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फलों की शुगर और सामान्य चीनी में क्या अंतर है? जानिए डॉक्टर की राय

क्या फलों की शुगर चीनी से बेहतर है?

Natural Sugar Benefits: आजकल लोग चीनी और मीठी चीजें कम खाने की सलाह देते हैं, लेकिन साथ ही ज्यादा से ज्यादा फल खाने की भी बात करते हैं। ऐसे में कई लोगों के मन में सवाल आता है कि फलों में मौजूद नेचुरल शुगर क्या मिठाइयों, कोल्ड ड्रिंक और प्रोसेस्ड फूड में मिलने वाली चीनी से अलग होती है? इस सवाल का जवाब हार्ट सर्जन डॉ. जेरेमी लंदन ने इंस्टाग्राम पर साझा किया है।

जवाब है हां भी और नहीं भी

डॉ. जेरेमी लंदन के अनुसार, इसका जवाब पूरी तरह हां या नहीं में नहीं दिया जा सकता। उन्होंने बताया कि रासायनिक रूप से शुगर एक जैसी होती है, लेकिन शरीर उसे किस तरह पचाता है, यह इस बात पर निर्भर करता है कि शुगर के साथ और क्या मौजूद है।

क्या फलों की शुगर और सामान्य चीनी एक जैसी होती है?

डॉक्टर के मुताबिक, अगर शुगर के अणुओं को अलग करके देखा जाए, तो फलों और सामान्य चीनी में कोई खास अंतर नहीं होता। शरीर दोनों को लगभग एक ही तरह से पहचानता है। असली फर्क उन चीजों का होता है जो शुगर के साथ मौजूद रहती हैं।उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि सेब में भी शुगर होती है और ग्लेज़्ड डोनट में भी। लेकिन दोनों को शरीर अलग-अलग तरीके से पचाता है। इसकी वजह यह है कि फलों में शुगर के साथ कई दूसरे पोषक तत्व भी होते हैं, जबकि प्रोसेस्ड फूड में ऐसा नहीं होता।

साबुत फल शरीर पर कैसे असर डालते हैं?

डॉ. लंदन ने बताया कि साबुत फलों में नेचुरल शुगर के साथ फाइबर और पानी भी भरपूर मात्रा में होता है। ये दोनों चीजें पाचन की गति को धीमा करती हैं और ब्लड शुगर तेजी से बढ़ने से रोकने में मदद करती हैं।इसके अलावा फलों में पॉलीफेनॉल, एंटीऑक्सीडेंट और कई जरूरी सूक्ष्म पोषक तत्व भी होते हैं, जो प्रोसेस्ड चीनी में नहीं मिलते। उदाहरण के तौर पर, सेब में मौजूद फाइबर, पानी और एंटीऑक्सीडेंट शरीर में शुगर को प्रोसेस करने के तरीके को प्रभावित करते हैं। इससे ग्लाइसेमिक इंडेक्स और पूरे शुगर मेटाबॉलिज्म पर सकारात्मक असर पड़ता है।

साबुत फल ही क्यों बेहतर माने जाते हैं?

डॉ. लंदन ने साफ कहा कि ये सभी फायदे केवल साबुत फल खाने पर ही मिलते हैं। उनका कहना है कि जब वे फल खाने की सलाह देते हैं, तो उसका मतलब पूरे फल से होता है, न कि फलों के रस या सूखे फलों से।उन्होंने बताया कि फलों का जूस बनाने पर उसमें मौजूद लगभग पूरा फाइबर निकल जाता है। ऐसे में जूस शरीर में मीठे पेय की तरह असर करता है। वहीं, सूखे फलों में फाइबर तो रहता है, लेकिन पानी काफी कम हो जाता है। इससे उनमें शुगर की मात्रा ज्यादा सघन हो जाती है और कम समय में ज्यादा मात्रा में खा लेना आसान हो जाता है।

क्यों हैं साबुत फल सबसे बेहतर विकल्प?

डॉक्टर के अनुसार, साबुत फल मीठे पेय और प्रोसेस्ड स्नैक्स की तुलना में ज्यादा देर तक पेट भरा हुआ महसूस कराते हैं। यही वजह है कि नेचुरल शुगर के लिए साबुत फल सबसे अच्छा विकल्प माने जाते हैं। साथ ही, फल शरीर को फाइबर, विटामिन, एंटीऑक्सीडेंट और अन्य जरूरी पोषक तत्व भी देते हैं, जो प्रोसेस्ड शुगर से नहीं मिलते।

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