India-Pakistan: सिंधु जल समझौते को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की ओर से पानी के मुद्दे को ‘रेड लाइन’ बताए जाने और किसी समझौते से इनकार के बाद भारत में राजनीतिक दलों के नेताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। नेताओं ने स्पष्ट किया कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर किसी दबाव में नहीं आएगा।
पाकिस्तान की धमकी पर भारत का सख्त रुख
भारत का रुख है कि सिंधु जल संधि को तब तक सामान्य स्थिति में नहीं लाया जाएगा, जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को पूरी तरह बंद नहीं करता। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा मजबूती से करता है और किसी भी दबाव के आगे नहीं झुकेगा। वहीं बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आर.पी. सिंह ने पाकिस्तान को चेतावनी देते हुए कहा कि उसे भारत की सैन्य क्षमता को नहीं भूलना चाहिए। उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का जिक्र करते हुए कहा कि किसी भी गलत कदम का जवाब दिया जाएगा।
India-Pakistan: कांग्रेस ने भी पाकिस्तान पर साधा निशाना
कांग्रेस सांसद तारिक अनवर ने कहा कि सिंधु जल समझौते को लेकर भारत के रुख के पीछे पाकिस्तान की लगातार आतंकवादी गतिविधियां बड़ी वजह हैं। उन्होंने कहा कि कश्मीर में हुए आतंकी हमलों और निर्दोष लोगों की मौत के बीच पाकिस्तान के साथ सामान्य संबंध बनाए रखना मुश्किल है। उन्होंने कहा कि भारत को अपनी सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए ही आगे की रणनीति तय करनी चाहिए।
संजय सिंह बोले- भारत जवाब देने में सक्षम
आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने भी पाकिस्तान के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय सशस्त्र बलों ने अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया है।संजय सिंह ने कहा कि भारत के पास किसी भी हरकत का मजबूती से जवाब देने की क्षमता है और देश की जनता सरकार तथा सशस्त्र बलों के साथ खड़ी है।
India-Pakistan: सिंधु जल संधि पर जारी है टकराव
सिंधु जल संधि भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से जल बंटवारे का आधार रही है। लेकिन सीमा पार आतंकवाद और दोनों देशों के बीच लगातार बढ़ते तनाव ने इस समझौते को भी राजनीतिक और रणनीतिक विवाद का विषय बना दिया है। पाकिस्तान जहां पानी के मुद्दे को अपनी सुरक्षा और अस्तित्व से जोड़ रहा है, वहीं भारत का कहना है कि आतंकवाद और द्विपक्षीय संबंधों के मौजूदा हालात को देखते हुए राष्ट्रीय हित सर्वोपरि हैं। दोनों देशों के बीच बयानबाजी से आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर तनाव और बढ़ने की संभावना बनी हुई है।
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