Shiv Sena UBT: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) को उस समय बड़ा झटका लगा, जब वरिष्ठ नेता और आदित्य ठाकरे के करीबी माने जाने वाले सचिन अहिर ने आधिकारिक रूप से मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना का दामन थाम लिया। उनके इस फैसले ने राज्य की सियासत में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। पार्टी बदलने के तुरंत बाद सचिन अहिर ने महाराष्ट्र विधान परिषद के उपसभापति पद के लिए भी अपना नामांकन दाखिल कर दिया, जिसे शिंदे गुट अपनी बड़ी राजनीतिक सफलता के रूप में देख रहा है।
आदित्य ठाकरे ने जताई नाराजगी
सचिन अहिर के पार्टी छोड़ने की खबर मिलने के बाद आदित्य ठाकरे ने खुलकर अपनी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि पार्टी ने सचिन अहिर को हर स्तर पर सम्मान और अवसर दिए, इसके बावजूद उनका इस तरह पार्टी छोड़ना निराशाजनक है। आदित्य ठाकरे ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में कुछ सिद्धांत और वैचारिक प्रतिबद्धता भी होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि सचिन अहिर उनके सामने आएं तो वह स्वयं उनसे पूछना चाहेंगे कि आखिर पार्टी ने उन्हें ऐसा क्या नहीं दिया, जिसकी वजह से उन्हें यह निर्णय लेना पड़ा।
Shiv Sena UBT: एकनाथ शिंदे ने किया भव्य स्वागत
दूसरी ओर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने सचिन अहिर का अपनी पार्टी में गर्मजोशी से स्वागत किया। उन्होंने सचिन अहिर की राजनीतिक क्षमता की सराहना करते हुए उन्हें राजनीति का “तेंदुलकर” बताया। शिंदे ने कहा कि सचिन अहिर एक ऐसे जननेता हैं, जो संगठन और जनता के बीच मजबूत पकड़ रखते हैं। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि सचिन अहिर ऐसे खिलाड़ी हैं जो बल्लेबाजी, गेंदबाजी और क्षेत्ररक्षण तीनों में माहिर हैं और उनके आने से पार्टी को नई मजबूती मिलेगी।
रणनीतिक बदलाव के रूप में देखा जा रहा फैसला
महाराष्ट्र सरकार में मंत्री संजय शिरसाठ ने इस घटनाक्रम को “अभियान आपातकाल” की संज्ञा देते हुए कहा कि सचिन अहिर मेहनती और अनुभवी नेता हैं तथा उनका शिंदे गुट में शामिल होना पार्टी के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम विधान परिषद में शिंदे गुट की स्थिति मजबूत करने के साथ-साथ आगामी नगर निगम और विधानसभा चुनावों की रणनीति का भी हिस्सा है।
Shiv Sena UBT: उद्धव गुट के लिए लगातार दूसरा बड़ा झटका
सचिन अहिर का पार्टी छोड़ना उद्धव ठाकरे के लिए हाल के दिनों में दूसरा बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है। इससे पहले शिवसेना (उद्धव गुट) के छह सांसद भी पार्टी छोड़ चुके हैं। वर्ष २०१९ के विधानसभा चुनाव में आदित्य ठाकरे के पहली बार चुनाव मैदान में उतरने के दौरान सचिन अहिर ने वर्ली क्षेत्र में चुनावी रणनीति तैयार करने और संगठन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। ऐसे में उनका शिंदे गुट में जाना केवल एक नेता का दल बदल नहीं, बल्कि महाराष्ट्र की बदलती राजनीतिक तस्वीर का महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। शिंदे गुट के नेताओं का दावा है कि आने वाले समय में उद्धव गुट के और भी कई नेता उनके साथ आ सकते हैं।
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