Uttar Pradesh: उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने एक बार फिर राज्य में नामकरण को लेकर बड़ा फैसला लिया है। इस बार मुरादाबाद के चर्चित ‘लाइनपार’ इलाके का नाम बदलकर पूर्व कांग्रेस विधायक, स्वतंत्रता सेनानी और राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख नेता रहे दाऊ दयाल खन्ना के नाम पर रखने की घोषणा की गई है। इसके साथ ही गोंडा के राजकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज का नाम भी देश के प्रथम उपप्रधानमंत्री और लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल के नाम पर रखने का फैसला लिया गया है। इन घोषणाओं के बाद एक बार फिर प्रदेश में योगी सरकार द्वारा बदले गए नाम चर्चा का विषय बन गए हैं।
मुरादाबाद के ‘लाइनपार’ को मिलेगी नई पहचान
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मुरादाबाद में 365 करोड़ रुपये से अधिक की 63 विकास परियोजनाओं के शिलान्यास और लोकार्पण कार्यक्रम के दौरान यह घोषणा की। उन्होंने कहा कि दाऊ दयाल खन्ना ने राम मंदिर आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी और उनके योगदान को सम्मान देने के लिए लाइनपार क्षेत्र का नाम उनके नाम पर रखा जाएगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 1983 में गठित श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति में महंत अवैद्यनाथ अध्यक्ष और दाऊ दयाल खन्ना महासचिव थे।
Uttar Pradesh: नाम बदलने के फैसलों की लंबी सूची
साल 2017 में सत्ता संभालने के बाद योगी सरकार ने कई शहरों, रेलवे स्टेशनों, सड़कों, जिलों और संस्थानों के नाम बदले हैं। सबसे चर्चित फैसला इलाहाबाद का नाम बदलकर प्रयागराज करना रहा। इसके बाद फैजाबाद जिले का नाम बदलकर अयोध्या किया गया। मुगलसराय रेलवे स्टेशन का नाम पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन रखा गया, जबकि झांसी रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर वीरांगना लक्ष्मीबाई रेलवे स्टेशन कर दिया गया।इसी तरह आगरा के मुगल म्यूजियम का नाम बदलकर छत्रपति शिवाजी महाराज संग्रहालय रखा गया। कई मेडिकल कॉलेजों, विश्वविद्यालयों, सड़कों और सरकारी संस्थानों के नाम भी स्वतंत्रता सेनानियों, संतों और राष्ट्रनायकों के नाम पर रखे गए हैं। अब मुरादाबाद का लाइनपार इलाका और गोंडा का राजकीय पॉलिटेक्निक भी इसी सूची में शामिल होने जा रहे हैं।
Uttar Pradesh: सरकार ने बताई नाम बदलने की वजह
योगी सरकार का कहना है कि इन फैसलों का उद्देश्य देश के स्वतंत्रता सेनानियों, महापुरुषों, संतों और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने वाले व्यक्तित्वों को सम्मान देना है। सरकार का दावा है कि जिन लोगों ने राष्ट्र और समाज के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया, उनके नाम पर सार्वजनिक स्थलों और संस्थानों का नामकरण नई पीढ़ी को उनके जीवन से प्रेरणा लेने का अवसर देगा।नाम बदलने के फैसलों को लेकर विपक्ष समय-समय पर सरकार पर सवाल उठाता रहा है। विपक्ष का कहना है कि सरकार को नाम बदलने के बजाय विकास और रोजगार जैसे मुद्दों पर अधिक ध्यान देना चाहिए। वहीं भाजपा और सरकार का पक्ष है कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत से जुड़े महापुरुषों को सम्मान देना भी सरकार की जिम्मेदारी है और इसी सोच के तहत ऐसे निर्णय लिए जा रहे हैं।मुरादाबाद के लाइनपार क्षेत्र का नाम दाऊ दयाल खन्ना के नाम पर रखने की घोषणा के बाद उत्तर प्रदेश में नाम बदलने की राजनीति और इतिहास दोनों एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं। आने वाले समय में इस फैसले को लेकर राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है, जबकि सरकार इसे राष्ट्र और समाज के लिए योगदान देने वाले व्यक्तित्वों को सम्मान देने की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम बता रही है।
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