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सपा सांसदों का केंद्र पर तीखा वार! बोले- NTA को तुरंत परीक्षा प्रक्रिया से हटाओ, धर्मेंद्र प्रधान दें इस्तीफा

UP POLITICS: संसद के मानसून सत्र के दौरान NEET-UG विवाद और छात्र आंदोलनों को लेकर समाजवादी पार्टी ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। सपा सांसदों ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) को परीक्षा प्रक्रिया से हटाने और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराई है।

डिंपल यादव बोलीं- छात्रों की आवाज दबा रही सरकार

सपा सांसद डिंपल यादव ने कहा कि सरकार छात्रों की समस्याओं का समाधान करने के बजाय आंदोलन को खत्म करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि देशभर से परीक्षा प्रणाली को लेकर लगातार शिकायतें आ रही हैं, इसलिए सबसे पहले NTA को परीक्षा प्रक्रिया से बाहर किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि इतने बड़े छात्र आंदोलन के बाद शिक्षा मंत्री को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दे देना चाहिए था। डिंपल ने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस ने बल प्रयोग किया, जिसकी जिम्मेदारी केंद्र सरकार की है।

UP POLITICS: ‘धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक नहीं चलेगा सदन’

सपा सांसद राम गोपाल यादव ने कहा कि विपक्ष की बात नहीं सुने जाने के कारण संसद की कार्यवाही बार-बार बाधित हो रही है। उनका कहना था कि जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते, तब तक सदन का सुचारू संचालन संभव नहीं होगा।

सोनम वांगचुक के अनशन पर भी दी प्रतिक्रिया

सोनम वांगचुक द्वारा भूख हड़ताल समाप्त करने पर राम गोपाल यादव ने कहा कि समाजवादी पार्टी और डॉ. राम मनोहर लोहिया अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल के पक्षधर नहीं रहे हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी लोकतांत्रिक और व्यावहारिक संघर्ष के तरीकों में विश्वास करती है।

UP POLITICS: फास्ट ट्रैक कोर्ट पर भी उठाए सवाल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पेपर लीक मामलों में फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने के ऐलान पर राम गोपाल यादव ने सवाल उठाते हुए कहा कि केवल नया कानून बनाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। उन्होंने दावा किया कि मामले की जांच और कार्रवाई को लेकर कई सवाल अब भी बने हुए हैं।

इकरा हसन ने भी दोहराई मांग

सपा सांसद इकरा हसन ने कहा कि सरकार को सबसे पहले छात्रों की समस्याओं का समाधान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि पार्टी शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर कायम है। साथ ही उन्होंने कहा कि केवल फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने से पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना होगा कि मामलों का त्वरित और प्रभावी निपटारा हो।

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