Prashant Kishor: बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाला उपचुनाव अब सिर्फ एक सीट का चुनाव नहीं रह गया है, बल्कि यह प्रदेश की राजनीति का सबसे चर्चित मुकाबला बन गया है। जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर के चुनाव मैदान में उतरने से मुकाबला और दिलचस्प हो गया है। यह सीट भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के राज्यसभा सदस्य बनने के बाद रिक्त हुई है। ऐसे में इस चुनाव को भाजपा की प्रतिष्ठा और जन सुराज की राजनीतिक परीक्षा दोनों के रूप में देखा जा रहा है।
प्रशांत किशोर ने स्वीकार की चुनावी चुनौती
जन सुराज पार्टी ने बांकीपुर उपचुनाव के लिए प्रशांत किशोर को अपना उम्मीदवार घोषित किया है। उम्मीदवार बनने के बाद उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों का आभार जताते हुए कहा कि उनका जीवन बिहार और जन सुराज के लिए समर्पित है। वर्ष 2025 के विधानसभा चुनाव में स्वयं चुनाव नहीं लड़ने वाले प्रशांत किशोर अब पहली बार सीधे चुनावी मैदान में उतरे हैं। माना जा रहा है कि पिछली हार के बाद उन्होंने जनता के बीच अपनी राजनीतिक स्वीकार्यता साबित करने के लिए यह फैसला लिया है।
Prashant Kishor: भाजपा के गढ़ में आसान नहीं होगी राह
बांकीपुर विधानसभा सीट वर्ष 1995 से भाजपा का मजबूत गढ़ रही है। वर्ष 2025 के चुनाव में भाजपा उम्मीदवार नितिन नवीन ने लगभग 98 हजार मत हासिल कर बड़ी जीत दर्ज की थी, जबकि जन सुराज उम्मीदवार को सात हजार से अधिक मत मिले थे। इस सीट पर कायस्थ, वैश्य, ब्राह्मण, भूमिहार, राजपूत और अन्य सवर्ण समुदाय के मतदाताओं का प्रभाव माना जाता है। ऐसे में भाजपा के मजबूत जनाधार को चुनौती देना प्रशांत किशोर के लिए आसान नहीं होगा।
कोर मतदाताओं और स्थानीय मुद्दों पर नजर
प्रशांत किशोर की रणनीति भाजपा के पारंपरिक मतदाताओं में संभावित नाराजगी को अपने पक्ष में करने की मानी जा रही है। इसके साथ ही वे क्षेत्र में पेयजल संकट, जाम, बदहाल सड़कें और नालों जैसी स्थानीय समस्याओं को भी प्रमुख चुनावी मुद्दा बना रहे हैं। जन सुराज को उम्मीद है कि स्थानीय असंतोष और विकास के सवाल चुनावी समीकरण बदल सकते हैं।
Prashant Kishor: सम्राट चौधरी और भाजपा के लिए भी बड़ी परीक्षा
यह उपचुनाव भाजपा के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मुख्यमंत्री बनने के बाद सम्राट चौधरी के नेतृत्व में यह पहला बड़ा चुनाव है। यदि भाजपा इस सीट को बरकरार रखती है तो यह संगठन और नेतृत्व दोनों के लिए बड़ी सफलता होगी। वहीं, विपक्ष इसे भाजपा के प्रभाव की परीक्षा मान रहा है। ऐसे में बांकीपुर का परिणाम आने वाले विधानसभा चुनावों की राजनीतिक दिशा तय करने वाला संकेत भी माना जा रहा है।
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