Moradabad: कभी-कभी कुछ शब्द इतने गहरे होते हैं कि वे किसी रिपोर्ट, आंकड़े या भाषण से कहीं अधिक असर छोड़ जाते हैं। मुरादाबाद के एक छोटे से बच्चे के मुंह से निकले ये शब्द “मेरे पापा नहीं हैं…लेकिन मुझे पढ़ना है“ यह सिर्फ एक वाक्य नहीं, बल्कि उस दर्द की आवाज़ हैं, जिसे सुनकर हर एक इंसान की आंखें नम हो जाएं। जब खबर इंडिया की टीम मुरादाबाद में “अनमोल” के पास पहुंची तो बच्चे से जब पूछा कि “स्कूल क्यों नहीं जाते” तब बच्चे ने मासूमियत से जवाब दिया, एडमिशन नहीं हुआ। जब बच्चे से बोला गया “पापा को साथ लेकर जाओ, स्कूल में नाम लिखवा लो” तब इसके बाद जो जवाब आया, उसने हर सुनने वाले को झकझोर दिया।
मेरे पापा नहीं हैं, मुझे पढ़ना है
तो वो जवाब था “मेरे पापा नहीं हैं… लेकिन मुझे पढ़ना है” सोचिए, एक ऐसा बच्चा जिसने शायद बचपन में ही पिता का साया खो दिया, जिसके पास संसाधन नहीं हैं, लेकिन जिसके सपने आज भी जिंदा हैं। उसे किसी महंगे खिलौनों की चाह नहीं, बल्कि उसे सिर्फ स्कूल जाना है, पढ़ना है और जिंदगी में आगे बढ़ना है। शिक्षा हर बच्चे का संवैधानिक अधिकार है। लेकिन जब किसी बच्चे को सिर्फ इसलिए स्कूल से दूर रहना पड़े क्योंकि उसके साथ पिता नहीं हैं या परिवार आर्थिक रूप से कमजोर है, तब यह केवल उस परिवार की नहीं, पूरे समाज की विफलता बन जाती है।
“मेरे पापा नहीं हैं… लेकिन मुझे पढ़ना है…”
मुरादाबाद के एक मासूम से पत्रकार ने पूछा, “स्कूल क्यों नहीं जाते?”
बच्चे ने कहा, “एडमिशन नहीं है।”
पत्रकार ने कहा, “पापा को साथ लेकर जाओ, स्कूल में नाम लिखवा लो।”
मासूम की अगली बात सुनकर शब्द भी ख़ामोश हो गए…
“मेरे पापा नहीं… pic.twitter.com/yMmNE3vLaM
— Khabar India ख़बर इंडिया (@_KhabarIndia) June 30, 2026
Moradabad: जब अनमोल ने बताया घर का पता
अनमोल से बातचीत के दौरान जब उनके परिवार का नाम पूछा गया तो उन्होंने पिता का नाम राजू (जिनका स्वर्गवास हो चुका है) तथा माता का नाम काजल बताया और उन्होंने कहा कि घर में सिर्फ माँ है पिता चले गए, इन बातचीतों के दौरान बच्चे की परेशानी उसके चेहरे से साफ दिखाई डे रही थी। जब अनमोल से उसके घर का पता मुरादाबाद शहर के फाजलपुर में शिवमंदिर के पास बताया गया।
मुरादाबाद के डीएम राजेंद्र पेंसिया को खबर इंडिया की अपील
राजेंद्र पेंसिया जिलाधिकारी, आपसे विनम्र अपील है कि मुरादाबाद के उस मासूम बच्चे की हरसंभव मदद की जाए, जिसने नम आंखों से सिर्फ इतना कहा, “मेरे पापा नहीं हैं… लेकिन मुझे पढ़ना है।” क्योंकि यह बच्चा शिक्षा के अपने अधिकार का हकदार है। आपसे अनुरोध है कि संबंधित अधिकारियों को निर्देश देकर उसके विद्यालय में शीघ्र प्रवेश, आवश्यक दस्तावेजों की व्यवस्था, शैक्षणिक सामग्री तथा शासन की पात्र योजनाओं का लाभ सुनिश्चित कराया जाए। आपका एक संवेदनशील निर्णय इस बच्चे के जीवन की दिशा बदल सकता है और उसके अधूरे सपनों को नई उड़ान दे सकता है। हमें विश्वास है कि आपके प्रयास से यह मासूम जल्द ही स्कूल की कक्षा में बैठकर अपने उज्ज्वल भविष्य की शुरुआत करेगा।
ये भी पढ़ें…नाबालिग अपराधियों की उम्र सीमा 16 वर्ष करने का प्रस्ताव भेजेगी महाराष्ट्र सरकार








