3AC vs Economy Class: भारतीय रेलवे में रोजाना करोड़ों यात्री सफर करते हैं और इन सफर करने वाले यात्रियों के मन में अक्सर एक सवाल उठता है कि जब 3AC और थर्ड एसी इकोनॉमी कोच लगभग एक जैसी सुविधाएं देते हैं, तो उनके किराए में इतना अंतर क्यों होता है? आइए इस आर्टिकल में इस अंतर का पूरा गणित समझते हैं।
कोच के अंदर छिपा है राज
अगर आप बाहर से देखेंगे तो 3AC और 3AC इकोनॉमी के डिब्बे आपको बिल्कुल जुड़वा लगेंगे। दोनों ही कोच में यात्रियों को वातानुकूलित सफर का अनुभव मिलता है और बेडरोल भी दिया जाता है। अपर, मिडिल, लोअर और साइड की दो सीटों से लेकर प्रति कोच चार वॉशरूम होने तक, बर्थ की बनावट में सब कुछ एक समान है। इसके बावजूद, दोनों के बीच का असली अंतर कोच के अंदर मिलने वाले ‘स्पेस’ में छिपा होता है।
3AC vs Economy Class: सीटों की चौड़ाई में की गई है कटौती
दरअसल, किराए में कमी का सबसे बड़ा कारण सीटों का साइज है। सामान्य 3AC डिब्बे की सीट का आकार 1820×635 मिलीमीटर होता है, जबकि इकोनॉमी क्लास में यही साइज 1850×573 मिलीमीटर रखा गया है। इसका सीधा मतलब है कि इकोनॉमी कोच में सीट की चौड़ाई घटा दी गई है। यही वजह है कि इसमें लेटते समय यात्रियों को नॉर्मल 3AC जितना आराम नहीं मिल पाता है।
3AC vs Economy Class: ज्यादा सीटें, लेकिन लेगरूम कम
इकोनॉमी कोच में आमने-सामने की सीटों के बीच की खाली जगह काफी कम होती है। जगह इतनी कम होती है कि बैठने पर सामने वाले यात्री से आपके पैर टकरा सकते हैं। दरअसल, एक सामान्य 3AC कोच में 72 यात्रियों के सफर करने की व्यवस्था होती है, जबकि इकोनॉमी कोच में कुल 83 सीटें लगाई जाती हैं। कोच के अंदर इन एक्स्ट्रा सीटों को एडजस्ट करने के लिए ही यात्रियों के उठने-बैठने और पैरों के पास की खाली जगह को कम किया जाता है। आसान शब्दों में समझें तो, 3AC इकोनॉमी में सुविधाओं से कोई समझौता नहीं किया गया है, बल्कि ‘स्पेस मैनेजमेंट’ के जरिए एक ही कोच में ज्यादा यात्रियों के सफर की व्यवस्था की गई है।
Wriiten by : Anushka Pandey
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