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BRICS पर राजनीति तेज, कांग्रेस बोली-देश को क्या पायदा? भाजपा बोली-‘फूफा’ को पचा नहीं

BRICS पर राजनीति तेज, कांग्रेस बोली-देश को क्या पायदा? भाजपा बोली-'फूफा' को पचा नहीं
New Delhi: देश में आयोजित हो रहे 18 वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन को लेकर राजनीति गरमा गई है। सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है।भाजपा इस सम्मेलन को देश के लिए बहुत खास बता रही है, तो विपक्षी कांग्रेस का कहना है कि पिछले ऐसे सम्मेलनों से देश को कोई खास फायदा नहीं हुआ। 

चिदंबरम ने सम्मेलन के फायदे पर उठाए सवाल

कांग्रेस की ओर से डॉलर पर निर्भरता कम करने (डी-डॉलराइजेशन) स्थानीय मुद्राओं (लोकल करेंसी) में व्यापार और चीन के साथ विदेश नीति को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश की जा रही है।वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने सवाल उठाया है कि आखिर इस सम्मेलन से देश को क्या हासिल हो रहा है? उन्होंने कहा कि पिछले दो-तीन सम्मेलनों से भारत को कोई ठोस या महत्वपूर्ण फायदा नहीं दिखाई दिया।चिदंबरम ने यह भी सवाल उठाया कि  BRICS के अलावा भारत शंघाई सहयोग संगठन (SCO),  जी20 (G20 ) और क्वाड (QUAD) में शामिल है।इन संगठनों से भारत को क्या फायदा मिल रहा है? 

New Delhi: प्रियांक खड़गे ने विदेश नीति का मुद्दा उठाया 

ब्रिक्स सम्मेलन से पहले कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खड़गे ने भी भारत की विदेश नीति, गिरते रुपये और चीन के मुद्दे पर तीखा हमला बोला।खड़गे ने कहा कि सरकार ने भारतीय रुपये को मजबूत करने का वादा किया था, लेकिन रुपया ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच गया है और डॉलर लगातार महंगा हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि चीन भारतीय सीमा के भीतर गांव बसा रहा है और हमारे हिस्सों पर कब्जा कर रहा है, लेकिन केंद्र सरकार इस पर पूरी तरह चुप है और उसका मुकाबला करने का साहस नहीं जुटा पा रही है।उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री और विदेश मंत्रालय यह तय नहीं कर पा रहे हैं कि देश की विदेश नीति को किस दिशा में ले जाना है।

New Delhi: कांग्रेस को अपने ही घर से झटका

पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने विपक्ष का धर्म निभाते हुए शिखर सम्मेलन पर सवाल तो उठाए, लेकिन दिक्कत यह रही कि जहां भाजपा नेता उनके खिलाफ हमलावर हो गए, वहीं उन्हें अपनी ही पार्टी के भीतर से भी झटका लग गया। कांग्रेस सांसद और विदेश मामलों की संसदीय समिति के अध्यक्ष शशि थरूर ने अपनी पार्टी के रुख से अलग बयान देकर चिदंबरम के हथियार की धार कुंद कर दी।थरूर ने ब्रिक्स सम्मेलन का समर्थन करते हुए इसे भारत की “राजनयिक आयोजन क्षमता” का एक बड़ा प्रमाण बताया। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स ग्लोबल साउथ के 100 से अधिक देशों की आवाज बुलंद करने का सशक्त मंच है।  

New Delhi: भाजपा का पलटवार

चिदंबरम के का बयान सामने आते ही भाजपा भाजपा  प्रवक्ताओं ने पलटवार करने में जरा भी देरी नहीं की।उन्होंने विपक्ष की तुलना शादी में “नाराज रहने वाले फूफाजी” से कर डाली। भाजपा प्रवक्ताओं ने हमला किया कि जब भी वैश्विक स्तर पर भारत का डंका बजता है, तो विपक्ष को उसमें शंका नजर आने लगती है। भाजपा नेताओं ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत आज ग्लोबल साउथ (Global South) की बुलंद आवाज बन चुका है और यह सम्मेलन भारत की मजबूत कूटनीति का प्रमाण है।

New Delhi: कांग्रेस का प्रोपेगैंडा

बिहार सरकार में मंत्री दिलीप जायसवाल ने कहा, “ब्रिक्स को लेकर कांग्रेस और उसके नेताओं ने जो प्रोपेगैंडा शुरू किया है, उससे पता चलता है कि कांग्रेस नहीं चाहती कि भारत या भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत हो। इसीलिए हर कोशिश को नाकाम करना ही आज कांग्रेस का एजेंडा बन गया है। इससे साफ है कि कांग्रेस किसी भी तरीके से भारत को कमजोर करना चाहती है।”

New Delhi: भारत का बज रहा डंका

बिहार भाजपा के नेता मृत्युंजय तिवारी ने कहा, “ब्रिक्स सम्मेलन, बहुत बड़ा सम्मेलन है, कई देशों के प्रतिनिधि इसमें भाग लेंगे। यह केंद्र सरकार की, आदरणीय प्रधानमंत्री मोदी की, जो पूरे वैश्विक स्तर पर भारत का आज डंका बज रहा है। आज आन, बान, शान से भारत विश्व के मानस पटल पर खड़ा है। उसकी झलक इस सम्मेलन में दिखेगी।मजबूती के साथ भारत यह सम्मेलन दिल्ली में कर रहा है।”

New Delhi: ‘फूफा’ को यह पच नहीं रहा

भाजपा के प्रवक्ता प्रतुल शाह देव ने कहा, “ब्रिक्स एक बहुत अहम सम्मेलन है, जिसमें चीन के राष्ट्रपति और रूस के राष्ट्रपति पुतिन जैसे बड़े राष्ट्राध्यक्ष शामिल होते हैं। ब्रिक्स का अपना बैंक भी है, जो इसे एक अहम मंच बनाता है। यह व्यापार को बढ़ाने का भी एक अच्छा माध्यम है। पूरे रीजन की बेहतरी के लिए एक अच्छा माहौल होता है, लेकिन कांग्रेस के ‘फूफा’ को यह पच नहीं रहा है।”

New Delhi: मोदी की बड़ी उपलब्धि

भाजपा सांसद शशांक मणि त्रिपाठी ने  कहा, “यह देश और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है। ब्रिक्स समिट, जो चीन, रूस और भारत समेत ‘ग्लोबल साउथ’ के देशों को एक साथ लाता है। वह सिर्फ पांच देशों तक सीमित नहीं है; इसमें कई अन्य देश भी शामिल हुए हैं। अभी इस समिट की अगुवाई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कर रहे हैं।”