US-CHINA: अमेरिका के सांसदों ने चेतावनी दी है कि चीन आर्थिक जासूसी, साइबर ऑपरेशन और व्यावसायिक निवेश के जरिए अमेरिकी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और अन्य उन्नत तकनीकों तक पहुंच बनाने की कोशिशें तेज कर रहा है। इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और वैश्विक तकनीकी नेतृत्व के लिए गंभीर खतरा बताया गया है।
संसदीय सुनवाई में हुए बड़े खुलासे
चीनी कम्युनिस्ट पार्टी पर गठित हाउस सेलेक्ट कमेटी की सुनवाई के दौरान डिफेंस इंटेलिजेंस एजेंसी के पूर्व कार्यवाहक निदेशक डेविड शेड ने कहा कि बीजिंग ने अमेरिकी व्यावसायिक और तकनीकी रहस्य हासिल करने के लिए एक व्यापक तंत्र विकसित किया है। उन्होंने कहा कि चीन साइबर जासूसी, मानव खुफिया नेटवर्क, अकादमिक साझेदारी और व्यावसायिक निवेश के जरिए अमेरिकी तकनीकी बढ़त को चुनौती दे रहा है।
US-CHINA: AI से लेकर क्वांटम टेक्नोलॉजी तक निशाने पर
शेड के अनुसार, चीन की खुफिया एजेंसियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, टेलीकम्युनिकेशन, बायोटेक्नोलॉजी, क्वांटम कंप्यूटिंग और अत्याधुनिक हथियार प्रणालियों पर काम कर रही कंपनियों, विश्वविद्यालयों और शोधकर्ताओं को निशाना बना रही हैं। उन्होंने कहा कि कॉर्पोरेट कंपनियां, प्रोफेसर और रिसर्चर सभी चीन की खुफिया गतिविधियों के प्रमुख लक्ष्य हैं।
‘डिस्टिलेशन अटैक’ पर भी जताई चिंता
सुनवाई के दौरान उन रिपोर्टों का भी जिक्र हुआ, जिनमें दावा किया गया कि चीनी कंपनी अलीबाबा ने अमेरिकी AI कंपनी एंथ्रोपिक पर कथित “डिस्टिलेशन अटैक” किया। इस तकनीक के जरिए महंगे AI मॉडल से जानकारी निकालकर कम लागत में समान मॉडल तैयार किए जा सकते हैं। शेड ने कहा कि इससे चीनी कंपनियां अमेरिकी कंपनियों के वर्षों के महंगे रिसर्च एवं डेवलपमेंट (R&D) को दरकिनार कर तेजी से आगे बढ़ सकती हैं।
US-CHINA: टिकटॉक और डेटा सुरक्षा पर भी फोकस
उन्होंने अमेरिकी तकनीक के “क्राउन ज्वेल्स” की सुरक्षा मजबूत करने और बौद्धिक संपदा की रक्षा के लिए सरकार और उद्योग के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत बताई। साथ ही टिकटॉक से जुड़े कानूनों को सख्ती से लागू करने की वकालत करते हुए कहा कि इससे चीन की डेटा तक पहुंच सीमित होगी और स्पष्ट संदेश जाएगा।
तकनीकी प्रतिस्पर्धा बनी रणनीतिक चुनौती
सुनवाई में यह भी सामने आया कि अमेरिका और चीन के बीच तकनीकी प्रतिस्पर्धा अब दोनों देशों की रणनीतिक प्रतिद्वंद्विता का सबसे अहम मोर्चा बन चुकी है। AI, सेमीकंडक्टर, क्वांटम कंप्यूटिंग और बायोटेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों को भविष्य की आर्थिक और सैन्य शक्ति का आधार माना जा रहा है।
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