Home » उत्तर प्रदेश » राम मंदिर में दान चोरी पर स्वामी प्रसाद का विवादित बयान बोले- ‘श्रीराम में शक्ति नहीं, वो अपने मंदिर की रक्षा नहीं कर पाए, दूसरों की क्या करेंगे…’

राम मंदिर में दान चोरी पर स्वामी प्रसाद का विवादित बयान बोले- ‘श्रीराम में शक्ति नहीं, वो अपने मंदिर की रक्षा नहीं कर पाए, दूसरों की क्या करेंगे…’

स्वामी प्रसाद का विवादित बयान

UP Politics: उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य के बयान को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। गाजीपुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मौर्य ने भगवान राम, राम मंदिर और धार्मिक मान्यताओं को लेकर कई विवादित टिप्पणियां कीं, जिसके बाद उनका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। स्वामी प्रसाद मौर्य ने अपने संबोधन में कहा कि यदि भगवान राम में दिव्य शक्ति होती, तो राम मंदिर में चोरी करने वाले लोगों को तत्काल दंड मिलता। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि जब मंदिर में हुई चोरी के आरोपियों को कोई नुकसान नहीं हुआ, तो आम लोगों की रक्षा को लेकर भी सवाल खड़े होते हैं।

हनुमान से जुड़ी कथा पर भी की टिप्पणी

आगे राम मंदिर से सोना-चांदी और करोड़ों रुपये की संपत्ति चोरी होने की घटनाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि दोषियों के खिलाफ कोई दैवीय कार्रवाई देखने को नहीं मिली। इसी आधार पर उन्होंने धार्मिक आस्थाओं और चमत्कारों से जुड़ी मान्यताओं पर सवाल खड़े किए।अपने भाषण में मौर्य ने भगवान हनुमान से जुड़ी उस पौराणिक कथा का भी उल्लेख किया, जिसमें बाल हनुमान द्वारा सूर्य को निगलने का वर्णन मिलता है। उन्होंने इस कथा को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से परखने की बात कही और कहा कि किसी भी मान्यता को आंख मूंदकर स्वीकार करने के बजाय तर्क और विवेक की कसौटी पर परखा जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि समाज को शिक्षा और वैज्ञानिक सोच की ओर बढ़ना चाहिए। इसी संदर्भ में उन्होंने गौतम बुद्ध के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी भी बात को केवल इसलिए नहीं मानना चाहिए क्योंकि वह किसी ग्रंथ में लिखी हुई है, बल्कि उसे बुद्धि और तर्क के आधार पर जांचना चाहिए।

शिक्षा व्यवस्था पर सरकार को घेरा

इस दौरान धार्मिक मुद्दों के अलावा स्वामी प्रसाद मौर्य ने उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में बड़ी संख्या में विद्यालयों को बंद करने की तैयारी की गई थी, जिसका विरोध होने पर सरकार को पीछे हटना पड़ा। मौर्य ने कहा कि प्रदेश में शिक्षकों की भारी कमी है और स्कूल पर्याप्त संसाधनों के अभाव में संचालित हो रहे हैं। उनका आरोप था कि शिक्षकों को पढ़ाई के अलावा जनगणना, चुनाव और अन्य प्रशासनिक कार्यों में लगाया जाता है, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होती है।

अपने संबोधन में उन्होंने देश की आर्थिक और सामाजिक स्थिति का मुद्दा भी उठाया। मौर्य ने कहा कि बड़ी संख्या में गरीब परिवार आज भी सरकारी राशन पर निर्भर हैं और बढ़ती शिक्षा लागत के कारण उच्च शिक्षा आम लोगों की पहुंच से दूर होती जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा को महंगा बनाकर गरीब और वंचित वर्गों के लिए उच्च शिक्षा के अवसर सीमित किए जा रहे हैं। उनके अनुसार, यदि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत नहीं किया गया तो सामाजिक असमानता और बढ़ सकती है।

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