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‘कॉकरोच’ टिप्पणी विवाद पर CJI सूर्यकांत की सफाई, बोले- बातों को गलत तरीके से पेश किया गया

CJI Surya Kant Remark:

CJI Surya Kant Remark: सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने अपनी ‘कॉकरोच’ टिप्पणी को लेकर चल रहे विवाद पर सफाई दी है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर अदालत की कार्यवाही के छोटे-छोटे वीडियो क्लिप बिना पूरे संदर्भ के वायरल किए जा रहे हैं। उनकी टिप्पणियों को संदर्भ से हटाकर गलत तरीके से पेश किया गया और उनका गलत इस्तेमाल किया गया।

CJI Surya Kant Remark: क्या है ‘कॉकरोच’ टिप्पणी विवाद-

15 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट में एक मामले की सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने फर्जी डिग्री रखने वाले कुछ लोगों की तुलना ‘कॉकरोच’ से की थी। उन्होंने कहा था कि ऐसे लोग बाद में सिस्टम पर हमला करने के लिए सोशल मीडिया या RTI एक्टिविस्ट बन जाते हैं। इस टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। युवाओं के एक वर्ग ने इस बयान पर नाराजगी जताई और ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) नाम से एक ऑनलाइन अभियान भी शुरू हो गया।

CJI Surya Kant Remark: CJI सूर्यकांत ने क्या कहा-

एक इंटरव्यू में CJI सूर्यकांत ने कहा कि आजकल सोशल मीडिया पर अदालती कार्यवाही के वीडियो क्लिप बिना पूरे संदर्भ के साझा किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनकी टिप्पणी को गलत तरीके से पेश किया गया और ऐसी बात को उनके नाम से दिखाया गया, जो उन्होंने कही ही नहीं थी। उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि इस तरह की सामग्री का इस्तेमाल देश के युवाओं को गुमराह करने के लिए किया जा रहा है। CJI ने यह भी कहा कि वह उन लोगों के बारे में वैसा सोचने की कल्पना भी नहीं कर सकते, जैसा सोशल मीडिया पर प्रचारित किया गया।

मीडिया और सोशल मीडिया यूजर्स से जिम्मेदारी की अपील-

चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने मीडिया और सोशल मीडिया यूजर्स से न्यायिक कार्यवाही की रिपोर्टिंग और प्रस्तुति जिम्मेदारी के साथ करने की अपील की। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया, प्रिंट मीडिया या किसी अन्य माध्यम पर लोगों को अपने अधिकारों के साथ संवैधानिक कर्तव्यों और जिम्मेदारियों का भी ध्यान रखना चाहिए।

‘अधिकारों के साथ जिम्मेदारियां भी जरूरी’-

CJI ने समाज में सद्भाव बनाए रखने की जिम्मेदारी पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि हर नागरिक को अपने अधिकारों के साथ अपनी जिम्मेदारियों को भी समझना चाहिए और किसी भी बयान या अदालती कार्यवाही को संदर्भ से काटकर पेश करने से बचना चाहिए

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