us-iran conflict: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ईरान को लगातार धमकी पर धमकी दिये जा रहे हैं उन्होंने कहा है कि अमेरिका ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई के लिए पूरी तरह तैयार है, लेकिन यदि तेहरान अपने परमाणु कार्यक्रम को छोड़ने पर सहमत होता है तो कूटनीतिक समाधान उनकी पहली पसंद रहेगा। खास बात है कि ईस बीच ट्रंप ने ईरान के साथ ही रूस और चीन को भी चेतावनी दी है।
दखल दिया तो गंभीर नतीजे होंगे
इस बीच ट्रंप ने कहा कि हालांकि चीन या रूस ईरान युद्ध में शामिल नहीं हैं, लेकिन यदि इन दोनों देशों ने इस युद्ध में दखल दिया तो इसके गंभीर नतीजे होंगे और यह उनके लिए अच्छा नहीं होगा। हालांकि ट्रम्प ने यह भी कहा कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने उन्हें भरोसा दिया था कि वे ईरान को हथियार नहीं देंगे। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी उनसे कहा था कि वे ईरान को हथियार नहीं बेचेंगे।
us-iran conflict: सैन्य अभियान तेज किया जाएगा
व्हाइट हाउस में असैन्य परमाणु ऊर्जा से जुड़े एक कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि अमेरिका जरूरत पड़ने पर सैन्य अभियान और तेज करने की स्थिति में है, लेकिन उन्हें उम्मीद है कि ईरान अब समझौते को लेकर पहले से अधिक गंभीर हो रहा है।
ईरान पर व्यापक सैन्य हमले की संभावना से जुड़े सवाल पर अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, “हम अभी उनसे बातचीत कर रहे हैं। हम पूरी तरह तैयार हैं और कार्रवाई के लिए तैयार बैठे हैं, लेकिन बातचीत भी जारी है। देखते हैं इससे क्या नतीजा निकलता है।”
us-iran conflict: समझौते में समझदारी
ट्रंप ने कहा कि इस समय दो रास्ते मौजूद हैं। उन्होंने कहा, “एक सैन्य रास्ता है, जिसमें हम मौजूदा अभियान को इसी तरह जारी रखें और चाहें तो इसे और भी ज्यादा तेज कर सकते हैं। दूसरा ज्यादा समझदारी वाला रास्ता यह है कि समझौता किया जाए। वे भी समझौता करना चाहते हैं, लेकिन मुझे नहीं लगता कि वे अभी पूरी तरह तैयार हैं।”
us-iran conflict: समझौता ही विकल्प
अमेरिकी राष्ट्रपति का कहना था कि अमेरिका के दबाव अभियान ने क्षेत्र में रणनीतिक संतुलन पूरी तरह बदल दिया है। अब उनके पास समझौता करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।
us-iran conflict: ईरान की सैन्य क्षमता खत्म
ट्रंप ने यह भी दावा किया कि ईरान की पारंपरिक सैन्य क्षमता लगभग पूरी तरह खत्म हो चुकी है। राष्ट्रपति ने कहा, “उनके पास अब न नौसेना बची है, न वायुसेना, न एयर डिफेंस, न रडार और न ही कोई प्रभावी सैन्य क्षमता।”
ट्रंप ने कहा कि सैन्य विकल्प मौजूद होने की बार-बार चेतावनी के बावजूद बातचीत उनका पसंदीदा रास्ता बना हुआ है। डिप्लोमेसी का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, “मैं हमेशा यही ऑप्शन पसंद करता हूं।”
us-iran conflict: अमेरिका का मुख्य मकसद
अमेरिकी सरकार का कहना है कि ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा का एक मुख्य मकसद बना हुआ है। वाशिंगटन ने एक के बाद एक सरकार में आर्थिक दबाव, सैन्य रोकथाम और डिप्लोमैटिक एंगेजमेंट के बीच बारी-बारी से काम किया है, जबकि ईरान ने लगातार कहा है कि उसका न्यूक्लियर प्रोग्राम शांतिपूर्ण मकसद के लिए है, भले ही अमेरिका और कई पश्चिम साथियों ने लंबे समय से इस बारे में चिंता जताई हो।








