BSP MLA DEATH: उत्तर प्रदेश की राजनीति से एक दुखद खबर सामने आई है। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के वरिष्ठ नेता और बलिया जिले की रसड़ा विधानसभा सीट से विधायक उमाशंकर सिंह का बुधवार को दिल्ली के फोर्टिस अस्पताल में निधन हो गया। वह 55 वर्ष के थे और लंबे समय से कैंसर से पीड़ित थे। उनके निधन से बसपा को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है, क्योंकि वर्तमान विधानसभा में वे पार्टी के इकलौते विधायक थे। उनके निधन की खबर मिलते ही समर्थकों और राजनीतिक दलों के नेताओं ने गहरा शोक व्यक्त किया।
छात्र राजनीति से विधानसभा तक का सफर
उमाशंकर सिंह ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत छात्र राजनीति से की थी। वर्ष 1990 में वह बलिया के एएसी कॉलेज के छात्रसंघ महामंत्री चुने गए। इसके बाद वर्ष 2000 में जिला पंचायत अध्यक्ष बने और स्थानीय राजनीति में अपनी मजबूत पहचान बनाई। वर्ष 2011 में उन्होंने बहुजन समाज पार्टी का दामन थामा और 2012 में पहली बार रसड़ा विधानसभा सीट से विधायक निर्वाचित हुए। इसके बाद 2017 और 2022 में भी लगातार जीत दर्ज कर उन्होंने अपनी लोकप्रियता साबित की।
BSP MLA DEATH: बसपा के लिए थे सबसे मजबूत चेहरा
वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में बसपा का खाता केवल उमाशंकर सिंह की जीत से खुला था। इसी कारण वह विधानसभा में पार्टी के एकमात्र विधायक बने। पार्टी प्रमुख मायावती उन्हें अपना भाई मानती थीं। वहीं, प्रदेश सरकार के कई नेताओं से भी उनके पारिवारिक संबंध थे। अपने क्षेत्र में जनसंपर्क और सामाजिक कार्यों के कारण उन्होंने अलग पहचान बनाई थी।
सामाजिक कार्यों से भी मिली पहचान
उमाशंकर सिंह राजनीति के साथ-साथ सामाजिक कार्यों के लिए भी जाने जाते थे। वर्ष 2012 में उन्होंने 251 बेटियों का सामूहिक विवाह कराया था। इसके बाद 2016 में 351 हिंदू-मुस्लिम जोड़ों के सामूहिक विवाह का आयोजन कर उन्होंने सामाजिक सौहार्द का संदेश दिया। इन आयोजनों की पूरे प्रदेश में चर्चा हुई थी।
BSP MLA DEATH: विवादों से भी रहा नाता
उमाशंकर सिंह का राजनीतिक जीवन विवादों से भी अछूता नहीं रहा। वर्ष 2017 में रिप्रेजेंटेशन ऑफ द पीपल एक्ट के उल्लंघन के आरोप में उनकी विधानसभा सदस्यता रद्द कर दी गई थी। उन पर सरकारी ठेके अपने नाम पर लेने का आरोप लगा था, जिसे लोकायुक्त जांच में सही पाया गया। हालांकि बाद के वर्षों में उन्होंने राजनीतिक वापसी की और लगातार जनता का विश्वास जीतते हुए विधानसभा पहुंचे। उनके निधन से उत्तर प्रदेश की राजनीति ने एक प्रभावशाली जननेता को खो दिया है।
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