Colposcopy Test: दुनियाभर में सर्वाइकल कैंसर के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर जांच कराने से इस बीमारी का शुरुआती चरण में पता लगाया जा सकता है, जिससे इलाज के सफल होने की संभावना काफी बढ़ जाती है। आमतौर पर सर्वाइकल कैंसर की स्क्रीनिंग के लिए पैप स्मीयर और HPV टेस्ट किए जाते हैं। हालांकि, इन टेस्ट में असामान्यता मिलने पर डॉक्टर कोल्पोस्कोपी (Colposcopy) कराने की सलाह देते हैं। इस विषय पर ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. मनदीप सिंह मल्होत्रा (Art of Healing Cancer, Delhi) ने बताया कि कोल्पोस्कोपी से सर्विक्स की गहराई से जांच कर बीमारी की सही स्थिति का पता लगाया जा सकता है।
Colposcopy Test: कोल्पोस्कोपी क्यों जरूरी होती है-
डॉ. मनदीप सिंह मल्होत्रा के अनुसार, पैप स्मीयर सिर्फ यह बताता है कि सर्विक्स की कोशिकाओं में असामान्य बदलाव हैं या नहीं। लेकिन यह नहीं बता पाता कि बदलाव कहां हैं और कितने गंभीर हैं। ऐसे मामलों में कोल्पोस्कोपी की मदद से प्रभावित हिस्से को सीधे देखा जाता है। जरूरत पड़ने पर वहीं से छोटा सैंपल लेकर बायोप्सी के लिए भेजा जाता है।
Colposcopy Test: कोल्पोस्कोपी कैसे की जाती है-
कोल्पोस्कोपी एक आसान और कम समय में पूरी होने वाली जांच है। यह आमतौर पर 10 से 20 मिनट में क्लिनिक में ही की जाती है।जांच के दौरान महिला को बेड पर लिटाकर स्पेकुलम की मदद से सर्विक्स को देखा जाता है। इसके बाद सर्विक्स पर एसिटिक एसिड या आयोडीन सॉल्यूशन लगाया जाता है, जिससे असामान्य कोशिकाएं सफेद या अलग रंग में दिखाई देने लगती हैं। यदि डॉक्टर को जरूरत महसूस होती है, तो उसी समय बायोप्सी भी की जाती है।
बायोप्सी रिपोर्ट में क्या आ सकता है-
कोल्पोस्कोपी के दौरान ली गई बायोप्सी रिपोर्ट के आधार पर आगे का इलाज तय किया जाता है। रिपोर्ट में मुख्य रूप से तीन तरह के परिणाम सामने आ सकते हैं।
सामान्य (कोई गंभीर बदलाव नहीं)
प्रीकैंसरस बदलाव
कैंसरस बदलाव
प्रीकैंसरस बदलाव मिलने पर क्या होता है इलाज-
यदि रिपोर्ट में प्रीकैंसरस बदलाव मिलते हैं, तो डॉक्टर मरीज की स्थिति के अनुसार इलाज तय करते हैं। इसका उद्देश्य असामान्य कोशिकाओं को हटाकर भविष्य में कैंसर बनने के खतरे को कम करना होता है।
इलाज के प्रमुख विकल्प:
LEEP (Loop Electrosurgical Excision Procedure) – पतले वायर लूप से असामान्य हिस्से को हटाया जाता है।
क्रायोथेरेपी – अत्यधिक ठंडे तापमान से असामान्य कोशिकाओं को नष्ट किया जाता है।
कोन बायोप्सी – सर्विक्स के कोन के आकार वाले हिस्से को निकालकर जांच और उपचार किया जाता है।
कोल्पोस्कोपी के बाद क्या सावधानियां रखें-
यदि सिर्फ कोल्पोस्कोपी की गई है, तो आमतौर पर विशेष सावधानी की जरूरत नहीं होती। लेकिन बायोप्सी होने पर डॉक्टर कुछ दिनों तक ये सलाह दे सकते हैं।
3 से 7 दिन तक यौन संबंध बनाने से बचें।
टैम्पोन का इस्तेमाल न करें।
भारी वजन उठाने से बचें।
ज्यादा ब्लीडिंग या तेज दर्द होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
डॉक्टर की सलाह-
विशेषज्ञों का कहना है कि सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए नियमित स्क्रीनिंग बेहद जरूरी है। यदि पैप स्मीयर या HPV टेस्ट में किसी तरह की असामान्यता आती है, तो घबराने के बजाय डॉक्टर की सलाह पर समय रहते कोल्पोस्कोपी कराना चाहिए। इससे बीमारी का जल्द पता लगाकर सही समय पर इलाज शुरू किया जा सकता है।
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