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कमजोर मानसून से शेयर बाजार और अर्थव्यवस्था पर मंडराया संकट

Super El Nino

Super El Nino: भारतीय शेयर बाजार के सामने एक नई चुनौती उभरती दिखाई दे रही है। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बावजूद बाजार को अपेक्षित मजबूती नहीं मिल सकी है। अब विशेषज्ञों का मानना है कि तेजी से विकसित हो रही सुपर अल नीनो की स्थिति और कमजोर मानसून घरेलू मांग पर गहरा असर डाल सकते हैं। चूंकि भारत की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा उपभोग आधारित है, इसलिए वर्षा में कमी का प्रभाव केवल कृषि तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका असर शेयर बाजार, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और उपभोक्ता क्षेत्रों पर भी पड़ सकता है।

कमजोर मानसून से बढ़ी आर्थिक चिंता

मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष मानसून की शुरुआत पिछले एक दशक में सबसे कमजोर रही है। जून के अंतिम सप्ताह तक देश में औसत वर्षा सामान्य से लगभग 42 प्रतिशत कम दर्ज की गई। देश के अधिकांश हिस्सों में वर्षा की कमी बनी हुई है, जिससे खरीफ फसलों की बुवाई और कृषि उत्पादन प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो ग्रामीण आय और उपभोग क्षमता दोनों पर दबाव बढ़ सकता है।

Super El Nino: घरेलू मांग में गिरावट से बाजार पर असर

विश्लेषकों का मानना है कि अब भारतीय शेयर बाजार के लिए सबसे बड़ा जोखिम कच्चे तेल की कीमत नहीं, बल्कि घरेलू मांग में संभावित कमी है। उपभोक्ता वस्तु क्षेत्र, वाहन उद्योग और ग्रामीण बाजार पर निर्भर कंपनियों की आय प्रभावित हो सकती है। कई ब्रोकरेज संस्थानों ने उपभोक्ता क्षेत्र में अपनी निवेश हिस्सेदारी घटानी शुरू कर दी है। साथ ही ट्रैक्टर और कृषि उपकरणों की मांग में भी सुस्ती आने की आशंका जताई जा रही है।

महंगाई और निवेश पर भी बढ़ सकता है दबाव

कमजोर मानसून के कारण खाद्य महंगाई बढ़ने की संभावना बनी हुई है। यदि कृषि उत्पादन घटता है तो सरकार पर राहत योजनाओं और ग्रामीण रोजगार कार्यक्रमों में अधिक खर्च करने का दबाव बढ़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि चालू खाते का घाटा, रुपये पर दबाव और महंगाई बढ़ने जैसी परिस्थितियों में केंद्रीय बैंक के पास ब्याज दरों में राहत देने की गुंजाइश भी सीमित हो सकती है। इससे आर्थिक वृद्धि की रफ्तार धीमी पड़ने का जोखिम बढ़ जाएगा।

Super El Nino: हालात चुनौतीपूर्ण, लेकिन उम्मीद अभी कायम

हालांकि सभी विशेषज्ञ स्थिति को पूरी तरह संकटपूर्ण नहीं मान रहे हैं। उनका कहना है कि पिछले वर्षों में सिंचाई सुविधाओं के विस्तार, जलाशयों में पर्याप्त जल भंडारण, अनाज के मजबूत भंडार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विविधीकरण से देश पहले की तुलना में बेहतर स्थिति में है। मौसम विभाग का भी अनुमान है कि सुपर अल नीनो का पूर्ण प्रभाव वर्ष के अंतिम महीनों में देखने को मिल सकता है। इसके बावजूद निवेशकों की नजर अब मानसून की प्रगति और वर्षा की स्थिति पर बनी रहेगी, क्योंकि आने वाले महीनों में यही भारतीय अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार की दिशा तय करने वाला सबसे महत्वपूर्ण कारक साबित हो सकता है।

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