UP Election 2027: उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियां धीरे-धीरे तेज होती नजर आ रही हैं। इसी बीच राष्ट्रीय लोक दल (RLD) ने आज मंगलवार को अपनी संसदीय समिति का गठन कर राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है। माना जा रहा है कि पार्टी का यह कदम आगामी विधानसभा चुनाव और संगठन को मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा है। जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, पूर्व सांसद के.सी. त्यागी को संसदीय समिति का अध्यक्ष बनाया गया है। वहीं समिति में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंत चौधरी, पूर्व सांसद, पूर्व मंत्री, विधायक और विभिन्न राज्यों के वरिष्ठ नेताओं को शामिल किया गया है।
के.सी. त्यागी को सौंपी बड़ी जिम्मेदारी
राष्ट्रीय लोक दल ने अपनी नई संसदीय समिति की कमान वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद के.सी. त्यागी को सौंपी है। आपको बता दें कि के.सी. त्यागी लंबे समय से राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय रहे हैं और संगठनात्मक अनुभव रखने वाले नेताओं में गिने जाते हैं। ऐसे में उन्हें अध्यक्ष बनाए जाने को पार्टी की रणनीतिक तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है। पार्टी द्वारा जारी सूची के मुताबिक, समिति में राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंत चौधरी के अलावा मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) बृजमोहन दयाल, तारीफ सिंह, मुंशी राम, अशोक यादव, मलूक नागर, राजकुमार सांगवान, राजपाल बालियान, अब्दुल समीर खान, योगेश चौधरी, सुभाष गर्ग, डॉ. यशपाल बघेल, अनिल दुबे, रमा नागर और बबीता तोमर समेत कई नेताओं को सदस्य बनाया गया है। इसके अलावा किसान नेता युद्धवीर सिंह, विजय पूनिया, सुरेंद्र गंगवा और चंद्रबली यादव को विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में शामिल किया गया है।
UP Election 2027: 2027 चुनाव से पहले संगठन मजबूत करने पर फोकस
वहीं अब राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले RLD अपने संगठन को मजबूत करने और चुनावी रणनीति को धार देने में जुट गई है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पार्टी का पारंपरिक जनाधार रहा है और हाल के वर्षों में पार्टी ने अपने संगठनात्मक ढांचे को विस्तार देने पर लगातार जोर दिया है। संसदीय समिति उम्मीदवारों के चयन, चुनावी रणनीति, संगठनात्मक फैसलों और राजनीतिक दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ऐसे में इस समिति का गठन आगामी चुनावों के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
पश्चिमी यूपी पर खास नजर
गौरतलब है कि राष्ट्रीय लोक दल का प्रभाव खासतौर पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जाट बहुल इलाकों में माना जाता है। ऐसे में माना जा रहा है कि पार्टी 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले किसान, युवा और ग्रामीण मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश करेगी। नई संसदीय समिति इसी दिशा में संगठन को सक्रिय और चुनावी रूप से तैयार करने का प्रयास मानी जा रही है।
ये भी पढ़े… मोहम्मद अली से फिर हिंदू बने आयुष मलिक ने चाँदनी कुरैशी पर क्या कहा?








