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मोहन भागवत ने कहा- ‘जिसका उदय हुआ है, उसका अस्त भी निश्चित’, बयान के राजनीतिक मायने क्यों निकाले जा रहे? जानिए क्या कहा…

Mohan Bhagwat Ujjain: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत के उज्जैन में दिए बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। युवा धर्म संसद में युवाओं को संबोधित करते हुए भागवत ने अहंकार, सत्ता और जीवन के शाश्वत नियमों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति यह मानने लगता है कि सब कुछ उसके नियंत्रण में है और हर चीज उसकी इच्छा के मुताबिक होनी चाहिए, तो वह गलतफहमी में पड़ जाता है। इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि “जिसका उदय हुआ है, उसका अस्त भी निश्चित है।”

बयान में किसी राजनीतिक दल, नेता या सरकार का नाम नहीं लिया गया। इसके बावजूद ‘अहंकार’, ‘सत्ता’ और ‘उदय-अस्त’ जैसे शब्दों को राजनीतिक संदर्भों से जोड़कर देखा जा रहा है। सवाल यही है कि भागवत का वास्तविक संदेश क्या था और राजनीतिक मायने क्यों निकाले जा रहे हैं?

सवाल-1: भागवत ने उज्जैन में क्या कहा?

भागवत ने अपने संबोधन में मनुष्य के अहंकार और उसके नियंत्रण की भावना पर बात की। उनका तर्क था कि व्यक्ति कई बार यह मान लेता है कि परिस्थितियां उसके नियंत्रण में हैं और दुनिया उसकी इच्छा के अनुसार चलेगी। उन्होंने प्रकृति का उदाहरण देते हुए समझाया कि उसके अपने नियम होते हैं। व्यक्ति किसी चीज को माने या न माने, उससे प्रकृति के नियम नहीं बदलते। इसी बात को समझाते हुए उन्होंने सूर्य के उदय और अस्त का उदाहरण दिया और कहा कि जिसका उदय हुआ है, उसका अस्त भी निश्चित है।

Mohan Bhagwat Ujjain: सवाल-2: क्या यह किसी नेता या सरकार के लिए संदेश था?

यही बात इस बयान को राजनीतिक चर्चा का विषय बना रही है। सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में अलग-अलग लोग अपने-अपने संदर्भ में इसकी व्याख्या कर रहे हैं।लेकिन उपलब्ध सार्वजनिक बयान में भागवत ने किसी नेता, राजनीतिक दल या सरकार का नाम नहीं लिया है। उनके भाषण का तत्काल संदर्भ युवाओं को धर्म, जीवन और अहंकार की अवधारणा समझाना था।

इसलिए यह कहना कि उन्होंने निश्चित रूप से किसी खास नेता या सरकार को निशाना बनाकर यह बात कही, उपलब्ध बयान के आधार पर स्थापित तथ्य है। इसे फिलहाल एक व्यापक दार्शनिक और सामाजिक संदेश के रूप में देखना ज्यादा सटीक होगा। वहीं पर कयास यह भी लगाए जा रहे है कि संघ और भाजपा में जिस तरह से विरोध हो रहा है उसको लेकर संग भागवत बयान दिया है। संघ प्रमुख मोहन भागवत के इस बयान के बाद सियासी गलियारों में एक बार फिर मतलब निकालना शुरू हो गया है. कई सियासी प्रश्न भी खड़े होने लगे हैं. आखिरकार संघ प्रमुख किस पर निशाना साध रहे हैं? किसको नसीहत दे रहे हैं?

 राजनीतिज्ञ जानकार कहते हैं “बयान किस संदर्भ में दिया गया, यह स्पष्ट नहीं है लेकिन पार्टी नेताओं के लिए इस बयान में संदेश जरूर छुपा है. पार्टी में कई स्तर पर अंदरूनी विरोध के स्वर उठाते रहे हैं. UCC को लेकर ही सरकार और संघ के अलग-अलग बयान आ चुके हैं.”

लोकसभा चुनाव नतीजे के बाद भी कई बयान आए

लोकसभा चुनाव 2024 के परिणामों में बीजेपी को झटका लगने के बाद कई बार संघ प्रमुख अप्रत्यक्ष रूप से इसी प्रकार के बयान देते रहे हैं. उस समय भी ऐसी चर्चा चलती रही कि क्या बीजेपी और आरएसएस के बीच सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है. उस समय मोहन भागवत ने कहा था “आत्मविकास के क्रम में एक मनुष्य सुपरमैन, फिर देवता और भगवान बनना चाहता है.” हालांकि इस दौरान भी संघ प्रमुख ने किसी का नाम नहीं लिया था. लेकिन समझने वाले समझ चुके थे कि इशारा किस ओर है.

सवाल-3: फिर ‘सत्ता’ और ‘उदय-अस्त’ की चर्चा क्यों हो रही है?

राजनीतिक संदर्भ इसलिए निकाला जा रहा है क्योंकि भागवत ने उस मानसिकता पर सवाल उठाया जिसमें व्यक्ति यह मानने लगता है कि “सब कुछ मेरे नियंत्रण में है” या हर चीज उसकी इच्छा के मुताबिक चलेगी। राजनीति में सत्ता को लेकर ऐसे शब्द स्वाभाविक रूप से अलग अर्थ पैदा कर सकते हैं। इसी वजह से बयान के बाद सोशल मीडिया पर इसके अलग-अलग राजनीतिक अर्थ निकाले जा रहे हैं। हालांकि, किसी बयान का राजनीतिक संकेत और वक्ता का स्पष्ट राजनीतिक संदेश दो अलग चीजें हैं। यहां दोनों को एक मान लेना उचित नहीं होगा।

Mohan Bhagwat Ujjain: सवाल-4: भागवत ने धर्म को लेकर क्या कहा?

भागवत के संबोधन का बड़ा हिस्सा धर्म की अवधारणा पर केंद्रित रहा। उन्होंने धर्म को केवल पूजा-पद्धति या कर्मकांड तक सीमित मानने से अलग व्यापक अर्थ में समझाने की कोशिश की। उनके अनुसार धर्म जीवन जीने की व्यवस्था और अनुशासन से जुड़ा विषय है। सुख और दुख आते-जाते रहते हैं, लेकिन धर्म को उन्होंने स्थायी मूल्य के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने भारतीय संदर्भ में ‘धर्म’ और पश्चिमी संदर्भ में इस्तेमाल होने वाले ‘रिलिजन’ के बीच अंतर समझाने की बात भी कही।

Mohan Bhagwat Ujjain
                                                                                            Mohan Bhagwat Ujjain
सवाल-5: युवाओं के लिए उनका संदेश क्या था?

भागवत ने धर्म को केवल उम्र के अंतिम पड़ाव से जोड़ने की धारणा पर भी बात की। उन्होंने युवाओं को धर्म के सिद्धांतों को समझने और उन्हें अपने व्यवहार में उतारने का संदेश दिया। गीता और रामायण का उदाहरण देते हुए उन्होंने धर्म को जीवन के हर चरण से जोड़कर देखने की बात कही। उनके संबोधन का मूल संदेश यह था कि व्यक्ति को अपनी सफलता, शक्ति या परिस्थितियों पर अहंकार नहीं करना चाहिए और जीवन के मूल सिद्धांतों को समझकर आचरण में उतारना चाहिए।

Mohan Bhagwat Ujjain: सवाल-6: बयान को राजनीतिक नजरिए से कैसे समझें?

इस बयान को दो स्तरों पर देखा जा सकता है। पहला स्तर- भाषण का प्रत्यक्ष संदर्भ।

यह युवाओं के सामने धर्म, अहंकार, प्रकृति और जीवन के नियमों की व्याख्या थी। इसमें किसी राजनीतिक व्यक्ति का नाम नहीं लिया गया।

दूसरा स्तर- राजनीतिक व्याख्या।

‘मेरी सत्ता’, ‘सब कुछ मेरे नियंत्रण में’ और ‘उदय-अस्त’ जैसे शब्द राजनीति में सत्ता और नेतृत्व से जोड़कर देखे जा सकते हैं। इसी वजह से राजनीतिक चर्चाएं शुरू हुईं।लेकिन दूसरा अर्थ व्याख्या है, भागवत का स्पष्ट घोषित राजनीतिक संदेश नहीं।

सवाल-7: क्या भागवत के बयान से कोई राजनीतिक संदेश तय माना जा सकता है?

फिलहाल नहीं। किसी बयान के राजनीतिक मायने निकालने के लिए वक्ता का संदर्भ, पूरा भाषण और संबंधित राजनीतिक घटनाक्रम देखना जरूरी होता है। उज्जैन के इस संबोधन में भागवत ने किसी खास नेता या सरकार का नाम लेकर कोई टिप्पणी नहीं की। इसलिए उनके शब्दों को किसी एक राजनीतिक व्यक्ति के खिलाफ संदेश के रूप में निश्चित रूप से पेश करना उपलब्ध तथ्यों से आगे जाना होगा।

Mohan Bhagwat Ujjain: पूरी तस्वीर क्या है?

मोहन भागवत का उज्जैन में दिया बयान इसलिए चर्चा में है क्योंकि उसमें अहंकार, नियंत्रण, सत्ता और ‘उदय-अस्त’ जैसे शब्द आए। इन शब्दों को राजनीतिक संदर्भ में पढ़ा जा रहा है, लेकिन उनके पूरे संबोधन का केंद्र युवाओं को धर्म, अनुशासन और जीवन के स्थायी मूल्यों को समझाना था। इसलिए फिलहाल सबसे तथ्यात्मक निष्कर्ष यही है कि भागवत ने किसी व्यक्ति या सरकार का नाम लिए बिना अहंकार और सत्ता के स्थायित्व के भ्रम पर बात की। इसके राजनीतिक अर्थ अलग-अलग लोग अपने नजरिए से निकाल सकते हैं, लेकिन किसी खास नेता के लिए संदेश था- यह बात अभी व्याख्या के स्तर पर ही है।

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