Sheikh Hasina: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने एक बार फिर अपने देश लौटने की इच्छा जताकर राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है। वर्ष 2024 में सत्ता परिवर्तन के बाद भारत आईं शेख हसीना ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया से बातचीत में कहा कि वह दिसंबर में बांग्लादेश लौटना चाहती हैं। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि उन्हें वहां फांसी का खतरा है, लेकिन इसके बावजूद वह अपने लोगों के बीच वापस जाना चाहती हैं। वर्तमान में उनके खिलाफ 150 से अधिक मामले दर्ज हैं और कई मामलों में उन्हें दोषी भी ठहराया जा चुका है।
फांसी के खतरे के बावजूद वापसी की इच्छा
शेख हसीना का कहना है कि उन्हें अपने देश की जनता बुला रही है और वह अपने जीवन का अंतिम समय अपने वतन में बिताना चाहती हैं। उनके अनुसार, देश छोड़कर भागने वाली नेता की छवि को खत्म करना भी उनके फैसले की एक बड़ी वजह है। हसीना के पिता बांग्लादेश के संस्थापक थे और वह अपने राजनीतिक जीवन को उसी विरासत से जोड़कर देखती हैं।
Sheikh Hasina: राजनीतिक आधार और समर्थकों पर भरोसा
विश्लेषकों का मानना है कि शेख हसीना को अब भी बांग्लादेश के एक बड़े वर्ग का समर्थन प्राप्त है। कुछ सर्वेक्षणों में उनकी पार्टी आवामी लीग को लोकतंत्र के लिए महत्वपूर्ण बताया गया है। वहीं, पार्टी पर लगाए गए प्रतिबंधों का भी कई लोगों ने विरोध किया है। शहरी क्षेत्रों में उनकी धर्मनिरपेक्ष छवि और कट्टरपंथ के खिलाफ उनका रुख आज भी उनके समर्थकों के बीच मजबूत माना जाता है।
मौजूदा सरकार पर सवाल उठाने की रणनीति
हसीना की वापसी की इच्छा के पीछे मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियां भी अहम मानी जा रही हैं। उनकी पार्टी का आरोप है कि सत्ता परिवर्तन के बाद विकास की गति धीमी पड़ गई है और कई वादे पूरे नहीं हुए। पार्टी का मानना है कि मौजूदा सरकार की नीतियों से जनता निराश है और यही समय है जब आवामी लीग फिर से अपनी राजनीतिक मौजूदगी मजबूत कर सकती है।
Sheikh Hasina: आवामी लीग को बचाने की कोशिश
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि शेख हसीना लंबे समय तक देश से बाहर रहती हैं तो आवामी लीग की स्थिति और कमजोर हो सकती है। ऐसे में उनकी वापसी पार्टी के कार्यकर्ताओं में नया उत्साह पैदा करने और जनसमर्थन को फिर से संगठित करने की रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। हालांकि, उनके लौटने की स्थिति में कानूनी और राजनीतिक चुनौतियां पहले से कहीं अधिक कठिन हो सकती हैं।
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