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लखनऊ अग्निकांड में योगी का बड़ा एक्शन: बिल्डिंग मालिक समेत 4 गिरफ्तार, 4 अफसर सस्पेंड; 7 दिन में सच सामने लाएगी SIT

लखनऊ अग्निकांड में योगी का बड़ा एक्शन: बिल्डिंग मालिक समेत 4 गिरफ्तार, 4 अफसर सस्पेंड; 7 दिन में सच सामने लाएगी SIT

Uttar Pradesh: लखनऊ के अलीगंज इलाके में हुए भीषण अग्निकांड के बाद प्रशासन और पुलिस ने बड़ा एक्शन लेते हुए बिल्डिंग मालिक समेत चार लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। हादसे की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले में सख्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर दोषियों की जिम्मेदारी तय करने के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है, जिसे सात दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया गया है।

बिल्डिंग मालिक और स्टूडियो संचालक समेत चार आरोपी गिरफ्तार

पुलिस ने इस मामले में कुल छह लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। दर्ज मुकदमे में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के साथ उत्तर प्रदेश अग्निशमन सेवा अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई है। अब तक जिन चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, उनमें बिल्डिंग मालिक वीरेंद्र शुक्ला, एनिमेशन ट्रेनिंग स्टूडियो के फाउंडर तुषांक कृष्णा जैसवाल, स्टूडियो मैनेजर रामकृष्ण उपाध्याय और सुरेश कुमार साहू शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि अन्य आरोपियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

Uttar Pradesh: लापरवाही पर गिरी गाज, चार अधिकारी निलंबित

अग्निकांड की प्रारंभिक जांच में प्रशासनिक स्तर पर भी गंभीर लापरवाही सामने आने के बाद चार अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। सरकार ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि हादसे के लिए जिम्मेदार किसी भी व्यक्ति या अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा।हादसे के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने सभी निर्धारित कार्यक्रम रद्द कर देर शाम उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में घटना की विस्तृत जांच के लिए दो सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) के गठन का फैसला लिया गया। इस टीम में पर्यटन, धर्मार्थ कार्य एवं संस्कृति विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात और लखनऊ जोन के एडीजी प्रवीण कुमार को शामिल किया गया है।सरकार ने SIT को सात दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। जांच के दौरान आग लगने के वास्तविक कारणों, भवन में मौजूद सुरक्षा व्यवस्थाओं, वैधानिक स्वीकृतियों, फायर सेफ्टी मानकों के पालन और संभावित लापरवाही की गहराई से पड़ताल की जाएगी।

पहले भी विवादों में रही थी यह इमारत

जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि जिस इमारत में यह दर्दनाक हादसा हुआ, उसका इतिहास पहले से विवादों से जुड़ा रहा है। अलीगंज योजना के सेक्टर-डी स्थित भवन संख्या एमएस/102/डी का वर्ष 2014 में आवासीय मानचित्र स्वीकृत किया गया था। हालांकि, वर्ष 2016 में लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने भवन में कथित अवैध निर्माण को लेकर मुकदमा दर्ज कराया था।मामले की सुनवाई के बाद 10 मई 2016 को इमारत को ध्वस्त करने का आदेश भी जारी किया गया था। बाद में भवन स्वामियों की आपत्तियों और पुनर्विचार के बाद 5 जुलाई 2016 को यह आदेश निरस्त कर दिया गया था। अब इस अग्निकांड के बाद भवन के निर्माण, स्वीकृतियों और वास्तविक उपयोग की दोबारा जांच शुरू कर दी गई है।

1980 में हुआ था आवंटन, कई बार बदले मालिक

दस्तावेजों के अनुसार यह भवन मूल रूप से वर्ष 1980 में लॉटरी के माध्यम से आवंटित किया गया था। इसके बाद वर्ष 2005 में इसकी बिक्री विजय कुमार और उषा के नाम हुई। वर्ष 2013 में भवन को वीरेन्द्र प्रताप शुक्ला और सुरेन्द्र प्रताप शुक्ला ने खरीद लिया। बाद में 7 अगस्त 2014 को एलडीए ने भवन का नामांतरण नए मालिकों के पक्ष में कर दिया था।अलीगंज अग्निकांड ने एक बार फिर शहर में फायर सेफ्टी, अवैध निर्माण और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकार की ओर से गठित SIT अब पूरे मामले की तह तक जाकर जिम्मेदार व्यक्तियों और संस्थाओं की भूमिका तय करेगी। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट के आधार पर और भी बड़ी कार्रवाई होने की संभावना जताई जा रही है।

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