Industrial Accident: कर्नाटक के यादगीर तालुक स्थित कादेचुर औद्योगिक क्षेत्र में एक दवा निर्माण फैक्ट्री में हुए कथित रासायनिक रिसाव से बड़ा हादसा हो गया। इस दुर्घटना में तीन श्रमिकों की मौत हो गई, जबकि दो अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना मंगलवार देर रात हुई, जिसके बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया।इस हादसे में जान गंवाने वाले श्रमिकों की पहचान विक्रम सिंह (30), संजय सिंह (29) और गणेश (25) के रूप में हुई है। वहीं घायल शिवकुमार और हेमंत को तुरंत रायचूर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (RIMS) अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है। डॉक्टरों के अनुसार दोनों की हालत गंभीर बनी हुई है।
शुरुआती जांच में रासायनिक रिसाव की आशंका
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि फैक्ट्री के अंदर किसी रसायन के रिसाव के कारण यह हादसा हुआ। पुलिस का मानना है कि जहरीला रसायन श्रमिकों के शरीर में सांस के जरिए पहुंचा, जिससे उनकी मौत हो गई। हालांकि, किस रसायन का रिसाव हुआ और इसकी वजह क्या थी, इसका अभी तक पता नहीं चल पाया है।
पुलिस ने शुरू की जांच
घटना की जानकारी मिलते ही सैदापुरा पुलिस स्टेशन की टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। मृतकों के शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिए गए हैं। अधिकारी यह भी जांच कर रहे हैं कि कहीं इस हादसे के पीछे फैक्ट्री प्रबंधन की लापरवाही या औद्योगिक सुरक्षा नियमों का उल्लंघन तो नहीं था।फिलहाल मामले की विस्तृत जांच जारी है। अधिकारी हादसे की असली वजह और जिम्मेदार लोगों की भूमिका का पता लगाने में जुटे हैं। मामले में आगे और जानकारी आने का इंतजार है।
इसी साल फरवरी में भी हुआ था ऐसा हादसा
इस साल 15 फरवरी को भी कर्नाटक में इसी तरह की एक गंभीर घटना सामने आई थी। मांड्या जिले के कारेकाट्टे गांव के पास स्थित कीर्ति केमिकल्स इंडस्ट्रीज में फैक्ट्री की मशीनरी को गैस कटर से अलग कर दूसरी जगह ले जाने के दौरान एक रासायनिक टैंक में विस्फोट और रिसाव हो गया था। इस हादसे में बिहार के दो प्रवासी श्रमिकों की मौत हो गई थी, जबकि चार अन्य गंभीर रूप से घायल हुए थे।
जांच में सामने आई थी यह वजह
बाद में हुई जांच में पता चला कि मशीनरी को हटाने के लिए उसे अलग करने की प्रक्रिया के दौरान रासायनिक रिसाव हुआ था। इसी वजह से टैंक में विस्फोट हुआ और बड़ा हादसा हो गया।पुलिस के अनुसार, यह फैक्ट्री पहले से ही उनकी निगरानी में थी। वर्ष 2022 में जहरीली गैस के रिसाव के कारण पास के गांवों की फसलें खराब हो गई थीं और स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल असर पड़ा था। इसके बाद ग्रामीणों ने फैक्ट्री की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता जताई थी।
विरोध के बाद बंद हुई थी फैक्ट्री
इस घटना के बाद स्थानीय किसानों ने फैक्ट्री के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। स्थानीय विधायक और जिला प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद फैक्ट्री मालिकों ने संचालन बंद करने का फैसला किया था। तब से फैक्ट्री में उत्पादन पूरी तरह ठप था।अधिकारियों ने बाद में फैक्ट्री में मौजूद सामग्री को दूसरी जगह स्थानांतरित करने का निर्णय लिया। 15 फरवरी को इसी प्रक्रिया के तहत रासायनिक टैंक को खाली किया जा रहा था। उसी दौरान टैंक में विस्फोट और रिसाव हुआ, जिससे दो लोगों की मौत हुई और चार अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए।








