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PoK में मानवाधिकार उल्लंघन पर भारत का पाकिस्तान पर हमला, अंतरराष्ट्रीय समुदाय से निगरानी की अपील

PoK Protest:

PoK Protest: भारत ने पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoK) में हालिया घटनाक्रम को लेकर पाकिस्तान पर गंभीर आरोप लगाए हैं। विदेश मंत्रालय (MEA) ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वह PoK में पाकिस्तान की गतिविधियों पर करीबी नजर रखे और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित मानवाधिकार उल्लंघनों के लिए इस्लामाबाद को जवाबदेह ठहराए।

प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग का आरोप

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि पाकिस्तान प्रशासन ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों के खिलाफ जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस कार्रवाई में 40 से अधिक आम नागरिकों की मौत हुई है, जबकि कई अन्य घायल हुए हैं।

PoK Protest: रक्षा मंत्री के बयान पर भी जताई आपत्ति

भारत ने पाकिस्तान के रक्षा मंत्री की उस टिप्पणी पर भी आपत्ति जताई, जिसमें कथित तौर पर प्रदर्शनकारियों को दुश्मन बताया गया था। विदेश मंत्रालय का कहना है कि यह बयान PoK के लोगों के प्रति पाकिस्तान सरकार के रवैये को दर्शाता है।

PoK Protest: उग्रवाद और चुनावों का भी किया जिक्र

MEA ने पाकिस्तान के एक वरिष्ठ अधिकारी के बयान का हवाला देते हुए कहा कि जिन उग्रवादी समूहों को कभी पाकिस्तान ने समर्थन दिया था, वही अब उसके खिलाफ खड़े हो गए हैं। भारत का कहना है कि हाल के चुनावों में भी PoK के लोगों की नाराजगी साफ दिखाई दी है और स्थानीय नागरिक स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग कर रहे हैं।

कैसे शुरू हुआ विवाद

PoK में विरोध-प्रदर्शन 9 जून को उस समय शुरू हुए, जब जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) ने राजनीतिक और आर्थिक सुधारों की मांग को लेकर ‘लॉन्ग मार्च’ का ऐलान किया। बातचीत विफल होने के बाद प्रदर्शन तेज हो गए। आरोप है कि प्रशासन ने कई इलाकों में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दीं और मीडिया कवरेज पर भी प्रतिबंध लगाए।

मौतों के आंकड़ों पर अलग-अलग दावे

मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, शुरुआती दौर में प्रदर्शन और हिंसा के दौरान कम से कम 44 लोगों की मौत हुई थी। वहीं, जम्मू-कश्मीर ह्यूमन राइट्स ऑब्जर्वेटरी (JKHRO) ने दावा किया है कि नागरिकों की मौत का आंकड़ा बढ़कर 75 हो गया है।

राइट्स ग्रुप्स ने लगाए गंभीर आरोप

28 जुलाई को जारी एक रिपोर्ट में JKHRO ने आरोप लगाया कि पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने 27 और 28 जुलाई को रावलकोट लॉन्ग मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों पर कथित तौर पर लाइव गोलियों का इस्तेमाल किया, जिसमें 31 नागरिकों की मौत हो गई। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

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