Bihar News: बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में जीत के बाद जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने अपने उस बयान पर सफाई दी है, जिसमें उन्होंने बांकीपुर को बेंगलुरु जैसा विकसित करने की बात कही थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया। साथ ही कांग्रेस के साथ संभावित गठबंधन और बिहार की मौजूदा राजनीति पर भी उन्होंने खुलकर अपनी राय रखी। प्रशांत किशोर ने कहा कि उनकी प्राथमिकता फिलहाल बांकीपुर के विकास की ठोस योजना तैयार करना है, न कि राजनीतिक गठबंधनों की चर्चा।
‘एक विधायक बनने से नहीं बदलता शहर’
प्रशांत किशोर ने कहा कि उन्होंने कभी यह दावा नहीं किया कि सिर्फ उनके विधायक बनने से बांकीपुर बेंगलुरु बन जाएगा। उनका कहना था कि जनता ने जन सुराज पर भरोसा जताया है, इसलिए अगले एक से डेढ़ साल के भीतर एक विस्तृत विकास ब्लूप्रिंट तैयार किया जाएगा। इस योजना में यह बताया जाएगा कि बांकीपुर को आधुनिक सुविधाओं, बेहतर बुनियादी ढांचे, रोजगार और शहरी विकास के मामले में देश के विकसित शहरों की तर्ज पर कैसे आगे बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि विकास केवल घोषणाओं से नहीं, बल्कि योजनाबद्ध कार्यों से संभव होता है।
Bihar News: कांग्रेस से गठबंधन पर दिया स्पष्ट जवाब
कांग्रेस के साथ संभावित गठबंधन को लेकर पूछे गए सवाल पर प्रशांत किशोर ने कहा कि कांग्रेस एक राष्ट्रीय पार्टी है और उसे अपने राजनीतिक फैसले स्वयं लेने चाहिए। उन्होंने कहा कि इस समय बिहार में कोई चुनाव नहीं है और राज्य में एनडीए की सरकार काम कर रही है। ऐसे में राजनीतिक समीकरणों से ज्यादा जरूरी है कि सरकार उद्योग, रोजगार और विकास पर ध्यान दे। उन्होंने कहा कि बिहार में नई फैक्ट्रियां लगनी चाहिए, युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ने चाहिए और पलायन जैसी गंभीर समस्या का समाधान होना चाहिए। फिलहाल किसी गठबंधन की आवश्यकता नहीं है।
जनादेश का सम्मान, अटकलों की राजनीति से दूरी
उपचुनाव के मतदान प्रतिशत पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि उपलब्ध आंकड़ों से ऐसा नहीं लगता कि बड़ी संख्या में युवाओं ने मतदान किया। बावजूद इसके उन्होंने जनता के जनादेश का सम्मान करने की बात कही और भरोसा दिलाया कि जन सुराज अब बांकीपुर के विकास की दिशा में ठोस काम करेगा। वहीं जेडीयू विधायक अनंत कुमार सिंह के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि राजनीति में “अगर-लेकिन” के आधार पर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि परिस्थितियां समय के साथ बदलती रहती हैं और नेताओं के फैसले भी उसी के अनुरूप बदलते हैं। इसलिए काल्पनिक चर्चाओं के बजाय वर्तमान राजनीतिक हालात और जनता की अपेक्षाओं पर ध्यान देना अधिक जरूरी है।
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