YOGI: उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर धार्मिक मुद्दों को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाथरस में आयोजित एक जनसभा के दौरान समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला। उन्होंने अयोध्या, श्रीकृष्ण जन्मभूमि और धार्मिक विरासत के मुद्दों को उठाते हुए विपक्ष को चुनौती दी। मुख्यमंत्री का यह बयान उस समय आया है जब अखिलेश यादव ने सत्ता में आने पर अयोध्या को अद्वितीय और पवित्र शहर बनाने की बात कही थी।
श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर खुलकर बोलने की चुनौती
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यदि अखिलेश यादव वास्तव में धार्मिक विरासत के संरक्षण के प्रति प्रतिबद्ध हैं, तो उन्हें सार्वजनिक रूप से श्रीकृष्ण जन्मभूमि के विकास और सम्मान की बात करनी चाहिए। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि यदि उनमें साहस है तो वे खुलकर कहें कि “श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन की तर्ज पर श्रीकृष्ण जन्मभूमि को भी उसका सम्मान मिलना चाहिए“। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि विपक्ष इस विषय पर स्पष्ट रुख अपनाने से बचता है।
YOGI: अयोध्या और पूर्व सरकारों पर साधा निशाना
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि अयोध्या आज देश और दुनिया में एक प्रमुख धार्मिक नगरी के रूप में स्थापित हो चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व की समाजवादी पार्टी सरकार ने रामभक्तों के खिलाफ कार्रवाई की थी और अयोध्या में गोली चलवाई थी। उन्होंने कहा कि जिन्होंने पहले धार्मिक आयोजनों और परंपराओं का विरोध किया, वे अब अयोध्या को धार्मिक नगरी बनाने की बात कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि रामलला के दर्शन करने से सकारात्मक सोच विकसित होगी।
विकास परियोजनाओं के साथ राजनीतिक हमला
हाथरस में मुख्यमंत्री ने लगभग पांच सौ अड़तालीस करोड़ रुपये की एक सौ तैंतालीस विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इस अवसर पर उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके पास प्रदेश के विकास का कोई स्पष्ट एजेंडा नहीं है। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि राज्य सरकार विकास और सांस्कृतिक विरासत दोनों को समान महत्व दे रही है। वहीं अखिलेश यादव के हालिया बयान का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जनता अब विकास और धार्मिक आस्था से जुड़े मुद्दों पर दोनों पक्षों के दृष्टिकोण को देख रही है।
YOGI: क्या है श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद?
मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि को भगवान श्रीकृष्ण का जन्मस्थान माना जाता है। इस परिसर को लेकर लंबे समय से कानूनी विवाद चल रहा है। विवाद का केंद्र श्रीकृष्ण जन्मस्थान परिसर और उससे सटी शाही ईदगाह मस्जिद है। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि मस्जिद का निर्माण प्राचीन मंदिर के एक हिस्से पर हुआ था, जबकि मुस्लिम पक्ष इन दावों का विरोध करता है। इस मामले से संबंधित कई याचिकाएं न्यायालय में विचाराधीन हैं और विभिन्न पक्ष अपने-अपने साक्ष्य एवं तर्क प्रस्तुत कर रहे हैं। मामले पर अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के तहत होना बाकी है।
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