंग का काम किया जाता था।
आग तेजी से फैलने के बाद दूसरे फ्लोर पर मौजूद कोचिंग के कई छात्रों ने अपनी जान बचाने के लिए खुद को बाथरूम में बंद कर लिया था। हादसे के दौरान जयंत नाम के एक छात्र ने जान बचाने के लिए पहली मंजिल से छलांग लगा दी, जबकि पांच लोग बिजली के तारों का सहारा लेकर नीचे उतरने में सफल हुए।

एसी शॉर्ट सर्किट से आग लगने की आशंका
शुरुआती जांच में आग लगने की वजह एसी में खराबी बताई जा रही है। मंत्री एके शर्मा ने जानकारी दी कि बेसमेंट में लगे एसी में ब्लास्ट होने के बाद आग लगी और देखते ही देखते धुआं पूरी इमारत में फैल गया।आग पर काबू पाने के लिए फायर ब्रिगेड की करीब 19 गाड़ियों को लगाया गया। इसके अलावा SDRF और NDRF की टीमें भी बचाव अभियान में शामिल रहीं। फायरकर्मियों ने इमारत की पीछे वाली दीवार को तोड़कर अंदर फंसे लोगों को बाहर निकाला। इसी रास्ते से कई शव भी बाहर निकाले गए।
एंबुलेंस की कमी से बढ़ी परेशानी
हादसे के बाद घटनास्थल पर मृतकों और घायलों को अस्पताल पहुंचाने के लिए एंबुलेंस कम पड़ गईं। मौके पर मौजूद उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक इस दर्दनाक दृश्य को देखकर भावुक हो गए।उन्होंने कहा कि उन्होंने अपनी आंखों के सामने लोगों के शव बाहर निकलते देखे हैं। हादसे की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने तत्काल राहत कार्य तेज कर दिए।
सीएम योगी ने दिए सख्त कार्रवाई के आदेश
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ ट्रॉमा सेंटर पहुंचकर मृतकों के परिजनों से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि इस घटना के लिए जिम्मेदार किसी भी अधिकारी या व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
मुख्यमंत्री ने मामले की जांच के लिए दो सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। SIT को सात दिनों के भीतर जांच रिपोर्ट सौंपने और दोषी लोगों की जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए गए हैं।इस जांच टीम में पर्यटन, धर्मार्थ एवं संस्कृति विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात और लखनऊ जोन के ADG प्रवीण कुमार को शामिल किया गया है। वहीं, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी दिल्ली से लखनऊ पहुंचे और घटनास्थल का निरीक्षण किया।

ऑटोमैटिक लॉक बना परेशानी की वजह
इस हादसे में जान गंवाने वाले 23 वर्षीय सुखमणि सिंह के दोस्त यश ने बताया कि सुखमणि पिछले चार वर्षों से 3D एनीमेशन ऑफिस में काम कर रहे थे। इस ऑफिस में करीब 40 कर्मचारी कार्यरत थे।उन्होंने बताया कि ऑफिस का मुख्य गेट थंब इंप्रेशन सिस्टम से खुलता था। आग फैलने के बाद गेट ऑटोमैटिक लॉक हो गया, जिसे खोलने में काफी समय लग गया। इस देरी के कारण कई लोगों को बाहर निकलने का पर्याप्त समय नहीं मिल पाया और हादसा और गंभीर हो गया।
इमारत के नक्शे और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
जांच में सामने आया है कि यह इमारत वीरेंद्र शुक्ला की जमीन पर बनी हुई थी। वीरेंद्र शुक्ला सीतापुर रोड स्थित गोविंदपुरम में बने रामेश्वरम इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट (RITM) कॉलेज के मालिक हैं।इमारत का आवासीय नक्शा वीरेंद्र शुक्ला, धीरेंद्र शुक्ला और सुरेंद्र शुक्ला के नाम से पास हुआ था। साल 2014 में इस इमारत को कमर्शियल उपयोग के लिए बदल दिया गया था। नगर निगम साल 2022 से इस पर कमर्शियल टैक्स भी ले रहा था।
मामले में तत्कालीन अधिकारियों और इंजीनियरों की भूमिका की जांच की जा रही है। कार्रवाई के लिए 16 जिम्मेदार लोगों की सूची तैयार की गई है।प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि इमारत में इमरजेंसी एग्जिट की सुविधा नहीं थी। इसी कारण लोगों को समय रहते बाहर निकलने का मौका नहीं मिल पाया।
चौथा आरोपी भी गिरफ्तार
पुलिस ने मामले में चौथे आरोपी सुरेश कुमार शाहू को भी देर रात गिरफ्तार कर लिया। वह राम अभिलाष के पुत्र हैं और केशवनगर, थाना मड़ियांव, लखनऊ के निवासी हैं।लखनऊ अग्निकांड में जान गंवाने वाले मोहम्मद अम्मार के परिवार में गहरा शोक है। बाराबंकी स्थित उनके घर पर परिजन शव के आने का इंतजार करते रहे। परिवार के सदस्य घर के बाहर खड़े होकर अपने बेटे के अंतिम दर्शन की प्रतीक्षा करते रहे।
लखनऊ उत्तरी के भाजपा विधायक नीरज बोरा ने इस घटना को बेहद दुखद और हृदय विदारक बताया। उन्होंने कहा कि जिन परिवारों ने अपने युवा बच्चों को खोया है, उनके नुकसान की भरपाई कभी नहीं हो सकती।
उन्होंने कहा कि घटना को लेकर लोगों की नाराजगी स्वाभाविक है, क्योंकि जब किसी परिवार का युवा सदस्य चला जाता है तो दुख और गुस्सा होना सामान्य है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मामले को गंभीरता से लिया है और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
पीड़ित परिवारों को आर्थिक सहायता
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के आश्रितों को 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की थी।इसी क्रम में विधायक नीरज बोरा ने पीड़ित परिवारों को मुख्यमंत्री राहत सहायता राशि के चेक सौंपे। पोस्टमॉर्टम के बाद शवों को उनके परिजनों को सौंपा जा रहा है। सरकार ने शवों को उनके घर तक पहुंचाने के लिए एंबुलेंस की व्यवस्था भी की है।
लखनऊ अग्निकांड में बाराबंकी के दो युवकों शहजान और मोहम्मद अम्मार की भी मौत हुई है। मोहम्मद अम्मार (24) बाराबंकी के लखपेड़ाबाग इलाके के रहने वाले थे।

शंकराचार्य ने जताया दुख
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने लखनऊ अग्निकांड पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने इस घटना को पूरे समाज के लिए बड़ी और अपूरणीय क्षति बताया।उन्होंने कहा कि जो युवा अपने भविष्य को बेहतर बनाने और शिक्षा हासिल करने में लगे थे, उनका इस तरह अचानक चले जाना बेहद दुखद है। उन्होंने मां आद्याशक्ति भगवती और भगवान विश्वनाथ से प्रार्थना की कि दिवंगत आत्माओं को शांति मिले और उनके परिवारों को इस कठिन समय में दुख सहने की शक्ति मिले।उन्होंने हादसे में घायल सभी लोगों के जल्द स्वस्थ होने की कामना भी की।
अग्निकांड में जान गंवाने वालों की सूची
लखनऊ अग्निकांड में जान गंवाने वालों में मध्य प्रदेश, हरियाणा, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश के लोग शामिल हैं।मृतकों में सागर (28), नीलेश (21), अनामिका (30), अब्दुल रहमान (22), मोहम्मद अम्मार (24), आदित्य श्रीवास्तव (24), जैनी चक्रवर्ती (25), ज्योति (25), संयम (27), शहजान सिद्दीकी (18), सौमाल्या बेरा (24), सुखमणि सिंह (23), अनुष्का (24), भविष्य (25) और सूरज (28) शामिल हैं।
आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज
अलीगंज पुलिस ने इस अग्निकांड मामले में छह नामजद आरोपियों सहित अन्य जिम्मेदार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 110, 105, 125, 3(5) और उत्तर प्रदेश अग्निशमन सेवा अधिनियम की धारा 6/10 के तहत मामला दर्ज किया गया है।
गिरफ्तार आरोपी
मामले में गिरफ्तार आरोपियों में रामकृष्ण उपाध्याय (43), वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला (62) और तूशॉक कृष्णा जायसवाल (31) शामिल हैं।रामकृष्ण उपाध्याय लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र के निवासी हैं। वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला रामेश्वर प्रसाद शुक्ला के पुत्र हैं और मदेयगंज, सीतापुर रोड, लखनऊ के निवासी हैं। वहीं, तूशॉक कृष्णा जायसवाल स्वर्गीय कृष्ण कुमार जायसवाल के पुत्र हैं और बालागंज, थाना ठाकुरगंज, लखनऊ के रहने वाले हैं।

यह हादसा इमारतों में सुरक्षा नियमों की अनदेखी और आपातकालीन व्यवस्थाओं की कमी को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े करता है। मामले की जांच जारी है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।
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