Iran crisis: अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए अंतरिम समझौते (MoU) को लागू करने की प्रक्रिया शुरू होती दिखाई दे रही है। इस समझौते का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा ईरान के परमाणु कार्यक्रम की अंतरराष्ट्रीय निगरानी है। इसी बीच इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (IAEA) के प्रमुख Rafael Grossi ने संकेत दिया है कि जल्द ही ईरान के परमाणु ठिकानों का निरीक्षण किया जाएगा। हालांकि, ईरान ने साफ कर दिया है कि उसके संवेदनशील परमाणु स्थलों तक पहुंच का फैसला अंतिम समझौते और अमेरिकी प्रतिबंधों में राहत से जुड़ा होगा।
14 सूत्रीय समझौते के बाद बढ़ी उम्मीद
अमेरिका और ईरान के बीच 17 जून को युद्ध समाप्त करने और तनाव कम करने के उद्देश्य से 14 बिंदुओं वाले अंतरिम MoU पर हस्ताक्षर हुए थे। इस समझौते ने दोनों देशों के बीच 60 दिनों की बातचीत का रास्ता खोला है। बातचीत का मुख्य एजेंडा ईरान के परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय सुरक्षा और प्रतिबंधों से जुड़े मुद्दों का समाधान तलाशना है।
Iran crisis: IAEA चीफ बोले- निरीक्षण होकर रहेगा
जापान में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान IAEA प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने कहा कि परमाणु स्थलों की जांच निश्चित रूप से होगी। उन्होंने बताया कि एजेंसी जल्द ही निरीक्षण की तारीख, प्रक्रिया और स्थान जैसे तकनीकी पहलुओं पर काम शुरू करेगी। ग्रॉसी के अनुसार, समझौते में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि परमाणु सामग्री और उससे जुड़ी गतिविधियों की निगरानी IAEA करेगी। ऐसे में निरीक्षण इस प्रक्रिया का अनिवार्य हिस्सा है।
Iran crisis: यूरेनियम भंडार सबसे बड़ा सवाल
बातचीत के केंद्र में ईरान का समृद्ध (Enriched) यूरेनियम भंडार है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान के पास 60 प्रतिशत तक शुद्धता वाला यूरेनियम मौजूद है। विशेषज्ञों का मानना है कि परमाणु हथियार बनाने के लिए लगभग 90 प्रतिशत तक संवर्धित यूरेनियम की आवश्यकता होती है। यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए है।
अमेरिकी टीम भी रहेगी शामिल
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने दावा किया है कि IAEA के निरीक्षण दल के साथ अमेरिकी विशेषज्ञों की टीम भी मौजूद रहेगी। उनके मुताबिक, ईरान ने इस व्यवस्था पर सहमति जताई है। यदि ऐसा होता है तो यह पहली बार होगा जब हालिया समझौते के बाद अमेरिकी प्रतिनिधि प्रत्यक्ष रूप से इस निरीक्षण प्रक्रिया का हिस्सा बनेंगे।
ईरान ने रखी कड़ी शर्त
दूसरी ओर, ईरान के उप विदेश मंत्री Kazem Gharibabadi ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल उन परमाणु ठिकानों या परमाणु सामग्री तक पहुंच देने की कोई योजना नहीं है, जिन पर पहले हमले हुए थे। उन्होंने कहा कि संवेदनशील परमाणु स्थलों तक पहुंच का मुद्दा तभी आगे बढ़ेगा, जब अमेरिका के साथ अंतिम समझौता हो जाएगा और ईरान पर लगे प्रतिबंधों को हटाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।
आगे क्या?
Iran crisis: फिलहाल दोनों पक्षों के बयान यह संकेत देते हैं कि बातचीत आगे बढ़ रही है, लेकिन कई अहम मुद्दों पर अभी भी मतभेद बने हुए हैं। IAEA निरीक्षण को लेकर दबाव बना रहा है, जबकि ईरान प्रतिबंधों में राहत को प्राथमिक शर्त मान रहा है। ऐसे में आने वाले कुछ सप्ताह यह तय करेंगे कि यह समझौता स्थायी शांति की ओर बढ़ता है या फिर नई चुनौतियां सामने आती हैं।
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