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दतिया में कांग्रेस ने घनश्याम सिंह पर जताया भरोसा, बीजेपी के आशुतोष तिवारी से होगा मुकाबला

Datia Election: दतिया में कांग्रेस का घनश्याम सिंह को टिकट

Datia Election: मध्य प्रदेश की बहुचर्चित दतिया विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस ने अपने प्रत्याशी के नाम का ऐलान कर दिया है। पार्टी ने अनुभवी नेता और पूर्व विधायक घनश्याम सिंह को चुनावी मैदान में उतारा है। अब उनका सीधा मुकाबला भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार आशुतोष तिवारी से होगा। टिकट की घोषणा के बाद घनश्याम सिंह के निवास पर समर्थकों का जमावड़ा लग गया। ढोल-नगाड़ों और आतिशबाजी के साथ कार्यकर्ताओं ने खुशी जताई। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस चुनाव में अनुभव और नए नेतृत्व के बीच दिलचस्प मुकाबला देखने को मिलेगा।

राजघराने से जुड़ाव, तीन दशक का राजनीतिक अनुभव

72 वर्षीय घनश्याम सिंह दतिया राजघराने से जुड़े प्रमुख राजनीतिक चेहरों में गिने जाते हैं। जिले की राजनीति में उनका लंबे समय से प्रभाव रहा है। उनके पिता महाराज कृष्ण सिंह जूदेव वर्ष 1984 में भिंड-दतिया लोकसभा क्षेत्र से कांग्रेस सांसद रहे थे।

घनश्याम सिंह ने वर्ष 1993 में कांग्रेस के टिकट पर पहली बार दतिया विधानसभा चुनाव जीतकर भाजपा के शंभु तिवारी को हराया था। वर्ष 1998 में कांग्रेस ने उन्हें टिकट नहीं दिया, लेकिन 2003 में पार्टी ने फिर उन पर भरोसा जताया और उन्होंने राजेंद्र भारती को हराकर दूसरी बार दतिया से जीत दर्ज की। हालांकि 2008 के विधानसभा चुनाव में उन्हें भाजपा के डॉ. नरोत्तम मिश्रा से हार का सामना करना पड़ा।

Datia Election: सेवढ़ा से भी जीता चुनाव, हार-जीत का लंबा सफर

दतिया के बाद कांग्रेस ने वर्ष 2013 में घनश्याम सिंह को सेवढ़ा विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया, लेकिन वे भाजपा के प्रदीप अग्रवाल से करीब 1,800 मतों से चुनाव हार गए। इसके बाद 2018 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने शानदार वापसी करते हुए भाजपा के राधेलाल बघेल को हराकर विधायक बनने में सफलता हासिल की। हालांकि 2023 के विधानसभा चुनाव में एक बार फिर सेवढ़ा सीट से भाजपा उम्मीदवार प्रदीप अग्रवाल ने उन्हें पराजित कर दिया। इस तरह घनश्याम सिंह का राजनीतिक सफर कई उतार-चढ़ावों से भरा रहा है।

दतिया में होगा अनुभव बनाम युवा नेतृत्व का मुकाबला

दतिया उपचुनाव में कांग्रेस ने अनुभवी नेता घनश्याम सिंह पर दांव लगाया है, जबकि भाजपा पहले ही आशुतोष तिवारी को अपना उम्मीदवार घोषित कर चुकी है। ऐसे में चुनाव अब अनुभव और युवा नेतृत्व के बीच सीधी टक्कर के रूप में देखा जा रहा है।

दोनों प्रमुख दलों ने चुनावी तैयारियां तेज कर दी हैं और आने वाले दिनों में प्रचार अभियान और अधिक आक्रामक होने की संभावना है। दतिया की यह सीट दोनों दलों के लिए प्रतिष्ठा का विषय बन चुकी है, इसलिए उपचुनाव में कड़ा और रोमांचक मुकाबला देखने की पूरी उम्मीद है।