Stock Marke: भारतीय शेयर बाजार मंगलवार को भारी गिरावट के साथ बंद हुआ। मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल, बढ़ती महंगाई, रुपये की कमजोरी और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं ने निवेशकों का भरोसा कमजोर कर दिया। लगातार तीन कारोबारी सत्रों की तेजी के बाद बाजार में जोरदार बिकवाली देखने को मिली। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स 561 अंक टूटकर 77,054 पर बंद हुआ, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 158 अंक की गिरावट के साथ 24,052 पर पहुंच गया। रियल एस्टेट, सरकारी बैंक, ऑटो, आईटी और वित्तीय शेयरों में सबसे अधिक कमजोरी दर्ज की गई।
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से बढ़ी चिंता
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर देखने को मिला। ब्रेंट क्रूड करीब 4.84 फीसदी की तेजी के साथ 87.28 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। भारत अपनी जरूरत का लगभग 85 से 90 फीसदी कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से आयात बिल और महंगाई दोनों पर दबाव बढ़ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ब्रेंट क्रूड लंबे समय तक 84-85 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना रहता है, तो रुपये और भुगतान संतुलन पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता है।
Stock Marke: महंगाई और व्यापार घाटे ने बढ़ाई बाजार की बेचैनी
जून में भारत की खुदरा महंगाई बढ़कर 4.38 फीसदी पर पहुंच गई, जो जनवरी 2025 के बाद पहली बार भारतीय रिजर्व बैंक के 4 फीसदी के लक्ष्य से ऊपर रही। पेट्रोल-डीजल और खाद्य वस्तुओं की बढ़ती कीमतें इसकी प्रमुख वजह हैं। वहीं, जून में देश का व्यापार घाटा बढ़कर 30.43 अरब डॉलर हो गया, जो पिछले पांच महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है। बढ़ती आयात लागत और ऊंची कमोडिटी कीमतों ने निवेशकों की चिंता और बढ़ा दी है।
रुपये की कमजोरी और विदेशी निवेश पर असर
अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया शुरुआती कारोबार में 42 पैसे टूटकर 96.10 के स्तर पर पहुंच गया। रुपये की कमजोरी विदेशी निवेशकों के लिए चिंता का विषय मानी जाती है, क्योंकि इससे विदेशी पूंजी निकासी का जोखिम बढ़ जाता है। इसके अलावा अमेरिकी 10 वर्षीय बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी भी विदेशी निवेश प्रवाह पर दबाव बना सकती है, जिसका असर भारतीय शेयर बाजार पर दिखाई दे रहा है।
Stock Marke: तिमाही नतीजों पर रहेगी बाजार की नजर
अब निवेशकों की नजर अप्रैल-जून तिमाही के कॉरपोरेट नतीजों पर टिकी है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, केवल मुनाफे के आंकड़े ही नहीं बल्कि कंपनियों द्वारा भविष्य के कारोबार को लेकर दिए जाने वाले संकेत भी बाजार की दिशा तय करेंगे। माना जा रहा है कि मध्य पूर्व संकट और महंगे कच्चे तेल के कारण कई कंपनियों की कमाई प्रभावित हो सकती है। कुछ जानकारों का अनुमान है कि कॉरपोरेट आय में मजबूत सुधार वित्त वर्ष 2027 की तीसरी तिमाही से पहले देखने को नहीं मिलेगा, इसलिए आने वाले दिनों में बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।








