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यूपी में इस बार ज्यादा सीटें चाहती है कांग्रेस, अखिलेश देने के मूड में नहीं, संबंधों में खटास

New Delhi: यूपी में इस बार ज्यादा सीटें चाहती है कांग्रेस, अखिलेश देने के मूड में नहीं, संबंधों में खटास
New Delhi: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव लिए पूरी तरह सक्रिय हैं, जगह-जगह विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण कार्यक्रम चल रहे हैं। भाजपा संगठन भी अपने हिसाब से कार्यक्रम दे रहा है, लेकिन इंडिया गठबंधन के दो प्रमुख दलों कांग्रेस और सपा के सामने चुनावी मैदान में उतरने से पहले सीटों के बंटवारे की बड़ी चुनौती खड़ी है।

जीतने वाले घोड़ों पर ही दांव

दरअसल, समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव और उनके कार्यकर्ताओं का शुरू से ही साफ स्टैंड रहा है कि उत्तर प्रदेश में सपा बड़े भाई की भूमिका में है।आज भी विधानसभा में सपा के पास अच्छे-खासे विधायक हैं, यही नहीं 2024 के लोकसभा चुनाव में उसके 37 उम्मीदवार  सांसद चुने गए। कांग्रेस इस बार विधानसभा चुनाव में ज्यादा सीटें मांगने का दबाव बनाने की रणनीति में है, तो अखिलेश यादव साफ संकेत दे रहे हैं कि सीटों का बंटवारा किसी दबाव में नहीं होगा, बल्कि जीतने वाले घोड़ों पर ही दांव लगाया जाएगा।

New Delhi: कांग्रेस-सपा संबंधों में कड़वाहट

खास बात यह है कि इस बीच NEET-UG पेपर लीक और छात्रों पर हुई कार्रवाई के मुद्दे पर सपा और कांग्रेस के संबंधों में खटास भी देखी गई। 22 जुलाई को इस मुद्दे पर लोकसभा में  हुई चर्चा के दौरान समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रमुख अखिलेश यादव और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता के. सी. वेणुगोपाल के बीच तीखी बहस देखने को मिली।दरअसल, विषय पर चर्चा के दौरान जमकर हंगामा हुआ।स्पीकर ने भाजपा और कांग्रेस के सदस्यों को बोलने का अवसर दिया, लेकिन अखिलेश यादव को मौका नहीं मिला तो वे नाराज हो गए और उन्होंने तंज किया कि क्या सरकार और कांग्रेस में कोई समझौता हो गया है? इस बीच अखिलेश यादव ने यह कहकर भी सनसनी मचा दी है कि कांग्रेस से हमारा गठबंधन लोकसभा चुनाव 2024 में था।विधानसभा चुनाव अभी दूर है।

New Delhi: कांग्रेस का क्यों बढ़ा मनोबल ?

राजनीतिक पंडितों के मुताबिक कांग्रेस के ज्यादा सीटों पर दावेदारी इसलिए भी कर रही है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में उसने भी राज्य में  बेहतर प्रदर्शन किया। इस बीच छात्रों के आंदोलन के चलतेे शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद कांग्रेस का मनोबल और बढ़ा है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं को लगता है कि उनके नेता राहुल गांधी ने छात्रों के बीच जो “गूंज” कार्यक्रम चलाया वह सफल रहा। इसके अलावा राहुल समेत बड़े नेताओं का पीएम आवास पर धरना भी सफल रहा।माना जा रहा है कि इसका असर उत्तर प्रदेश की राजनीति पर भी दिखाई देगा।

New Delhi: कांग्रेस चल सकती है यह दांव...

अब  कांग्रेस सीट बंटवारे को लेकर निश्चित ही सपा पर दबाव बनाएगी। बताया जाता है कि वह राज्य में 100 से अधिक सीटें चाहती है, लेकिन अखिलेश इसे कदापि मंजूर नहीं करेंगे। ऐसे में कांग्रेस अपनी रणनीति के तहत राज्य की सभी 403 सीटों पर प्रत्याशी उतारने का दांव भी चल सकती है। जो भी हो इस बार सीटों के बंटवारे को लेकर दोनों दलों की खींचतान सबंधों में बड़ी दरार का कारण बन सकती है।