Paper Leak: NEET-UG 2026 पेपर लीक विवाद और छात्रों के देशव्यापी विरोध के बाद केंद्र सरकार परीक्षा में होने वाली धांधली पर शिकंजा कसने की तैयारी में है। सरकार 27 जुलाई को लोकसभा में पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) संशोधन विधेयक, 2026 पेश करेगी। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह इस विधेयक को सदन में पेश करेंगे। प्रस्तावित कानून में पेपर लीक की जांच और सुनवाई के लिए तय समय सीमा के साथ दोषियों के लिए कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है।
पेपर लीक पर 10 साल तक की सजा
प्रस्तावित संशोधन के तहत पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी से जुड़े मामलों में दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। पेपर लीक के मामलों की जांच दो महीने के भीतर पूरी करने का प्रावधान प्रस्तावित है। दोषी पाए जाने पर कम से कम पांच साल और अधिकतम 10 साल तक की जेल हो सकती है। इसके अलावा 50 लाख रुपये तक का जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
Paper Leak: संगठित गिरोहों पर 10 करोड़ तक जुर्माना
परीक्षा में संगठित तरीके से धोखाधड़ी करने वाले गिरोहों के खिलाफ कानून को और कड़ा किया जाएगा। ऐसे मामलों में कम से कम सात साल की सजा का प्रावधान रखा गया है। इसके साथ ही दोषियों पर अधिकतम 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा। सरकार का मानना है कि इससे पेपर लीक के संगठित नेटवर्क पर प्रभावी रोक लगाने में मदद मिलेगी।
फास्ट ट्रैक कोर्ट में तीन महीने में सुनवाई
संशोधन विधेयक में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को परीक्षा से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए विशेष फास्ट ट्रैक अदालतें नामित करने का प्रस्ताव है। आरोपपत्र दाखिल होने के बाद तीन महीने के भीतर मुकदमे का निपटारा करने का लक्ष्य रखा गया है। इन मामलों की सुनवाई रोजाना आधार पर किए जाने का भी प्रावधान प्रस्तावित है।
Paper Leak: केंद्र बना सकेगी स्पेशल टास्क फोर्स
बड़े और कई राज्यों से जुड़े पेपर लीक मामलों की जांच के लिए केंद्र सरकार स्पेशल टास्क फोर्स गठित कर सकेगी। यह कदम NEET-UG 2026 विवाद के बाद परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। छात्र संगठनों के आंदोलन और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सरकार की ओर से परीक्षा सुधारों पर जोर दिया जा रहा है।








