RBI MPC Meeting: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने लगातार दूसरी बार नीतिगत ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। तीन से पांच अगस्त के बीच हुई बैठक के बाद आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने घोषणा की कि रेपो रेट 5.25 प्रतिशत पर ही बरकरार रहेगी। हालांकि, केंद्रीय बैंक ने चालू वित्त वर्ष के लिए आर्थिक वृद्धि (GDP Growth) का अनुमान बढ़ाया है, लेकिन बढ़ती खुदरा महंगाई और वैश्विक अनिश्चितताओं को लेकर सतर्क रुख भी अपनाया है।
रेपो रेट में बदलाव नहीं, महंगाई पर बढ़ी चिंता
आरबीआई गवर्नर ने कहा कि खुदरा महंगाई दर केंद्रीय बैंक के लक्ष्य से ऊपर पहुंच गई है। इसके पीछे खाद्य पदार्थों और ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी प्रमुख कारण है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि सोना-चांदी जैसी कीमती धातुओं को छोड़कर कोर महंगाई अभी भी नियंत्रित स्तर पर बनी हुई है। आरबीआई का अनुमान है कि चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में हेडलाइन महंगाई अपने उच्च स्तर पर पहुंचने के बाद धीरे-धीरे नरम पड़ सकती है।
चालू वित्त वर्ष के लिए महंगाई का नया अनुमान
केंद्रीय बैंक ने चालू वित्त वर्ष के लिए खुदरा महंगाई का अनुमान घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया है, जो पहले के अनुमान से 0.10 प्रतिशत कम है। तिमाही आधार पर पहली तिमाही के लिए 5.3 प्रतिशत, दूसरी तिमाही के लिए 4.7 प्रतिशत, तीसरी तिमाही के लिए 5.9 प्रतिशत और चौथी तिमाही के लिए 5.5 प्रतिशत महंगाई का अनुमान लगाया गया है। आरबीआई का मानना है कि खाद्य और ईंधन से जुड़े आपूर्ति पक्ष के दबाव के कारण निकट अवधि में महंगाई पर असर बना रह सकता है।
GDP ग्रोथ अनुमान बढ़ा, अर्थव्यवस्था का प्रदर्शन बेहतर
आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष के लिए जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 6.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 6.7 प्रतिशत कर दिया है। गवर्नर ने कहा कि पहली तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था का प्रदर्शन उम्मीद से बेहतर रहा है। निजी खपत में मजबूती, विवेकाधीन खर्च में बढ़ोतरी और विनिर्माण क्षेत्र के सकारात्मक कॉरपोरेट नतीजों ने आर्थिक गतिविधियों को सहारा दिया है। साथ ही, वित्त वर्ष 2026-27 के लिए कोर महंगाई का अनुमान 4.3 प्रतिशत रखा गया है।
अल नीनो और वैश्विक हालात बने प्रमुख जोखिम
आरबीआई ने चेतावनी दी कि अल नीनो का प्रभाव महंगाई के लिए एक बड़ा जोखिम बना हुआ है। इसके अलावा, भू-राजनीतिक तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव भी महंगाई के अनुमान को प्रभावित कर सकते हैं। केंद्रीय बैंक का कहना है कि फिलहाल व्यापक स्तर पर महंगाई का दबाव सीमित है, लेकिन खाद्य, ईंधन और अन्य इनपुट लागत में बढ़ोतरी का असर आने वाले समय में वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है। आरबीआई ने संकेत दिया कि भविष्य के नीतिगत फैसले महंगाई की दिशा और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर लिए जाएंगे।








