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युवाओं पर पैलेट गन का इस्तेमाल पड़ा भारी तो क्या होगी सजा? जानिए पुलिस और सुरक्षा बलों के खिलाफ क्या कहता है कानून

युवाओं पर पैलेट गन का इस्तेमाल पड़ा भारी तो क्या होगी सजा? जानिए पुलिस और सुरक्षा बलों के खिलाफ क्या कहता है कानून

Pellet Gun: दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक मामले को लेकर हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन के कथित इस्तेमाल का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि 20 जुलाई को आयोजित विरोध मार्च के दौरान तैनात रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के एक जवान ने कथित तौर पर पैलेट गन से कई राउंड फायर किए, जिससे कई प्रदर्शनकारियों को छर्रे लगे। घटना सामने आने के बाद सुरक्षा बलों के बल प्रयोग और उसके कानूनी दायरे को लेकर बहस तेज हो गई है।

SOP का उल्लंघन साबित होने पर हो सकती है विभागीय कार्रवाई

किसी भी सुरक्षा बल के जवान को भीड़ नियंत्रण के दौरान निर्धारित नियमों और स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) का पालन करना अनिवार्य होता है। यदि जांच में यह साबित होता है कि पैलेट गन का इस्तेमाल तय दिशा-निर्देशों के विपरीत किया गया, तो संबंधित जवान के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की जा सकती है।सीआरपीएफ एक्ट, 1949 के तहत पहले आंतरिक जांच कर यह तय किया जाता है कि बल का प्रयोग परिस्थितियों के अनुरूप था या नहीं। जांच में दोषी पाए जाने पर जवान के खिलाफ नौकरी से बर्खास्तगी, रैंक में कमी, वेतन कटौती या अन्य अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।

Pellet Gun: आपराधिक मुकदमे का भी करना पड़ सकता है सामना

यदि जांच एजेंसियों को यह लगता है कि पैलेट गन का इस्तेमाल गैरकानूनी तरीके से किया गया और इससे किसी व्यक्ति को गंभीर नुकसान पहुंचा, तो संबंधित सुरक्षाकर्मी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत आपराधिक मामला भी दर्ज हो सकता है।कानूनी जानकारों के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति को स्थायी विकलांगता, आंखों की रोशनी चली जाने जैसी गंभीर चोट पहुंचती है, तो गंभीर अपराधों से जुड़े प्रावधान लागू हो सकते हैं। वहीं खतरनाक हथियार से जानबूझकर चोट पहुंचाने के मामलों में भी कानून के तहत जेल की सजा का प्रावधान है। अंतिम धाराएं और सजा जांच के निष्कर्ष तथा अदालत के फैसले पर निर्भर करेंगी।

Pellet Gun: राहुल गांधी ने उठाए सवाल

इस मामले को लेकर कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार और गृह मंत्रालय से जवाब मांगा है। 24 जुलाई 2026 को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने एक छात्र को मीडिया के सामने पेश करते हुए दावा किया कि विरोध प्रदर्शन के दौरान उसे पैलेट गन के छर्रे लगे थे। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

क्या होती है पैलेट गन?

पैलेट गन ऐसी बंदूक होती है, जिसमें एक गोली के बजाय कई छोटे-छोटे धातु के छर्रों वाला कारतूस इस्तेमाल किया जाता है। ट्रिगर दबाने के बाद ये छर्रे एक साथ निकलकर बड़े क्षेत्र में फैल जाते हैं। इसी कारण एक ही फायर में आसपास मौजूद कई लोग इसकी चपेट में आ सकते हैं। शरीर के संवेदनशील हिस्सों, खासकर आंखों पर लगने पर यह गंभीर चोट का कारण बन सकती है।फिलहाल मामले की जांच जारी है और अधिकारियों का कहना है कि सभी तथ्यों की जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। यदि नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो संबंधित सुरक्षाकर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ आपराधिक मुकदमा भी चलाया जा सकता है। इस घटना ने एक बार फिर भीड़ नियंत्रण के दौरान सुरक्षा बलों द्वारा अपनाई जाने वाली प्रक्रिया और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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