Fiscal Deficit India: केंद्र सरकार की वित्तीय स्थिति चालू वित्त वर्ष के शुरुआती दो महीनों में संतुलित नजर आई है। नियंत्रक महालेखा नियंत्रक द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 के अप्रैल और मई के दौरान भारत का राजकोषीय घाटा 1.624 लाख करोड़ रुपये रहा, जो पूरे वर्ष के निर्धारित लक्ष्य का 9.6 प्रतिशत है। यह संकेत देता है कि सरकार अपने वित्तीय अनुशासन को बनाए रखते हुए बजट में तय किए गए राजकोषीय घाटे के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ रही है।
शुरुआती दो महीनों में नियंत्रित रहा राजकोषीय घाटा
सरकार ने पूरे वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 16.96 लाख करोड़ रुपये के राजकोषीय घाटे का लक्ष्य निर्धारित किया है। अप्रैल और मई के आंकड़ों से स्पष्ट है कि सरकार का व्यय और आय दोनों संतुलित दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। वित्त वर्ष के पहले महीने अप्रैल में सरकार की कुल प्राप्तियां 2.13 लाख करोड़ रुपये रहीं, जबकि कुल व्यय 5.75 लाख करोड़ रुपये दर्ज किया गया। इसके परिणामस्वरूप अप्रैल में लगभग 3.62 लाख करोड़ रुपये का राजकोषीय घाटा दर्ज हुआ।
Fiscal Deficit India: मई में दर्ज हुआ दो लाख करोड़ रुपये का अधिशेष
मई महीने में सरकार की वित्तीय स्थिति में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला। इस दौरान लगभग दो लाख करोड़ रुपये का राजकोषीय अधिशेष दर्ज किया गया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के 1.73 लाख करोड़ रुपये के अधिशेष से अधिक है। इसी अवधि में गैर-कर राजस्व बढ़कर 3.27 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया, जबकि एक वर्ष पहले यह 2.90 लाख करोड़ रुपये था। यह वृद्धि भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा केंद्र सरकार को 2.87 लाख करोड़ रुपये के अधिशेष हस्तांतरण की मंजूरी के बाद दर्ज की गई।
पूंजीगत व्यय और कर संग्रह में भी बढ़ोतरी
सरकार ने आधारभूत ढांचे और विकास परियोजनाओं पर खर्च जारी रखा है। अप्रैल और मई के दौरान पूंजीगत व्यय बढ़कर 2.51 लाख करोड़ रुपये हो गया, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 2.21 लाख करोड़ रुपये था। वहीं कुल कर राजस्व भी बढ़कर 5.25 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के 5.15 लाख करोड़ रुपये से अधिक है। इससे स्पष्ट होता है कि राजस्व संग्रह में भी लगातार सुधार हो रहा है।
Fiscal Deficit India: मजबूत वित्तीय स्थिति से अर्थव्यवस्था को मिलेगा सहारा
सरकार ने पिछले वित्त वर्ष में सकल घरेलू उत्पाद के 4.4 प्रतिशत के राजकोषीय घाटे का लक्ष्य हासिल किया था। अब चालू वित्त वर्ष के लिए इसे घटाकर 4.3 प्रतिशत रखने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, राजकोषीय घाटे में कमी से सरकार की उधारी घटती है, जिससे बैंकों के पास उद्योगों और उपभोक्ताओं को ऋण देने के लिए अधिक संसाधन उपलब्ध होते हैं। साथ ही कीमतों में स्थिरता, निवेश में वृद्धि और आर्थिक विकास को भी मजबूती मिलती है। शुरुआती दो महीनों के आंकड़े इस बात का संकेत हैं कि सरकार वित्तीय संतुलन बनाए रखते हुए विकास और निवेश दोनों पर समान रूप से ध्यान दे रही है।
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