Home » उत्तर प्रदेश » राम मंदिर ट्रस्ट के CEO पद के लिए उमड़े दावेदार, 24 घंटे में 1000+ आवेदन; क्या पहली बार किसी महिला को मिलेगी कमान?

राम मंदिर ट्रस्ट के CEO पद के लिए उमड़े दावेदार, 24 घंटे में 1000+ आवेदन; क्या पहली बार किसी महिला को मिलेगी कमान?

राम मंदिर ट्रस्ट के CEO पद के लिए उमड़े दावेदार, 24 घंटे में 1000+ आवेदन; क्या पहली बार किसी महिला को मिलेगी कमान?

Ayodhya News: श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा पहली बार मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के पद के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू किए जाने के बाद देशभर से जबरदस्त प्रतिक्रिया देखने को मिली है। आवेदन प्रक्रिया शुरू होने के महज 24 घंटे के भीतर ही 1000 से अधिक आवेदन ट्रस्ट को प्राप्त हो चुके हैं। इनमें से बड़ी संख्या सेवानिवृत्त आईएएस, आईपीएस और अन्य वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की बताई जा रही है। आवेदन करने की अंतिम तिथि 18 जुलाई निर्धारित की गई है और माना जा रहा है कि अंतिम समय तक यह संख्या कई हजार तक पहुंच सकती है।

CEO चयन के लिए बनाई गई तीन सदस्यीय सर्च कमेटी

नए CEO के चयन की जिम्मेदारी तीन सदस्यीय सर्च कमेटी को सौंपी गई है। इस समिति में सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस प्रमोद कोहली, लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) विष्णुकांत चतुर्वेदी और वरिष्ठ वैज्ञानिक सुरेश हावड़े शामिल हैं। आवेदन प्रक्रिया शुरू होने के बाद अपेक्षा से कहीं अधिक आवेदन मिलने के कारण समिति के सामने सभी आवेदनों की निष्पक्ष जांच और योग्य उम्मीदवारों का चयन बड़ी चुनौती बन गया है। इसी वजह से आवेदनों की छंटनी और पात्रता की जांच के लिए एक सचिव नियुक्त करने की तैयारी भी की जा रही है।

Ayodhya News: 19 जुलाई को होगी अहम बैठक, आगे तय होगी चयन प्रक्रिया

18 जुलाई को आवेदन प्रक्रिया समाप्त होने के बाद 19 जुलाई को सर्च कमेटी की महत्वपूर्ण बैठक प्रस्तावित है। इस बैठक में प्राप्त आवेदनों की समीक्षा, इंटरव्यू की प्रक्रिया और आगे की रणनीति पर चर्चा की जाएगी। शुरुआती छंटनी के बाद योग्य उम्मीदवारों को व्यक्तिगत साक्षात्कार के लिए बुलाया जाएगा, जबकि जरूरत पड़ने पर ऑनलाइन इंटरव्यू का विकल्प भी अपनाया जा सकता है। माना जा रहा है कि 22 जुलाई को होने वाली ट्रस्ट की बैठक में समिति अपनी प्रगति रिपोर्ट भी पेश कर सकती है।

क्या राम मंदिर ट्रस्ट को मिलेगी पहली महिला CEO?

CEO पद को लेकर अब एक नई चर्चा भी तेज हो गई है कि क्या इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के लिए किसी महिला अधिकारी का चयन किया जाएगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की मौजूदा संरचना में महिला प्रतिनिधित्व नहीं है। ऐसे में यदि किसी महिला अधिकारी को पहली CEO बनाया जाता है तो यह केवल एक प्रशासनिक नियुक्ति नहीं होगी, बल्कि समावेशिता और महिला नेतृत्व को बढ़ावा देने वाला महत्वपूर्ण संदेश भी माना जाएगा। हालांकि ट्रस्ट की ओर से स्पष्ट किया गया है कि अंतिम चयन केवल योग्यता, प्रशासनिक अनुभव और मंदिर की व्यवस्थाओं को प्रभावी ढंग से संभालने की क्षमता के आधार पर ही किया जाएगा।इस प्रतिष्ठित पद के लिए आवेदन करने वालों में उत्तर प्रदेश कैडर के 1992 बैच के पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर का नाम भी शामिल है। उन्होंने स्वयं CEO पद के लिए आवेदन करने की पुष्टि की है। उनके अलावा देशभर के कई अनुभवी प्रशासनिक अधिकारियों और सेवानिवृत्त अधिकारियों ने भी अपनी दावेदारी पेश की है। इससे यह पद और अधिक चर्चा का विषय बन गया है।

CEO पद के लिए तय की गईं सख्त योग्यताएं

ट्रस्ट ने CEO पद के लिए स्पष्ट पात्रता शर्तें निर्धारित की हैं। उम्मीदवार की आयु 50 से 70 वर्ष के बीच होनी चाहिए और उसके पास कम से कम 20 वर्षों का प्रशासनिक अनुभव होना अनिवार्य है। चयनित अधिकारी को अयोध्या में स्थायी रूप से निवास करना होगा। इसके अलावा उम्मीदवार का आस्थावान हिंदू होना तथा हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं का अच्छा ज्ञान होना भी आवश्यक शर्तों में शामिल है।

चढ़ावा चोरी की घटना के बाद महसूस हुई जरूरत

राम मंदिर में चढ़ावा चोरी की घटना के बाद ट्रस्ट ने मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने का फैसला किया। प्रतिदिन लाखों श्रद्धालुओं के आगमन, बढ़ते दान, सुरक्षा व्यवस्था, वित्तीय पारदर्शिता और भविष्य की परियोजनाओं के प्रभावी संचालन के लिए एक अनुभवी प्रशासनिक अधिकारी की आवश्यकता महसूस की गई। इसी उद्देश्य से पहली बार CEO का पद सृजित किया गया है ताकि मंदिर से जुड़े सभी कार्यों की निगरानी एक पेशेवर और केंद्रीकृत व्यवस्था के तहत हो सके।

नए CEO के कंधों पर होगी बड़ी जिम्मेदारी

राम मंदिर के नए CEO की भूमिका केवल प्रशासनिक अधिकारी तक सीमित नहीं होगी, बल्कि उन्हें पूरे मंदिर परिसर के संचालन की जिम्मेदारी संभालनी होगी। भविष्य में मंदिर की सभी परियोजनाएं पूरी होने के बाद श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ने की संभावना है। ऐसे में दर्शन व्यवस्था को सुचारु रखना, श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना, सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाए रखना और विभिन्न सरकारी विभागों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करना उनकी प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल होगा।राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र के अनुसार, नए CEO को ट्रस्ट के प्रशासनिक कार्यों को व्यवस्थित करने, वित्तीय पारदर्शिता बनाए रखने और श्रद्धालुओं की आस्था के अनुरूप मंदिर की व्यवस्थाओं को प्रभावी ढंग से संचालित करने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभानी होगी। ऐसे में इस पद पर नियुक्त होने वाला अधिकारी आने वाले वर्षों में राम मंदिर के सुचारु और पारदर्शी संचालन में अहम भूमिका निभाएगा।