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जन्मदिन विशेष: जब मतपत्र पर नाम होने के बावजूद राजनाथ सिंह को नहीं मिला एक भी वोट

Rajnath Singh

Rajnath Singh: देश के रक्षा मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता राजनाथ सिंह का राजनीतिक जीवन कई दिलचस्प घटनाओं से भरा रहा है। 10 जुलाई 1951 को जन्मे राजनाथ सिंह 13 वर्ष की आयु में ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़ गए थे। आपातकाल के दौरान जेल जाने से लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और देश के रक्षा मंत्री बनने तक उनका सफर संघर्ष और अनुशासन का उदाहरण माना जाता है। उनके राजनीतिक जीवन का एक ऐसा प्रसंग भी है, जब लोकसभा चुनाव में मतपत्र पर नाम होने के बावजूद उन्हें एक भी वोट नहीं मिला था।

13 साल की उम्र में आरएसएस से जुड़ाव, आपातकाल में गए जेल

राजनाथ सिंह छात्र जीवन में ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ गए थे। वर्ष 1975 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा लगाए गए आपातकाल के दौरान उन्हें भी जेल भेजा गया। जेल में रहने के दौरान उन्हें अपनी मां के निधन की खबर मिली, लेकिन वह अंतिम दर्शन भी नहीं कर सके। यह दौर उनके जीवन का सबसे कठिन समय माना जाता है, जिसने उनके राजनीतिक और वैचारिक जीवन को और मजबूत बनाया।

Rajnath Singh: पहली बार मिला लोकसभा चुनाव लड़ने का मौका

आपातकाल समाप्त होने के बाद वर्ष 1977 में राजनाथ सिंह को पहली बार मिर्जापुर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने का अवसर मिला। उन्होंने प्रचार भी शुरू कर दिया था, लेकिन मतदान से पहले जनसंघ, भारतीय लोक दल और सोशलिस्ट पार्टी के बीच हुए गठबंधन के तहत यह सीट लोक दल के खाते में चली गई। इसके बाद लोक दल ने फकीर अली अंसारी को उम्मीदवार घोषित किया। राजनाथ सिंह ने पार्टी के फैसले का सम्मान करते हुए अपना नाम वापस लेने का निर्णय लिया, लेकिन नामांकन वापस लेने की समय सीमा समाप्त हो चुकी थी। इस कारण उनका नाम मतपत्र पर बना रहा।

समर्थकों से कहा- एक भी वोट मिला तो अपमान होगा

मतपत्र पर नाम बने रहने के बाद कई समर्थकों ने उन्हें निर्दलीय चुनाव लड़ने की सलाह दी, लेकिन उन्होंने गठबंधन धर्म निभाने का फैसला किया। जिला कलेक्टर कार्यालय से बाहर निकलकर उन्होंने अपने समर्थकों से कहा कि यदि उन्हें एक भी वोट मिला तो वह इसे अपना अपमान मानेंगे। समर्थकों ने उनकी अपील का पूरा सम्मान किया। जब मतगणना हुई तो राजनाथ सिंह को एक भी वोट नहीं मिला। भारतीय राजनीति में यह घटना आज भी अनुशासन, संगठन के प्रति निष्ठा और कार्यकर्ताओं की प्रतिबद्धता का एक अनोखा उदाहरण मानी जाती है।

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