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आर्टिकल 370 हटने के 7 साल: विकास, सुरक्षा और बदलाव पर क्या बोले जम्मू-कश्मीर के लोग?

JAMMU KASHMIR: जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के अधिकांश प्रावधान हटाए जाने के सात वर्ष पूरे होने पर एक बार फिर यह सवाल चर्चा में है कि इस फैसले के बाद केंद्रशासित प्रदेश में कितना बदलाव आया। 5 अगस्त 2019 को केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को हटाते हुए जम्मू-कश्मीर का पुनर्गठन किया था, जिसके बाद जम्मू-कश्मीर और लद्दाख दो अलग-अलग केंद्रशासित प्रदेश बने।

1947 से 2019 तक का संवैधानिक सफर

1947 में महाराजा हरि सिंह ने ‘इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन’ पर हस्ताक्षर कर जम्मू-कश्मीर का भारत में विलय किया था। इसके बाद अनुच्छेद 370 और 35ए के तहत राज्य को विशेष संवैधानिक प्रावधान प्राप्त थे। 5 अगस्त 2019 को केंद्र सरकार ने इन प्रावधानों को समाप्त कर नई प्रशासनिक व्यवस्था लागू की।

JAMMU KASHMIR: पर्यटन और माहौल में बदलाव का दावा

आईएएनएस से बातचीत में विमल मेहरा ने कहा कि अनुच्छेद 370 हटने के बाद पर्यटन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उनके अनुसार, श्रीनगर के लाल चौक पर अब बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंच रहे हैं, तिरंगा फहरा रहे हैं और खुले माहौल में घूम रहे हैं। उन्होंने इस बदलाव का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को दिया।

सुरक्षा स्थिति पर लोगों की राय

दीपक सिंह ने दावा किया कि पहले घाटी में बंद, हड़ताल और पत्थरबाजी जैसी घटनाएं आम थीं, लेकिन अब हालात बदले हैं और ऐसी घटनाओं में काफी कमी आई है। हालांकि, यह उनके व्यक्तिगत विचार हैं।

JAMMU KASHMIR: व्यापार और विकास पर क्या बोले कारोबारी

जम्मू चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष अरुण गुप्ता ने कहा कि पिछले सात वर्षों में बुनियादी ढांचे, रेल संपर्क और पर्यटन के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। उन्होंने माना कि हाल के कुछ आतंकी हमले चिंता का विषय हैं, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां लगातार स्थिति पर काम कर रही हैं।

अधिकारों में बदलाव का दावा

श्री सनातन धर्म सभा के अध्यक्ष पुरुषोत्तम दधीचि ने कहा कि अनुच्छेद 370 हटने के बाद गोरखा समुदाय, वाल्मीकि समुदाय और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओजेके) से विस्थापित लोगों को राजनीतिक और रोजगार संबंधी अधिकारों में पहले की तुलना में अधिक अवसर मिले हैं। उनके अनुसार, अब ये समुदाय चुनावी प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं।

JAMMU KASHMIR: बहस अब भी जारी

अनुच्छेद 370 हटाए जाने के सात साल बाद भी इस फैसले को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दलों और समाज के विभिन्न वर्गों की राय अलग-अलग है। समर्थक इसे विकास, सुरक्षा और समान अधिकारों की दिशा में बड़ा कदम बताते हैं, जबकि आलोचक इसके संवैधानिक, राजनीतिक और सामाजिक प्रभावों पर सवाल उठाते रहे हैं। ऐसे में यह विषय आज भी सार्वजनिक और राजनीतिक विमर्श का महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ है।

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