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जस्टिस स्वर्णा कांता शर्मा अवमानना मामला: सौरभ दास ने पोस्ट हटाने से किया इनकार, दिल्ली हाईकोर्ट ने मांगा जवाब

Swarana Kanta

Swarana Kanta: दिल्ली हाईकोर्ट में जस्टिस स्वर्णा कांता शर्मा के खिलाफ कथित सोशल मीडिया टिप्पणियों को लेकर चल रहे आपराधिक अवमानना मामले में नया घटनाक्रम सामने आया है। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के मुख्य प्रवक्ता सौरभ दास ने उन दावों को सिरे से खारिज किया है, जिनमें कहा गया था कि उन्होंने जस्टिस शर्मा से संबंधित अपनी सोशल मीडिया पोस्ट और टिप्पणियां हटा दी हैं। वहीं, मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराने और जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है।

सौरभ दास बोले- कोई पोस्ट या टिप्पणी नहीं हटाई

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता पक्ष की ओर से अदालत को बताया गया कि सौरभ दास और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने जस्टिस स्वर्णा कांता शर्मा के संबंध में की गई टिप्पणियों को सोशल मीडिया से हटा दिया है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए सौरभ दास ने सोशल मीडिया के जरिए कहा कि यह दावा पूरी तरह गलत है। उन्होंने कहा कि उन्होंने न तो कोई पोस्ट हटाई है और न ही कोई टिप्पणी डिलीट की है। उनका कहना है कि उनकी रिपोर्टिंग सूचना के अधिकार (आरटीआई) से प्राप्त आंकड़ों और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध दस्तावेजों पर आधारित थी तथा अदालत के समक्ष गलत जानकारी प्रस्तुत नहीं की जानी चाहिए।

Swarana Kanta: अदालत ने सभी पक्षों को दस्तावेज उपलब्ध कराने के दिए निर्देश

मामले की सुनवाई जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंद्र डुडेजा की पीठ के समक्ष हुई। अरविंद केजरीवाल की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि अवमानना कार्यवाही का आधार बनने वाली सामग्री अभी तक उपलब्ध नहीं कराई गई है, जिससे विस्तृत जवाब दाखिल करना संभव नहीं है। अन्य प्रतिवादियों के वकीलों ने भी यही दलील दी। इस पर अदालत ने दिल्ली हाईकोर्ट की रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि सभी संबंधित दस्तावेज और सामग्री प्रतिवादियों को उपलब्ध कराई जाए। साथ ही सभी पक्षों को अपना जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया गया।

गोपाल राय और सौरभ दास को भी चार सप्ताह की मोहलत

दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले में आम आदमी पार्टी के नेता गोपाल राय और सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता सौरभ दास को भी जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है। अदालत के समक्ष यह आरोप रखा गया कि जस्टिस स्वर्णा कांता शर्मा के खिलाफ सोशल मीडिया पर कथित रूप से एक सुनियोजित अभियान चलाया गया, जिसका उद्देश्य न्यायपालिका की छवि को प्रभावित करना था। इसी आधार पर संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की मांग की गई है।

Swarana Kanta: मई 2026 में शुरू हुई थी अवमानना कार्यवाही

इस मामले की शुरुआत मई 2026 में हुई थी। 14 मई को जस्टिस स्वर्णा कांता शर्मा ने न्यायपालिका के खिलाफ कथित अपमानजनक और मानहानिकारक सोशल मीडिया पोस्टों को लेकर आपराधिक अवमानना कार्यवाही शुरू करने का आदेश दिया था। इसके बाद 19 मई को दिल्ली हाईकोर्ट ने अरविंद केजरीवाल समेत अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। अवमानना कार्यवाही शुरू करने के साथ ही जस्टिस स्वर्णा कांता शर्मा ने कथित आबकारी नीति मामले की सुनवाई से स्वयं को अलग करने का फैसला भी लिया था। अब अदालत दस्तावेजों और सभी पक्षों के जवाब मिलने के बाद मामले की अगली सुनवाई करेगी।

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